
पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन का वातावरण फिर से गरमा गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक हुई। राजद विधायक भाई वीरेंद्र और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के बीच तीखी बहस के बाद सदन को स्थगित करना पड़ा।
‘गुंडई’ और ‘बपौती’ के बीच भिड़े सत्तापक्ष-विपक्ष
हंगामे की शुरुआत तब हुई जब डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि “गुंडई के बदौलत चुनाव जीतकर आए हैं।” इस टिप्पणी पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र भड़क उठे और जवाब में कहा:
“ये सदन किसी के बाप की बपौती नहीं है।”
डिप्टी सीएम की टिप्पणी पर भाई वीरेंद्र ने उंगली दिखाते हुए विरोध जताया और कहा:
“तुम्हारे बाप का सदन है क्या?”
इस पर सत्ता पक्ष भी भड़क गया और हंगामा बढ़ गया।
विधानसभा अध्यक्ष ने मांगी माफी, लेकिन इनकार
विधानसभा अध्यक्ष ने भाई वीरेंद्र को माफी मांगने को कहा, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया और कहा कि “मुझे माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है, मैंने कोई असंसदीय शब्द नहीं कहा है।”
बयान पर राजनीतिक बवाल
सदन से बाहर आने के बाद जब मीडिया ने इस पर प्रतिक्रिया मांगी तो भाई वीरेंद्र ने दोहराया:
“मैं अपने बयान पर कायम हूं। सदन किसी की बपौती नहीं है। माफी क्यों मांगूं?”
वहीं, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और मंत्री अशोक चौधरी ने राजद विधायक के बयान को लेकर माफी की मांग की और कहा कि यह सदन की गरिमा के खिलाफ है।
तेजस्वी यादव के वक्तव्य के दौरान बढ़ा विवाद
जिस समय यह पूरा घटनाक्रम घटित हुआ, उस समय नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सदन में ‘SIR योजना’ के मुद्दे पर अपनी बात रख रहे थे। विजय सिन्हा ने उसपर टिप्पणी करते हुए कहा “ये क्या बोलेंगे?”, जिससे बहस की चिंगारी भड़क उठी।
सदन की गरिमा पर सवाल
यह घटना न सिर्फ सदन में हंगामे का कारण बनी, बल्कि सदन की मर्यादा को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी दलों से संयम और गरिमा बनाए रखने की अपील की है।
बिहार विधानसभा का मानसून सत्र एक बार फिर राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। विपक्ष सरकार पर सवाल उठाने में जुटा है तो सत्ता पक्ष पलटवार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। देखना यह है कि आने वाले दिनों में सदन सुचारु रूप से चलेगा या फिर हंगामे की पुनरावृत्ति होती रहेगी।


