मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान लगातार की जा रही घोषणाओं के बाद अब बिहार सरकार ने सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। इस संबंध में सरकार ने 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है, जिसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
दो अध्यक्षों वाली कमेटी
इस कमेटी में दो अध्यक्ष बनाए गए हैं।
- डॉ. रेखा झा, निदेशक प्रमुख (नर्सिंग एवं रोग नियंत्रण), स्वास्थ्य सेवाएं
- पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के अधीक्षक
कमेटी के अन्य सदस्य
कमेटी में चार अन्य सदस्यों को शामिल किया गया है—
- नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH), पटना के प्राचार्य
- बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. के.के. मणि
- बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के महासचिव डॉ. रोहित कुमार
- IGIMS नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष एवं प्राध्यापक डॉ. विभूति प्रसाद सिन्हा

निजी प्रैक्टिस पर रोक का उद्देश्य
सरकार का मानना है कि सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। यह कमेटी इस बात पर भी विचार करेगी कि निजी प्रैक्टिस बंद करने की स्थिति में डॉक्टरों को किस तरह की सुविधाएं या विशेष भत्ता दिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया फैसला
दरभंगा में समृद्धि यात्रा के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा,
“सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाएगी, ताकि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ हो सकें। जिला और प्रखंड स्तर के अस्पतालों को विशेष चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।”
क्यों लिया गया यह निर्णय
पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि सरकारी डॉक्टर निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में अधिक समय देते हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होती है। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह समिति गठित की है।
विशेष भत्ते की मांग
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की ओर से पहले भी यह मांग उठती रही है कि अगर निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाती है तो डॉक्टरों को इसके बदले विशेष भत्ता दिया जाए। कमेटी इसी पहलू पर भी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
सरकार के इस कदम को सात निश्चय पार्ट-3 के तहत “सुलभ, स्वस्थ और सुरक्षित जीवन” की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है।


