
वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों में आमतौर पर सोना और चांदी निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। इतिहास गवाह रहा है कि जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशक बड़े पैमाने पर कीमती धातुओं की ओर रुख करते हैं, जिससे इनके दाम तेजी से बढ़ जाते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह उलट नजर आ रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध के माहौल के बावजूद भारतीय सर्राफा बाजार में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति बाजार विशेषज्ञों और निवेशकों दोनों के लिए हैरान करने वाली है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे समय में कीमतें उछाल मारती हैं।
ऑल टाइम हाई से भारी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में जबरदस्त गिरावट देखी गई है। कुछ समय पहले तक सोना अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन अब यह अपने शिखर से काफी नीचे कारोबार कर रहा है।
सोने की कीमत जहां अपने ऑल टाइम हाई से लगभग 50 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक नीचे आ चुकी है, वहीं चांदी में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी, जिसने हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाई छुई थी, अब लगभग 2 लाख रुपये प्रति किलो तक टूट चुकी है।
इस गिरावट ने उन निवेशकों को बड़ा झटका दिया है, जिन्होंने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी और अब उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले 40 दिनों में क्या हुआ?
अगर पिछले डेढ़ महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो गिरावट का ट्रेंड साफ दिखाई देता है। फरवरी के अंत में जहां सोने की कीमतें काफी ऊंचाई पर थीं, वहीं अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई।
इसी तरह चांदी की कीमतों में भी निरंतर गिरावट का सिलसिला जारी रहा। कुल मिलाकर दोनों धातुओं में हजारों रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जो यह दिखाती है कि बाजार में दबाव लगातार बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल तकनीकी कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों के व्यवहार में बदलाव का भी परिणाम है।
युद्ध और बाजार का उलटा असर
सामान्य धारणा यह होती है कि युद्ध या तनाव के समय सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार इसके उलट देखने को मिला है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद निवेशकों का रुझान सोने की बजाय अन्य संपत्तियों की ओर शिफ्ट होता दिख रहा है।
इसके पीछे एक बड़ा कारण लिक्विडिटी संकट और मार्जिन कॉल का दबाव माना जा रहा है। जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो कई निवेशक अपने नुकसान की भरपाई के लिए सोना और चांदी बेचने लगते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
शांति वार्ता विफल, बढ़ी अनिश्चितता
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की खबरों से बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली थी और कीमतों में मामूली सुधार भी हुआ था। लेकिन दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण शांति वार्ता विफल हो गई है।
इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव ने वैश्विक बाजार में चिंता और बढ़ा दी है। यह क्षेत्र तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर यहां स्थिति बिगड़ती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
वर्तमान स्थिति निवेशकों के लिए काफी जटिल है। एक ओर कीमतों में गिरावट खरीदारी का मौका देती है, तो दूसरी ओर लगातार गिरते बाजार में जोखिम भी बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार “वेट एंड वॉच” की स्थिति में है। जब तक वैश्विक हालात स्पष्ट नहीं होते, तब तक सोना और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह समय रणनीति बनाने का हो सकता है, जबकि अल्पकालिक निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
आगे क्या हो सकता है?
अगर युद्ध और अधिक गंभीर होता है या वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ा व्यवधान आता है, तो बाजार में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है। ऐसे में सोना-चांदी की कीमतों में और गिरावट भी संभव है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लंबे समय में सोना अपनी पारंपरिक सुरक्षित निवेश की भूमिका निभा सकता है और कीमतों में फिर से तेजी लौट सकती है।
फिलहाल बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां हर खबर का सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और सोच-समझकर फैसला लेने की जरूरत है।


