
बेगूसराय (बिहार) — जिंदगी ने 26 वर्षीय वंदना कुमारी और उसकी 7 वर्षीय बेटी अनन्या से जैसे खुशियां छीनने की कसम खा ली थी। चार साल तक पति को जेल से छुड़ाने के लिए मजदूरी की, हर सुनवाई में वकील को फीस दी, घर-परिवार संभाला। लेकिन पति कुंदन चौधरी के लौटने के महज दो दिन बाद ही बाढ़ के पानी में डूबकर मां-बेटी की मौत हो गई।
खुशियों की वापसी का दिन, जो आखिरी साबित हुआ
9 अगस्त 2025 की रात—कुंदन चौधरी 2 साल बाद फरीदाबाद जेल से बेल पर घर लौटा। छेड़खानी के एक केस में फंसने के बाद वह 2021 से जेल में था। घर वापसी के पहले ही दिन उसने गांव के सलहा सैदपुर बरारी पंचायत-1 के धनहा मोहल्ले में सत्यनारायण भगवान की कथा करवाई, ताकि परिवार पर से संकट टल जाए।
पत्नी वंदना चार साल से इस दिन का इंतजार कर रही थी। वह पति की रिहाई के लिए मजदूरी करती, वकील को पैसे देती, बेटी की परवरिश करती रही। अनन्या भी अपने पापा से घुमाने और खिलौने लाने की फरमाइश कर रही थी। सबको लगा कि अब मुसीबत के दिन खत्म हो गए हैं—लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
खेलते-खेलते पानी में गई गेंद, फिर…
10 अगस्त की दोपहर। बाढ़ का पानी पूरे गांव में फैला हुआ था—चारों तरफ 20 फीट गहराई तक पानी। अनन्या घर के दरवाजे के पास चचेरे भाई भवेश के साथ खेल रही थी। अचानक उसकी गेंद पानी में चली गई। गेंद निकालने के लिए वह किनारे पहुंची, लेकिन पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में गिर गई।
चचेरे भाई भवेश ने उसे बचाने की कोशिश की, पर पानी का तेज बहाव उसे भी डुबोने लगा। तभी मां वंदना ने बेटी को डूबता देखा और बिना सोचे-समझे पानी में छलांग लगा दी। लेकिन वह भी गहरे पानी में समा गई। कुछ ही देर में मां-बेटी दोनों की मौत हो गई।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
- 2017: कुंदन और वंदना ने लव मैरिज की। शुरुआत में परिवार में विवाद हुआ, पर कुंदन के पिता ने मामला संभाल लिया।
- 2018: बेटी अनन्या का जन्म हुआ। दोनों ने ठाना कि बेटी को अच्छी पढ़ाई देंगे, अच्छा भविष्य बनाएंगे।
- 2020: कुंदन के पिता की करंट लगने से मौत। श्राद्ध में सारी जमा पूंजी खत्म हो गई और 2 लाख का कर्ज चढ़ गया।
- 2021: कर्ज चुकाने के लिए कुंदन, पत्नी और बेटी को लेकर फरीदाबाद चला गया मजदूरी करने।
- वहीं एक छेड़खानी के मामले में फुफेरे भाई के साथ नाम आने पर जेल चला गया।
- 2021–2025: वंदना ने अकेले मजदूरी कर घर और बेटी की जिम्मेदारी निभाई, पति को छुड़ाने की कोशिश करती रही।
- 7 अगस्त 2025: कुंदन को बेल मिली।
- 9 अगस्त 2025: घर लौटकर पूजा कराई।
- 10 अगस्त 2025: मां-बेटी की मौत।
टूटा कुंदन का संसार
कुंदन का कहना है—”चार साल बाद सोचा था, अब परिवार के साथ खुशी-खुशी रहूंगा, लेकिन भगवान ने एक दिन की भी मोहलत नहीं दी।” अब वह बिल्कुल टूट चुका है।
प्रशासन की मदद
बेगूसराय के डीएम तुषार सिंगला ने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की सहायता राशि सीएफएमएस के माध्यम से हस्तांतरित कर दी गई है।


