नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा, ड्यूटी से लौट रहे होमगार्ड जवान की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है, जहां ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे एक होमगार्ड जवान की जान चली गई। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है। जवान की असामयिक मौत के बाद उसके तीन छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है, जिससे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

देर रात हुआ हादसा, मौके पर ही मौत

यह घटना सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर थाना क्षेत्र की है, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 107 पर शुक्रवार की देर रात यह भीषण दुर्घटना हुई। जानकारी के अनुसार, रंगनिया गांव के पास एक ऑटो रिक्शा और बाइक की जोरदार टक्कर हो गई।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुआ। रात का समय होने के कारण सड़क पर दृश्यता भी कम थी, जिससे दुर्घटना और गंभीर हो गई।

मृतक की पहचान और पारिवारिक स्थिति

मृतक की पहचान भवेश कुमार जादव के रूप में हुई है, जो सहरसा जिले के सोनबरसा कचहरी थाना में होमगार्ड के पद पर तैनात थे। वह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद बाइक से अपने घर नैनपुर लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया।

भवेश कुमार अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन छोटे बच्चे हैं। अचानक हुई इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

पिता की मौत के बाद बच्चों का भविष्य अनिश्चित हो गया है, वहीं पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस घटना से दुखी नजर आ रहा है।

पोस्टमार्टम के बाद सौंपा गया शव

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही संबंधित वाहन और चालक की भी पहचान की जा रही है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

पुलिस विभाग में शोक की लहर

भवेश कुमार जादव की मौत की खबर मिलते ही पुलिस विभाग में भी शोक की लहर दौड़ गई। सहकर्मियों ने उन्हें एक मेहनती और जिम्मेदार जवान बताया।

अधिकारियों ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है और परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मांग की है कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी सरकार उठाए।

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस हादसे के बाद एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग होने के बावजूद यहां दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही अधिक है, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। रात के समय प्रकाश व्यवस्था भी ठीक नहीं होने के कारण हादसों की आशंका और बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर ही ऐसे हादसों को रोक सकता है।

परिवार के सामने खड़ी बड़ी चुनौती

भवेश कुमार की मौत ने उनके परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया है। अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की परवरिश और भविष्य को लेकर है।

गांव के लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए, ताकि वे इस कठिन समय से उबर सकें।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि सड़क पर एक छोटी सी लापरवाही किसी के पूरे परिवार को बर्बाद कर सकती है।

  • ये भी पढ़े..

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भागलपुर वन विभाग में योग शिविर, वनकर्मियों ने अपनाया स्वस्थ जीवन का संकल्प

    Share Add as a preferred…