
पटना: बिहार के विश्वविद्यालयों में वर्षों से चली आ रही शैक्षणिक अव्यवस्था और सत्र विलंब की समस्या को दूर करने के लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति Syed Ata Hasnain ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में अब एक समान एकेडमिक कैलेंडर लागू किया जाएगा। यह व्यवस्था आगामी जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से प्रभावी होगी।
सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक ही कैलेंडर
नई व्यवस्था के तहत फिलहाल स्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रमों में एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू किया जाएगा। खास बात यह है कि इस कैलेंडर को राज्यपाल सचिवालय ने स्वयं तैयार किया है और सभी कुलपतियों को इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
विद्यार्थियों को मिलेगा बड़ा लाभ
अब तक बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालय अपने-अपने स्तर पर शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करते थे। इसके कारण कई विश्वविद्यालयों में सत्र महीनों और कहीं-कहीं वर्षों तक पीछे चल रहे थे। इसका सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता था, क्योंकि परीक्षाएं और परिणाम समय पर नहीं हो पाते थे।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी विश्वविद्यालयों में एक ही समय पर नामांकन, कक्षाएं, परीक्षाएं और परिणाम घोषित किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों में लाभ मिलेगा।
NEP 2020 के अनुरूप होगा संचालन
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया है। अधिकारियों के अनुसार सभी विश्वविद्यालयों को अब एनईपी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करना होगा। इससे शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और समन्वय बढ़ेगा।
सिर्फ 7 दिन की ही मिलेगी छूट
राज्यपाल सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि एकेडमिक कैलेंडर का अक्षरशः पालन अनिवार्य होगा। केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में अधिकतम सात दिनों की देरी स्वीकार की जाएगी। यदि किसी विश्वविद्यालय में इससे अधिक विलंब होता है, तो उसकी विस्तृत रिपोर्ट राज्यपाल सचिवालय को भेजनी होगी।
पीजी कोर्स में भी लागू होगी व्यवस्था
भविष्य में स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों के लिए भी एक समान एकेडमिक कैलेंडर लागू करने की योजना बनाई जा रही है। कुलपतियों को इसकी पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि विश्वविद्यालयों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
उच्च शिक्षा में आएगा बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट सिस्टम को भी मजबूती मिलेगी, जिससे विद्यार्थियों को अधिक शैक्षणिक लचीलापन प्राप्त होगा।


