
पटना: बिहार विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान बुधवार को राज्य के 12 शहरों में प्रस्तावित टाउनशिप परियोजना के लिए जमीन की रजिस्ट्री पर लगी रोक का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान पार्षद सुनील सिंह ने सरकार को घेरते हुए कहा कि रजिस्ट्री पर रोक लगने से हजारों जमीन मालिक गंभीर आर्थिक संकट में हैं और जरूरत पड़ने पर भी अपनी जमीन नहीं बेच पा रहे हैं।
सदन में अपनी बात रखते हुए सुनील सिंह ने कहा, “मेरी पूरी जमीन टाउनशिप में चली गई है। बिना किसी स्पष्ट योजना के सरकार ने रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है। अगर मेरे सिर पर एक करोड़ रुपये का कर्ज है और मुझे अपनी जमीन बेचनी है, तो सरकार बताए कि मैं आखिर कब और कैसे अपनी जमीन बेच पाऊंगा?”
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह सदन में स्पष्ट समयसीमा बताए कि प्रभावित जमीन मालिकों की समस्या का समाधान कब तक होगा और उन्हें अपनी संपत्ति के अधिकार का उपयोग करने की अनुमति कब मिलेगी।
सुनील सिंह ने कहा कि टाउनशिप की घोषणा के बाद प्रभावित क्षेत्रों के लोग न तो अपनी जमीन बेच पा रहे हैं और न ही उस पर कोई आर्थिक निर्णय ले पा रहे हैं। इससे किसानों और जमीन मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इस पर जवाब देते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि सरकार जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े हजारों मामले अदालतों में लंबित हैं, इसलिए सरकार सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रही है।
मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि यदि कोई प्रभावित जमीन मालिक आवेदन देता है, तो जांच से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी जमीन मालिक को अनावश्यक परेशानी में डालना नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से उचित मुआवजा उपलब्ध कराना है।
टाउनशिप परियोजना को लेकर उठे इस मुद्दे के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कुछ देर तक बहस भी हुई। विपक्ष ने सरकार से प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा करने और रजिस्ट्री पर लगी रोक को लेकर स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग की।


