HIGHLIGHTS
- बड़ा बदलाव: उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का एलान— भूमि सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यों में होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल।
- स्पेशल सेल: हर जिले के बंदोबस्त कार्यालय में बनेगा ‘एआई सेल’; शनिवार को होगी विशेष समीक्षा बैठक।
- डेडलाइन: 1 अप्रैल, 2026 से एआई आधारित टूल्स के प्रारंभिक उपयोग का लक्ष्य।
- पारदर्शिता: तकनीक से रुकेगी गड़बड़ी, कम होगी मानवीय त्रुटि और तय समय में पूरा होगा सर्वे।
- ट्रेनिंग: अमीनों से लेकर अधिकारियों तक को मिलेगा एआई का विशेष प्रशिक्षण; परीक्षा के बाद मिलेगा सर्टिफिकेट।
पटना | 15 मार्च, 2026
बिहार में जमीन के विवाद और दशकों से लटके भूमि सर्वेक्षण को अब ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) की रफ्तार मिलेगी। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने रविवार को राजस्व प्रशासन में क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जमीन की मापी, रिकॉर्ड का मिलान और सर्वेक्षण का कार्य केवल इंसान के भरोसे नहीं, बल्कि एआई की ‘तीसरी आंख’ की निगरानी में होगा।
हर शनिवार ‘एआई’ की क्लास: कैसे काम करेगा यह नया सेल?
भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशक सुहर्ष भगत द्वारा जारी पत्र के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में एआई सेल का गठन किया जाएगा।
- कमेटी का ढांचा: इस सेल की अध्यक्षता जिला बंदोबस्त पदाधिकारी करेंगे। इसमें आईटी प्रबंधक, विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी (इंजीनियरिंग), विशेष सर्वेक्षण कानूनगो और विशेष सर्वेक्षण अमीन शामिल रहेंगे।
- साप्ताहिक समीक्षा: प्रत्येक शनिवार को दोपहर 3 से 5 बजे तक एआई सेल की अनिवार्य बैठक होगी, जिसमें तकनीक के उपयोग और डेटा की शुद्धता पर चर्चा होगी।
- कोर्स और सर्टिफिकेट: विभाग न केवल एआई टूल्स देगा, बल्कि कर्मियों के लिए विशेष एआई पाठ्यक्रम भी लागू करेगा। प्रशिक्षण के बाद परीक्षा पास करने वालों को ही प्रमाणपत्र मिलेगा।
1 अप्रैल से ‘डिजिटल क्रांति’: भ्रष्टाचार और देरी पर लगेगा ब्रेक
राजस्व विभाग ने 1 अप्रैल, 2026 को उस ऐतिहासिक दिन के रूप में चुना है जब बिहार के भूमि सर्वेक्षण में एआई टूल्स का विधिवत प्रवेश होगा।
- त्रुटि पहचान: एआई सॉफ्टवेयर पुराने नक्शों और नए सर्वेक्षण के डेटा में विसंगतियों को सेकंडों में पकड़ लेगा।
- ईज ऑफ लिविंग: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘सात निश्चय-3’ के तहत लोगों के जीवन को सरल बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। यह पहल ‘इंडिया एआई मिशन’ और ‘बिहार एआई मिशन’ के तालमेल से चलेगी।
VOB का नजरिया: क्या ‘तकनीक’ हरा पाएगी ‘जमीन का जंजाल’?
बिहार में जमीन विवाद अपराध की सबसे बड़ी जड़ है। ऐसे में एआई का प्रवेश एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। अगर डेटा फीडिंग और मैपिंग में एआई का उपयोग होता है, तो अमीनों और कर्मचारियों की ‘मनमानी’ और ‘रिश्वतखोरी’ पर लगाम लग सकती है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण इलाकों के कर्मियों को एआई के साथ तालमेल बिठाने की होगी। यदि प्रशिक्षण प्रभावी रहा, तो बिहार भूमि सर्वेक्षण की यह ‘डिजिटल पटकथा’ देश के लिए नजीर बनेगी। लेकिन सवाल वही है—क्या डेटा एंट्री करने वाले हाथ उतने ही ईमानदार होंगे जितना एआई का एल्गोरिदम?


