
पटना। बिहार सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के कृषि विभाग अंतर्गत उद्यान निदेशालय द्वारा फलों के सुरक्षित, वैज्ञानिक और नियंत्रित परिपक्वन के लिए राइपनिंग चैंबर की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल किसानों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाने में मदद करेगी, बल्कि कृषि आधारित उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। इस योजना को मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 के तहत ‘दोगुनी आय-दोगुना रोजगार’ संकल्प से जोड़ा गया है।
पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित उद्यान निदेशालय की समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने इस योजना की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अब खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि किसानों को मूल्य संवर्धन, वैज्ञानिक भंडारण और आधुनिक विपणन प्रणाली से जोड़कर उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना चाहती है।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में केला सहित कई प्रकार के फलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। लेकिन कटाई के समय बाजार में एक साथ अधिक मात्रा में फल आने के कारण कीमतों में गिरावट आ जाती है। इसका सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है, क्योंकि उन्हें मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है। पर्याप्त राइपनिंग चैंबर नहीं होने से फल उत्पादकों के पास उपज को सुरक्षित रखने या चरणबद्ध तरीके से बाजार में बेचने का विकल्प सीमित हो जाता है।
उन्होंने बताया कि यही कारण है कि बिहार के किसान अक्सर उत्पादन के बावजूद उचित लाभ नहीं कमा पाते। दूसरी ओर, जब स्थानीय उत्पादन समाप्त हो जाता है, तब राज्य को अन्य प्रदेशों से पके हुए फलों की आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे स्थानीय किसानों को संभावित अतिरिक्त लाभ नहीं मिल पाता। सरकार की नई योजना इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है।
राइपनिंग चैंबर आधुनिक कृषि अवसंरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह ऐसी तकनीकी सुविधा है, जिसमें फलों को नियंत्रित वातावरण में सुरक्षित रखा जाता है और वैज्ञानिक तरीके से पकाया जाता है। इसमें तापमान, आर्द्रता, वायु संचार और एथिलीन गैस का नियंत्रित उपयोग किया जाता है, जिससे फल प्राकृतिक रूप से समान रूप से पकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार राइपनिंग चैंबर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे कैल्शियम कार्बाइड जैसे हानिकारक रसायनों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। बाजार में कई बार फलों को जल्दी पकाने के लिए खतरनाक रसायनों का उपयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। वैज्ञानिक राइपनिंग प्रणाली इस समस्या का सुरक्षित विकल्प प्रदान करती है।
राइपनिंग चैंबर में पकाए गए फलों की गुणवत्ता सामान्य तरीकों की तुलना में बेहतर होती है। इससे फलों का रंग अधिक आकर्षक बनता है, स्वाद बेहतर रहता है और प्राकृतिक सुगंध भी बरकरार रहती है। इसके साथ-साथ फलों की शेल्फ लाइफ भी बढ़ती है, जिससे बाजार में उनकी मांग और कीमत दोनों बेहतर होती हैं।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार इस आधुनिक सुविधा को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना चाहती है। इसी उद्देश्य से राइपनिंग चैंबर की स्थापना पर 35 प्रतिशत तक अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। पात्र लाभार्थियों को अधिकतम 35,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन क्षमता तक सहायता दी जाएगी। यह सब्सिडी किसानों और उद्यमियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
यह योजना केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं है। सरकार ने किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, युवा उद्यमियों और फल उत्पादकों को भी इसका लाभ लेने के लिए पात्र बनाया है। इससे सामूहिक निवेश और बड़े स्तर पर कृषि अवसंरचना विकसित करने की संभावना बढ़ेगी।
सरकार का मानना है कि जब किसान समूह या एफपीओ इस प्रकार की तकनीक अपनाएंगे, तो बड़े पैमाने पर उत्पादन, भंडारण और विपणन संभव हो सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। फल उत्पादन वाले जिलों में यह मॉडल विशेष रूप से प्रभावी साबित हो सकता है।
कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में कृषि क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। आधुनिक मूल्य श्रृंखला का निर्माण, सुरक्षित भंडारण, प्रोसेसिंग और बेहतर मार्केट लिंक जरूरी है। यदि किसान उत्पादन से लेकर बिक्री तक वैज्ञानिक प्रणाली से जुड़ते हैं, तो उनकी आय में स्थायी सुधार संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में बागवानी क्षेत्र की अपार संभावनाएं हैं। केला, आम, लीची, अमरूद और अन्य फलों के उत्पादन में बिहार पहले से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यदि आधुनिक पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीकों को तेजी से अपनाया जाए, तो राज्य राष्ट्रीय स्तर पर फल आपूर्ति का बड़ा केंद्र बन सकता है।
राइपनिंग चैंबर जैसी परियोजनाएं खाद्य अपव्यय को भी कम कर सकती हैं। भारत में बड़ी मात्रा में फल और सब्जियां खराब भंडारण और अपर्याप्त कोल्ड चेन के कारण बर्बाद हो जाती हैं। वैज्ञानिक परिपक्वन और भंडारण से इस नुकसान को कम किया जा सकता है, जिससे उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को लाभ मिलता है।
महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए भी यह योजना विशेष अवसर लेकर आई है। ग्रामीण महिलाओं को कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम उठाया जा सकता है। छोटे स्तर पर भी राइपनिंग यूनिट स्थापित कर स्थानीय बाजारों में बेहतर गुणवत्ता वाले फल उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
कृषि मंत्री ने किसानों, एफपीओ, महिला समूहों और युवाओं से इस योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक अपनाने से ही कृषि क्षेत्र भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकेगा। बिहार सरकार इस दिशा में हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कुल मिलाकर बिहार सरकार की राइपनिंग चैंबर योजना राज्य के बागवानी क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। 35 प्रतिशत अनुदान, वैज्ञानिक परिपक्वन तकनीक और बेहतर बाजार मूल्य का यह मॉडल किसानों की आय बढ़ाने के साथ रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले वर्षों में यह पहल बिहार को सुरक्षित, उच्च-मूल्य और आधुनिक बागवानी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर सकती है।


