अवैध शराब तस्करी मामले में बड़ा फैसला: चालक को 8 साल की सजा, एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया

भागलपुर। बिहार में शराबबंदी कानून के तहत चल रही कार्रवाई के बीच भागलपुर से एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला सामने आया है। अवैध शराब की तस्करी से जुड़े एक मामले में उत्पाद न्यायालय-2 ने दोषी चालक को कठोर दंड सुनाते हुए आठ वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर जुर्माने की राशि जमा नहीं की जाती है तो दोषी को अतिरिक्त छह महीने की कैद भी भुगतनी होगी।

यह फैसला शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय के निर्णय को कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासन के लिए भी बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे अवैध शराब कारोबार में शामिल लोगों के बीच कड़ा संदेश जाएगा कि ऐसे अपराधों के प्रति न्यायपालिका सख्त रुख अपना रही है।

मामला वर्ष 2022 का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 अक्टूबर 2022 को सबौर-गोराडीह क्षेत्र में पुलिस और उत्पाद विभाग द्वारा विशेष वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा था। उस दौरान संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए एक कार को जांच के लिए रोका गया। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद की गई।

जांच के समय कार में तीन लोग सवार थे। पुलिस ने मौके पर ही तीनों को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। बरामद शराब के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और सभी आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के लिए प्रस्तुत किया गया।

इस घटना के बाद सबौर-गोराडीह थाना कांड संख्या 437/22 तथा विशेष उत्पाद वाद संख्या 3555/2022 के तहत मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा। जांच एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों, जब्त सामग्री और गवाहों के बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा।

मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में से दो आरोपी फरार हो गए। न्यायालय में लगातार पेशी से अनुपस्थित रहने के कारण उनके खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं तीसरा आरोपी और वाहन चालक सोनू कुमार न्यायालय के समक्ष उपस्थित होता रहा और मुकदमे की सुनवाई में शामिल रहा।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों, जब्ती सूची, पुलिस रिपोर्ट तथा गवाहों के बयानों का विस्तृत परीक्षण किया गया। अभियोजन पक्ष ने यह साबित करने का प्रयास किया कि वाहन में मौजूद अवैध शराब के परिवहन में चालक की सक्रिय भूमिका थी और वह इस अवैध गतिविधि की जानकारी रखता था।

लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी के खिलाफ आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। इसी आधार पर अदालत ने सोनू कुमार को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि शराबबंदी कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए क्योंकि ऐसे अपराध समाज और कानून व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती पैदा करते हैं। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए दोषी को आठ वर्ष के कारावास की सजा दी गई।

इसके साथ ही अदालत ने एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि दोषी निर्धारित राशि जमा नहीं करता है तो उसे छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। न्यायालय के इस फैसले को शराब तस्करी के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

मामले से जुड़े अभिलेखों के अनुसार वाहन में चालक सोनू कुमार के अलावा रोहित कुमार और विनीत कुमार तिवारी भी मौजूद थे। तीनों की भूमिका की जांच की गई थी और इसी आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई थी। हालांकि बाद में दो आरोपियों के फरार हो जाने से मामला और जटिल हो गया था।

इस पूरे मामले की सुनवाई उत्पाद न्यायालय-2 में न्यायिक पदाधिकारी शिवकुमार शर्मा की अदालत में चल रही थी। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद अंतिम फैसला सुनाया।

मामले की जानकारी देते हुए अधिवक्ता भोला कुमार मंडल ने बताया कि न्यायालय ने सभी उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी पाया और उसी के अनुरूप सजा निर्धारित की। उन्होंने कहा कि अदालत का यह फैसला कानून के शासन को मजबूत करने वाला है और इससे अवैध शराब कारोबार में शामिल लोगों को स्पष्ट संदेश मिलेगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से अवैध शराब की तस्करी रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रही है। इसके बावजूद पुलिस और उत्पाद विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। कई मामलों में दोषसिद्धि होने से कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को बल मिला है।

भागलपुर सहित आसपास के जिलों में समय-समय पर वाहन जांच, छापेमारी और विशेष अभियान चलाए जाते रहे हैं। इन अभियानों के दौरान बड़ी मात्रा में शराब बरामद होने के साथ-साथ कई तस्करों की गिरफ्तारी भी हुई है। प्रशासन का दावा है कि शराब के अवैध नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।

न्यायालय का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल शराब की बरामदगी ही नहीं, बल्कि उसके परिवहन और तस्करी में शामिल व्यक्तियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका साक्ष्यों के आधार पर साबित होती है तो उसे कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों का मानना है कि ऐसे फैसले भविष्य में अवैध शराब कारोबार पर अंकुश लगाने में सहायक साबित होंगे। इससे उन लोगों में भय पैदा होगा जो आर्थिक लाभ के लिए शराब तस्करी जैसे अपराधों में शामिल होते हैं।

फिलहाल अदालत के फैसले के बाद दोषी चालक को निर्धारित सजा भुगतनी होगी, जबकि फरार अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। प्रशासन और पुलिस को उम्मीद है कि इस तरह की न्यायिक कार्रवाई से शराबबंदी कानून को और मजबूती मिलेगी तथा समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़ेगा।

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