नरकटियागंज में मानवता शर्मसार: शादी का झांसा देकर नाबालिग का यौन शोषण; पंचायत में मांगी बाइक और नकदी, आरोपी गिरफ्तार

पश्चिमी चंपारण/नरकटियागंज | 28 फरवरी, 2026: बिहार के नरकटियागंज से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल कानून बल्कि सामाजिक नैतिकता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। शिकारपुर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की को प्रेम जाल में फंसाकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया गया। हद तो तब हो गई जब न्याय के लिए बुलाई गई पंचायत में आरोपी पक्ष ने पीड़ित परिवार से दहेज के रूप में बाइक और मोटी नकदी की मांग कर डाली।

वारदात का विवरण: सुनहरे सपने दिखाकर किया ‘शिकार’

​केसरिया गांव के रहने वाले नितेश कुमार ने नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर अपने विश्वास में लिया था:

  • यौन शोषण: आरोपी ने शादी का वादा कर लंबे समय तक पीड़िता का शारीरिक शोषण किया।
  • शादी से इनकार: जब पीड़िता ने सामाजिक मर्यादा और भविष्य का हवाला देते हुए शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी बहानेबाजी करने लगा।

पंचायत का शर्मनाक चेहरा: ‘सौदा’ बना रिश्ता

​मामला जब समाज के सामने आया, तो गांव में पंचायत बैठी। लेकिन यहाँ न्याय के बजाय लालच का खेल शुरू हो गया:

  1. दहेज की मांग: आरोपी के परिजनों ने पंचायत में साफ कहा कि यदि शादी करनी है, तो उन्हें एक बाइक और भारी नकद राशि देनी होगी।
  2. गरीबी पर प्रहार: पीड़िता का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। मांग पूरी न कर पाने की स्थिति में आरोपी पक्ष ने रिश्ता तोड़ दिया और शादी से साफ मना कर दिया।

पुलिस का ‘जीरो टॉलरेंस’ एक्शन

​पंचायत से निराश होकर पीड़िता की मां ने शिकारपुर थाने का दरवाजा खटखटाया। पुलिस ने बिना देर किए कड़ी कार्रवाई की:

    • त्वरित गिरफ्तारी: थानाध्यक्ष ज्वाला कुमार सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जिम्मेदारी महिला अनुसंधानकर्ता एकता सागर को सौंपी।
    • जेल की सलाखें: ठोस साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार को छापेमारी कर मुख्य आरोपी नितेश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

“महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों में हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उसे सख्त सजा दिलाई जाएगी।”

ज्वाला कुमार सिंह, थानाध्यक्ष, शिकारपुर

VOB का नजरिया: पंचायत या वसूली का अड्डा?

यह मामला केवल यौन शोषण का नहीं, बल्कि समाज के उस खोखलेपन का भी है जहाँ पंचायतों में अपराधियों को दंड देने के बजाय पीड़ितों की मजबूरी का सौदा किया जाता है। एक नाबालिग के साथ हुए अपराध पर दहेज मांगना मानसिक दिवालियापन की पराकाष्ठा है। शिकारपुर पुलिस की तत्परता काबिल-ए-तारीफ है कि उन्होंने रसूख और पंचायत के दबाव को दरकिनार कर अपराधी को सलाखों के पीछे पहुँचाया।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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