पटना AI समिट में भारी हंगामा, एंट्री नहीं मिलने पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन

बिहार की राजधानी पटना में आयोजित दो दिवसीय एआई समिट के दौरान भारी हंगामे की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में पहुंचे छात्रों को कार्यक्रम स्थल के अंदर प्रवेश नहीं दिए जाने पर नाराजगी फैल गई और छात्रों ने गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार सुबह से ही विभिन्न कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों के छात्र कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पहुंचने लगे थे। लेकिन सुरक्षा और सीमित सीटों का हवाला देकर कई छात्रों को मुख्य द्वार पर ही रोक दिया गया। इसके बाद वहां नारेबाजी और विरोध शुरू हो गया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।

बताया जा रहा है कि इस हाई-प्रोफाइल एआई समिट में बिहार के बाहर रह रहे बड़ी संख्या में बिहारी युवाओं को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आयोजकों द्वारा 500 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक की रजिस्ट्रेशन फीस तय की गई थी, जिसे प्रतिभागियों ने पहले ही ऑनलाइन जमा कर दिया था।

कई छात्रों का आरोप था कि वैध पास और रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद उन्हें कार्यक्रम में प्रवेश नहीं दिया गया। समिट में पहुंचे एक युवक सूरज कुमार ने कहा कि उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था और पास भी मिला था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।

छात्रों का कहना था कि एआई और तकनीक जैसे विषयों पर आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण था, लेकिन खराब व्यवस्थाओं के कारण उन्हें इसका लाभ नहीं मिल सका। दूर-दराज के जिलों से पहुंचे कई छात्रों को बिना कार्यक्रम में शामिल हुए वापस लौटना पड़ा।

हंगामे के बाद आयोजकों और प्रशासन की ओर से सफाई दी गई कि कार्यक्रम स्थल की क्षमता सीमित थी और सुरक्षा कारणों से केवल अंतिम सूची में शामिल लोगों को ही प्रवेश दिया गया। अधिकारियों ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील भी की।

इस तकनीकी कार्यक्रम में Samrat Choudhary समेत शासन-प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने प्रवासी बिहारियों से राज्य के विकास में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने युवाओं से बिहार लौटकर राज्य के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जाएगी और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों को 48 घंटे के भीतर जवाब दिया जाएगा।

सम्राट चौधरी ने मंच से यह भी कहा कि “अपराधियों की कोई जाति और धर्म नहीं होता।” इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारी फाइलों में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ 30 दिनों के भीतर कार्रवाई की जाएगी।

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