नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में तनाव के बढ़ते हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पेट्रोलियम, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी समेत अन्य वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।
ऊर्जा आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स पर फोकस
बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि देश में ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहे। अधिकारियों ने पीएम मोदी को क्षेत्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम से उत्पन्न संभावित बाधाओं और उनके प्रभाव को कम करने की तैयारियों से अवगत कराया।
सरकार का लक्ष्य है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत रहे और आपूर्ति श्रृंखला लचीली बनी रहे। इसके साथ ही देशभर में पेट्रोलियम उत्पादों, गैस, बिजली और उर्वरकों का वितरण निरंतर और व्यवस्थित तरीके से होता रहे।
पीएम मोदी ने दी शांति और संयम की अपील
12 मार्च को पीएम मोदी ने कहा कि मध्य पूर्व में युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। उन्होंने जनता से शांति, धैर्य और जागरूकता बनाए रखने का आह्वान किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधाओं को दूर करने के प्रयासों का जिक्र किया।
ईरान-खाड़ी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
ईरान ने अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में खाड़ी देशों और इजरायल पर प्रतिक्रिया दी, जिससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी प्रभावित हुआ। इस घटना का असर भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा।
पीएम मोदी ने संघर्ष के प्रारंभ से ही सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल और ईरान के नेताओं के साथ लगातार फोन पर संवाद बनाए रखा। इस प्रक्रिया में ईरान ने भारत के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकलने की अनुमति भी दी।


