नई दिल्ली। तथाकथित “एप्सटीन फाइल्स” से जुड़ी एक ई-मेल रिपोर्ट में प्रधानमंत्री के नाम और उनकी इज़राइल यात्रा का जिक्र किए जाने के बाद सोशल मीडिया और कुछ विदेशी पोर्टलों पर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। अब इस पूरे मामले पर भारत सरकार की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर दिया गया है।
सरकारी प्रवक्ता ने साफ कहा है कि इन रिपोर्टों में किए गए दावे पूरी तरह निराधार, भ्रामक और आपत्तिजनक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की इज़राइल यात्रा जुलाई 2017 में एक आधिकारिक और सार्वजनिक कूटनीतिक दौरा थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक कवरेज मिली थी।
“बाकी सब सिर्फ एक अपराधी की घटिया कल्पना”
प्रवक्ता ने बयान में कहा कि ई-मेल में किए गए अन्य सभी संकेत एक दोषी अपराधी की “घटिया और भ्रामक कल्पनाएं” हैं, जिनका किसी भी वास्तविक तथ्य से कोई संबंध नहीं है। ऐसे दावों को गंभीरता से लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह जानबूझकर फैलाया जा रहा दुष्प्रचार है, जिसका उद्देश्य देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था और प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है।
सरकार ने अफवाह फैलाने वालों को दी चेतावनी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस तरह की अफवाहें लोकतंत्र, संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कमजोर करने की कोशिश हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे झूठे दावों को पूरी तरह खारिज किया जाता है और इन्हें “पूर्ण उपेक्षा और तिरस्कार” के साथ नकारा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर फैल रही झूठी जानकारी पर नजर
सूत्रों ने बताया कि संबंधित एजेंसियां सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही भ्रामक जानकारियों पर नजर रख रही हैं। आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
सरकार का दो टूक संदेश
सरकार ने कहा है कि देश के प्रधानमंत्री और भारत की विदेश नीति पर इस तरह के मनगढ़ंत आरोपों से कोई असर नहीं पड़ेगा। सच्चाई यह है कि भारत की विदेश नीति पारदर्शी, लोकतांत्रिक और राष्ट्रहित पर आधारित है।


