बिहार में डायल-112 का दमदार रिकॉर्ड! 3 साल में 56 लाख लोगों तक पहुंची मदद, अब 10 मिनट में पहुंच रही पुलिस

बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम लोगों तक त्वरित पुलिस सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई डायल-112 सेवा ने तीन वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जुलाई 2022 में शुरू हुई इस आपातकालीन सेवा के जरिए अब तक 56 लाख से अधिक लोगों को मदद पहुंचाई जा चुकी है। बिहार पुलिस का दावा है कि राज्य में डायल-112 की टीम औसतन 10 से 11 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचकर कार्रवाई कर रही है।

6 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एकीकृत आपातकालीन सेवा डायल-112 का शुभारंभ किया था। इस सेवा के तहत पुलिस, अग्निशमन, महिला सुरक्षा, सड़क दुर्घटना और अन्य आपात स्थितियों में एक ही नंबर पर सहायता उपलब्ध कराई जाती है। लॉन्चिंग के समय अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि किसी भी कॉल पर 20 मिनट के भीतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए, लेकिन वर्तमान में रिस्पॉन्स टाइम घटकर लगभग 10 मिनट रह गया है।

पटना स्थित डायल-112 कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहता है। यहां करीब 90 पुलिस पदाधिकारी तैनात हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिला कर्मी शामिल हैं। इसके अलावा एडीजी, डीआईजी और पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी भी पूरी व्यवस्था की निगरानी करते हैं। प्रतिदिन कंट्रोल रूम में 6,000 से 7,000 कॉल प्राप्त होते हैं, जिनका त्वरित निस्तारण किया जाता है।

डायल-112 की कार्यप्रणाली पूरी तरह तकनीक आधारित है। जैसे ही कोई कॉल प्राप्त होती है, सिस्टम में इवेंट दर्ज हो जाता है और संबंधित क्षेत्र की इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल (ERV) या मोटरसाइकिल यूनिट को सूचना भेज दी जाती है। इसके बाद पुलिस टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हो जाती है।

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 22 लाख से अधिक स्थानीय विवाद, मारपीट और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप किया गया है। वहीं 3.75 लाख से अधिक घरेलू हिंसा, महिला एवं बाल अपराध से जुड़े मामलों में सहायता प्रदान की गई। लगभग 1.95 लाख सड़क दुर्घटनाओं में त्वरित राहत पहुंचाई गई, जबकि 1.18 लाख अग्निकांड की घटनाओं में फायर ब्रिगेड की मदद उपलब्ध कराई गई।

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी डायल-112 के तहत विशेष पहल की गई है। ‘सुरक्षित सफर सुविधा’ के माध्यम से महिलाएं अपनी यात्रा संबंधी जानकारी साझा कर सकती हैं और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकती हैं। इससे महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है।

हालांकि कंट्रोल रूम को कई बार गैर-जरूरी और मजाकिया कॉल का भी सामना करना पड़ता है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ लोग मोबाइल रिचार्ज, ट्रेन-बस की जानकारी या यहां तक कि पालतू जानवरों के बीमार होने जैसी शिकायतें भी डायल-112 पर दर्ज करा देते हैं, जिससे आपात सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

इस उपलब्धि पर बिहार पुलिस मुख्यालय ने संतोष जताया है। एडीजी अमित लोढ़ा ने कहा कि डायल-112 राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है और बिहार इस मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल है।

उन्होंने कहा, “फिलहाल हमारा औसत रिस्पॉन्स टाइम 10 मिनट है। मुख्यमंत्री की इच्छा है कि इसे घटाकर 7 मिनट के आसपास लाया जाए। हम लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं और जल्द ही इस लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद है।”

पुलिस मुख्यालय का कहना है कि आने वाले दिनों में डायल-112 को और अधिक संसाधनों से सशक्त बनाया जाएगा ताकि इसकी पहुंच गांव-गांव तक सुनिश्चित की जा सके और हर जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता मिल सके।

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