ऐतिहासिक फैसला: 33 बच्चों के यौन शोषण मामले में दरिंदे JE और उसकी पत्नी को फांसी की सजा; अश्लील वीडियो विदेशों में बेचने का था आरोप

बांदा/उत्तर प्रदेश | 21 फरवरी, 2026: उत्तर प्रदेश के बांदा से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक स्थानीय अदालत ने 33 नाबालिग बच्चों के यौन शोषण, उनके अश्लील वीडियो बनाने और उन्हें विदेशों में बेचने के जघन्य अपराध में सिंचाई विभाग के पूर्व अवर अभियंता (JE) राम भवन और उसकी पत्नी को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।

​यह मामला न केवल बच्चों के प्रति क्रूरता की पराकाष्ठा था, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट का हिस्सा भी था।

केस की पृष्ठभूमि: 2020 में CBI ने किया था खुलासा

​विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह के अनुसार, नरैनी थाना क्षेत्र के खरोच गांव निवासी राम भवन चित्रकूट जिले में सिंचाई विभाग में कार्यरत था। साल 2020 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस डार्क वेब और डिजिटल पोर्नोग्राफी रैकेट का भंडाफोड़ किया था।

अपराध का खौफनाक स्वरूप:

  • पीड़ितों की संख्या: 33 मासूम बच्चे (उम्र 3 वर्ष से 18 वर्ष के बीच)।
  • कृत्य: बच्चों का यौन शोषण करना, उनके अश्लील वीडियो और फोटो खींचना।
  • अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन: इन वीडियो को डार्क वेब के माध्यम से विदेशों में बेचना।
  • ब्लैकमेलिंग: बच्चों और उनके परिवारों को डरा-धमका कर चुप रखना।

पत्नी की संलिप्तता: मूकदर्शक नहीं, बराबर की साझीदार

​विवेचना के दौरान जब 3 साल से 18 साल तक के बच्चों के बयान दर्ज किए गए, तो एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। बच्चों ने बताया कि इस घिनौने काम में JE की पत्नी भी सक्रिय रूप से शामिल थी। वह बच्चों को बहलाने-फुसलाने और वीडियो बनाने में अपने पति की मदद करती थी। अदालत ने माना कि उसकी संलिप्तता ने अपराध की गंभीरता को और बढ़ा दिया, जिसके कारण उसे भी फांसी की सजा सुनाई गई है।

अदालत का कड़ा रुख: “समाज के लिए नासूर”

​न्यायालय ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (विरलतम से विरल) माना। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक सरकारी पद पर तैनात व्यक्ति द्वारा समाज के सबसे कमजोर वर्ग (बच्चों) के साथ ऐसा विश्वासघात और दरिंदगी माफी के योग्य नहीं है।

​”यह फैसला उन सभी अपराधियों के लिए एक चेतावनी है जो मासूमियत का सौदा करते हैं। न्याय मिलने में समय जरूर लगा, लेकिन सजा ऐसी मिली है जो समाज में एक कड़ा संदेश देगी।”

विशेष लोक अभियोजक, सौरभ सिंह

द वॉयस ऑफ बिहार की राय

​ऑनलाइन सुरक्षा और बच्चों की निगरानी आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह मामला याद दिलाता है कि अपराधी हमारे समाज के बीच ही छिपे हो सकते हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों के व्यवहार और उनके आसपास के लोगों के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए।

  • Related Posts

    रोहतास का ‘मठिया डेथ मिस्ट्री’: शराब, कुत्ता काटना या कुछ और? डॉक्टर के सनसनीखेज खुलासे और पिता के बयान से प्रशासन के दावों पर उठे सवाल

    Share Add as a preferred…

    Continue reading