
बिहार में शादी-विवाह का मौसम शुरू होने से पहले इस बार सर्राफा बाजारों का नजारा बदला-बदला दिखाई दे रहा है। जहां हर साल इस समय गहनों की खरीदारी के लिए बाजारों में भारी भीड़ उमड़ती थी, वहीं अब कई दुकानों में सन्नाटा पसरा हुआ है। शोकेस में सजे सोने के हार, कंगन और मंगलसूत्र ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। कारोबारी इसकी बड़ी वजह प्रधानमंत्री की उस अपील को मान रहे हैं, जिसमें लोगों से देशहित में एक साल तक सोना नहीं खरीदने की बात कही गई थी।
पटना समेत बिहार के कई शहरों के ज्वेलरी बाजारों में अब लोग केवल जरूरी आभूषण खरीदने पहुंच रहे हैं। भारी गहनों की जगह हल्के वजन वाले डिजाइन की मांग बढ़ गई है। पहले जहां शादी के लिए 20 से 30 ग्राम तक के गहने खरीदे जाते थे, वहीं अब लोग 5 से 10 ग्राम तक के गहनों में काम चला रहे हैं।
सनातन परंपरा में शादी और कन्यादान में सोने के आभूषणों का विशेष महत्व माना जाता है। पटना के आचार्य राजन उपाध्याय के अनुसार कन्या को सोने के पांच आभूषण देने की परंपरा है, जबकि वर को सोने की अंगूठी दी जाती है। उन्होंने बताया कि कन्यादान, सोना दान और गौदान जैसी परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं और गरीब परिवार भी अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ सोना जरूर देते हैं।
आचार्य राजन ने बताया कि शादी में दुल्हन के लिए ढोलना, मंगलसूत्र, मांग टीका, कंगन, झुमका और नथुनी जैसे आभूषण जरूरी माने जाते हैं। यही कारण है कि लोग प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद पूरी तरह खरीदारी बंद नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि अब लोग कम वजन वाले गहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पटना के बाकरगंज सर्राफा बाजार में खरीदारी करने पहुंचे शिवकुमार ने बताया कि वह अपनी बहन की शादी के लिए केवल जरूरी गहने खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले रिश्तेदारों को भी सोने के उपहार दिए जाते थे, लेकिन इस बार खर्च कम करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर ज्वेलरी कारोबारियों का कहना है कि बाजार में ग्राहकों की संख्या तेजी से घटी है। पटना के कारोबारी ओमप्रकाश ने बताया कि सामान्य तौर पर जून में शादी सीजन शुरू होने से पहले बाजार में काफी भीड़ रहती थी, लेकिन इस बार ग्राहक लगभग गायब हैं। उन्होंने कहा कि लोग केवल जरूरी अंगूठी या हल्की चेन खरीद रहे हैं और बड़े गहनों की बिक्री लगभग बंद हो गई है।
व्यापारियों के अनुसार सोने की कीमतों में पहले से बढ़ोतरी थी और अब प्रधानमंत्री की अपील के बाद मांग में और गिरावट आ गई है। कई छोटे दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों का वेतन और बैंक की ईएमआई चुकाना मुश्किल हो रहा है।
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन बिहार के अध्यक्ष Ashok Kumar Verma ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद बिहार में सोने का कारोबार लगभग 75 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। उनके अनुसार पहले बिहार में रोजाना 100 से 125 करोड़ रुपये तक का कारोबार होता था, जो अब घटकर 25 से 30 करोड़ रुपये तक रह गया है।
उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारियों पर बैंकों का दबाव बढ़ता जा रहा है और अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कई व्यापारी डिफॉल्टर हो सकते हैं। कारोबारियों का कहना है कि सरकार को छोटे ज्वेलरी व्यवसायियों की आर्थिक स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।


