खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 का भव्य समापन: बिहार ने रचा नया इतिहास

– 620% पदक वृद्धि के साथ 15वां स्थान, झारखंड को पछाड़ बनी खेलों की नई प्रयोगशाला

– गांवों की मिट्टी से निकली प्रतिभाओं ने दिखाया राष्ट्रीय स्तर पर दमखम
– मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी नीति और योजनाओं का नतीजा

पटना, 16 मई।खेलों के राष्ट्रीय मंच पर बिहार ने ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025’ का शानदार समापन किया। 4 मई से 15 मई तक आयोजित इस महा आयोजन का समापन पटना के पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में रंगारंग समारोह के साथ हुआ। न केवल खिलाड़ियों की चमकदार उपलब्धियों ने सभी का ध्यान खींचा, बल्कि बिहार की आतिथ्य, संगठन और व्यवस्थापन क्षमता ने भी देशभर से प्रशंसा बटोरी।

बिहार का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

इस बार बिहार ने 620% की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ कुल 36 पदक हासिल किए—जिसमें 7 स्वर्ण, 11 रजत और 18 कांस्य शामिल हैं। 2023 में महज 5 पदकों से शुरुआत करने वाला बिहार, 2025 में 15वें स्थान तक पहुंच गया और इस प्रदर्शन में झारखंड को पछाड़ते हुए नई पहचान स्थापित की।

राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रविन्द्रण शंकरण के अनुसार, “यह सफलता योजनाबद्ध ढांचे, संसाधन उपलब्धता और युवाओं के संकल्प का सम्मिलित परिणाम है।”

गांवों की माटी से निकली स्वर्णिम कहानियां

इन पदकों के पीछे गांवों की वो कहानियां हैं, जहां संसाधनों की कमी के बावजूद बच्चों ने सपना देखा, संघर्ष किया और राष्ट्रीय मंच पर चमक बिखेरी। बिना आधुनिक सुविधाओं के भी, इन युवा खिलाड़ियों ने अपने हौसले और मेहनत से यह दिखा दिया कि सच्ची प्रतिभा किसी माहौल की मोहताज नहीं होती।

नीतीश कुमार की दूरदर्शिता का असर

खेलो इंडिया की यह सफलता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दीर्घकालिक नीति और प्रतिबद्धता का साकार रूप है।

  • खेल विभाग का गठन,
  • राज्य खेल प्राधिकरण की स्थापना,
  • जिलों और प्रमंडलों में खेल परिसरों का निर्माण,
  • और “मेडल लाओ, नौकरी पाओ” जैसी योजनाओं ने बिहार में खेलों के प्रति माहौल को पूरी तरह बदल दिया।

नीतीश कुमार की इसी सोच के तहत अब बिहार 2030 के राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। हर प्रमंडल में खेल गांव बनाए जाएंगे और शूटिंग, ट्रैक साइक्लिंग, जिम्नास्टिक जैसी स्पर्धाओं के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

उत्कृष्ट मेजबानी बनी बिहार की पहचान

देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से आए हजारों खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए बिहार ने भोजन, आवास, सुरक्षा और परिवहन की बेहतरीन व्यवस्था की। किसी बाहरी एजेंसी की मदद लिए बिना, अपने दम पर किए गए प्रबंधन की सराहना खिलाड़ियों और अधिकारियों ने खुले दिल से की।

समापन समारोह में बिहार की कला, संस्कृति और लोक परंपरा की भव्य झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री रक्षा निखिल खडसे, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, खेल मंत्री सुरेन्द्र मेहता समेत कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

खेल के मानचित्र पर बिहार की मजबूती

इस आयोजन और प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बिहार सिर्फ शिक्षा और इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि खेलों के क्षेत्र में भी एक प्रेरक शक्ति बनकर उभर रहा है। जिस राज्य को कभी ‘बीमारू’ कहा गया था, आज वह राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा है


 

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