
पटना। बिहार के ग्रामीण अंचलों में अब अपराधियों की खैर नहीं होगी। राज्य सरकार ने अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को एक नए डिजिटल युग में ले जाने का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को राजधानी पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के ‘संवाद’ कक्ष में नगर विकास एवं आवास, पंचायती राज तथा पर्यटन विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि अब राज्य की हर ग्राम पंचायत के सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख चौक-चौराहों पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जाएंगे। सुशासन के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि इस योजना को न केवल सुनिश्चित किया जाए, बल्कि इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता और तेजी का भी पूरा ध्यान रखा जाए। 28 अप्रैल 2026 की इस सुबह बिहार की पंचायतों के लिए एक नई सुरक्षा क्रांति की आहट लेकर आई है, जहां तकनीक अब पुलिसिंग का अभिन्न हिस्सा बनने जा रही है।
पंचायतों में सीसीटीवी: सुरक्षा का नया ‘सुरक्षा चक्र’
राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय ग्रामीण सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समीक्षा के दौरान जोर देकर कहा कि इन कैमरों के जरिए न केवल सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा, बल्कि अपराध पर अंकुश लगाने में भी प्रशासन को बड़ी मदद मिलेगी। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी-मोटी चोरी या संदिग्ध गतिविधियों की पहचान साक्ष्यों के अभाव में नहीं हो पाती है, लेकिन अब ‘तीसरी आंख’ का यह पहरा अपराधियों के मन में खौफ पैदा करेगा।
यह योजना केवल कैमरा लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे का उद्देश्य एक ऐसा निगरानी तंत्र विकसित करना है जो स्थानीय पुलिस थानों और नियंत्रण कक्षों से जुड़ा हो। प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर कैमरों की मौजूदगी से असामाजिक तत्वों की पहचान आसान होगी और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में पुलिस के पास ठोस सबूत मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस योजना के लिए तकनीकी खाका और बजट आवंटन को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है।
सोलर लाइट योजना: केवल अधिष्ठापन नहीं, कार्यक्षमता है प्राथमिकता
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना’ की वर्तमान स्थिति पर भी कड़ी नजर डाली। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिया कि जितने भी सोलर लाइट लगाए गए हैं या लगाए जा रहे हैं, वे हर हाल में पूरी तरह कार्यशील (Functional) रहने चाहिए। अक्सर यह शिकायत आती है कि लाइट लगने के कुछ समय बाद वे रख-रखाव के अभाव में बंद हो जाती हैं, जिससे योजना का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।
सम्राट चौधरी ने इसके समाधान के लिए एक आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का आदेश दिया है। इस सिस्टम के जरिए सचिवालय या जिला मुख्यालय से ही यह पता लगाया जा सकेगा कि किस पंचायत में कौन सी सोलर लाइट जल रही है और कहां खराबी है। यह डिजिटल निगरानी न केवल बिजली विभाग की जवाबदेही तय करेगी, बल्कि रात के समय ग्रामीण सड़कों पर उजाला सुनिश्चित कर महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को भी पुख्ता करेगी।
परंपरा का सम्मान: मोक्ष धाम के निर्माण पर विशेष निर्देश
धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने शवदाह गृहों और ‘मोक्ष धाम’ के निर्माण को लेकर एक बहुत ही संवेदनशील निर्देश जारी किया। उन्होंने कहा कि शवदाह गृहों का निर्माण उसी स्थान पर कराया जाए, जहां परंपरागत रूप से शवों का अंतिम संस्कार किया जाता रहा है।
अक्सर प्रशासनिक सुविधा या भूमि की उपलब्धता के आधार पर श्मशान घाटों का स्थान बदल दिया जाता है, जिससे स्थानीय लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचती है। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के साथ-साथ लोक परंपराओं और जन आस्था का सम्मान करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्थल चयन से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से फीडबैक लें ताकि किसी भी प्रकार का विवाद न हो।
शहरी विकास और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: पीपीपी मॉडल की राह
मुख्यमंत्री ने शहरी विकास की योजनाओं में सुस्ती बरतने वाले अधिकारियों को भी सचेत किया। उन्होंने निर्देश दिया कि शहरों के बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं को न केवल तेजी से पूरा किया जाए, बल्कि उनकी गुणवत्ता और पारदर्शिता का भी विशेष ख्याल रखा जाए। शहरों में बढ़ते कचरे और गंदगी की समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने पीपीपी (PPP – Public Private Partnership) मॉडल के उपयोग पर बल दिया।
सम्राट चौधरी का मानना है कि निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और सरकारी संसाधनों के समन्वय से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) को एक लाभकारी और स्वच्छ मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे न केवल कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण होगा, बल्कि शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में भी सुधार आएगा। उन्होंने नगर निकायों को कचरे से ऊर्जा या खाद बनाने वाली इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए निजी निवेश आकर्षित करने का निर्देश दिया।
बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारी
मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार ने हिस्सा लिया।
इसके अलावा सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, गृह विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, पटना प्रमंडल के आयुक्त अनिमेश परासर और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सोहैल सहित अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अपने-अपने विभागों की योजनाओं की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया और भविष्य के रोडमैप पर चर्चा की।


