
भागलपुर। जिले में बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने और बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से गोराडीह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में “बेटी जन्मोत्सव–कन्या रत्न सम्मान समारोह” का आयोजन किया गया। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में नवजात कन्या शिशुओं और उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ बालिकाओं के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जागरूक किया गया।
महिला एवं बाल विकास निगम, भागलपुर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में नवजात बच्चियों की माताओं को बेबी किट और फलों की टोकरी भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन के दौरान परिवारों को यह संदेश दिया गया कि बेटी का जन्म केवल परिवार के लिए खुशी का अवसर नहीं, बल्कि समाज के विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। अधिकारियों ने कहा कि बालिकाओं को जन्म से ही बेहतर स्वास्थ्य, पौष्टिक आहार, शिक्षा और सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल नवजात बच्चियों के परिवारों को सम्मानित करना नहीं था, बल्कि उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनका लाभ दिलाना भी था। इस दौरान जन्म प्रमाण-पत्र, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, आयुष्मान भारत, नियमित टीकाकरण और पोषण से संबंधित योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
बेटियों के जन्म को उत्सव के रूप में मनाने का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोराडीह के प्रखंड विकास पदाधिकारी बिपिन कुमार ने कहा कि बेटियों का जन्म परिवार और समाज दोनों के लिए गर्व और खुशी का विषय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बेटी के जन्म के साथ ही उसके बेहतर भविष्य की नींव रखी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चियों को जन्म के बाद उचित स्वास्थ्य सुविधा, पोषण और समय पर टीकाकरण मिलना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही जैसे-जैसे बच्चियां बड़ी हों, उनकी शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर भी परिवार तथा समाज को विशेष ध्यान देना चाहिए।
बीडीओ ने कहा कि किसी बेटी का भविष्य केवल उसके परिवार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज और प्रशासन की भी जिम्मेदारी है कि प्रत्येक बालिका को आगे बढ़ने के लिए समान अवसर मिले। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य भी यही है कि पात्र परिवारों को समय पर सहायता मिले और कोई भी बच्ची जरूरी सुविधाओं से वंचित न रहे।
महिलाओं और परिवारों को सरकारी योजनाओं की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि कई ऐसी योजनाएं संचालित हैं, जिनका लाभ पात्र परिवार अपनी बच्चियों और माताओं के लिए ले सकते हैं। इसके लिए जरूरी दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में महिलाओं को जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया और इसके महत्व के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि जन्म प्रमाण-पत्र बच्चे की पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है और भविष्य में शिक्षा, सरकारी योजनाओं तथा अन्य जरूरी सेवाओं का लाभ लेने के दौरान इसकी आवश्यकता पड़ सकती है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना सहित अन्य योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। महिलाओं से कहा गया कि वे पात्रता के अनुसार योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित विभाग या कार्यालय में आवेदन करें।
20 पात्र महिलाओं के आवेदन कराए गए
“कन्या रत्न सम्मान समारोह” के दौरान केवल जागरूकता कार्यक्रम ही आयोजित नहीं किया गया, बल्कि मौके पर पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं में से 20 पात्र महिलाओं के प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना और आधार कार्ड से संबंधित आवेदन तत्काल भरवाए गए।
इन आवेदनों को संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों को उपलब्ध कराया गया, ताकि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। इसके अतिरिक्त दो नवजात शिशुओं के जन्म प्रमाण-पत्र के लिए भी आवेदन संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए।
अधिकारियों ने संबंधित कर्मियों को निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों के आवेदनों की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में अनावश्यक परेशानी न हो। इस पहल से कार्यक्रम में शामिल परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया को समझने में भी मदद मिली।
बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता पर जोर
कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी जागरूकता अभियान चलाया गया। जिला मिशन समन्वयक तबरेज़ खान ने महिलाओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह का बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। बाल विवाह के कारण कई लड़कियां अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं और उनके विकास के अवसर सीमित हो जाते हैं। उन्होंने महिलाओं और परिवारों से अपील की कि वे बाल विवाह जैसी सामाजिक समस्या के खिलाफ जागरूक रहें और बालिकाओं को शिक्षा प्राप्त करने का पूरा अवसर दें।
उन्होंने कहा कि बेटियों को केवल जन्म के समय सम्मानित करना पर्याप्त नहीं है। उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी है।
बेटियों के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित बनाने पर चर्चा
कार्यक्रम में वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ अभिषेक सुमन ने परिवारों को बेटियों के आर्थिक भविष्य को मजबूत बनाने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने नवजात बच्चियों के नाम से बैंक खाता खोलने और बचत की आदत विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने सुकन्या समृद्धि योजना समेत विभिन्न वित्तीय समावेशन योजनाओं की जानकारी देते हुए परिवारों से अपील की कि वे अपनी बेटियों के भविष्य के लिए अभी से आर्थिक योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र से ही नियमित बचत की आदत विकसित करने से भविष्य में बच्चियों की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने परिवारों को बैंकिंग सेवाओं से जुड़ने और उपलब्ध सरकारी बचत योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं को वित्तीय मामलों में जागरूक रहने और बेटियों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठाने की सलाह दी गई।
स्वास्थ्य और पोषण को लेकर भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में नवजात बच्चियों और माताओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मियों ने नियमित टीकाकरण, पोषण और बच्चों की देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
अधिकारियों ने कहा कि बच्चे के शुरुआती वर्षों में उचित पोषण और स्वास्थ्य देखभाल का विशेष महत्व होता है। परिवारों को सलाह दी गई कि वे बच्चों के टीकाकरण का पूरा ध्यान रखें और समय-समय पर स्वास्थ्य केंद्र से आवश्यक परामर्श लेते रहें।
कार्यक्रम के दौरान माताओं को यह भी समझाया गया कि बच्चियों के स्वास्थ्य और पोषण में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। बेहतर स्वास्थ्य और पोषण ही बच्चों के शारीरिक तथा मानसिक विकास का आधार बनता है।
महिला सशक्तिकरण और बालिका शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण और बालिका शिक्षा को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब वहां बेटियों और महिलाओं को समान अवसर मिलें।
बालिकाओं की शिक्षा को उनके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम बताते हुए परिवारों से अपील की गई कि वे बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से बेटियां अपने अधिकारों को समझने के साथ-साथ भविष्य में अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का उद्देश्य केवल बालिका जन्म को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि बेटियों के संपूर्ण विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना भी है।
कई विभागों के पदाधिकारी और कर्मी रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिला मिशन समन्वयक तबरेज़ खान, वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ अभिषेक सुमन, लेखा सहायक पवन शर्मा, बीएचएम रसीद मंजूर, आईसीडीएस की महिला पर्यवेक्षिकाएं अपर्णा भारती, कल्पना सिन्हा, नन्दनी और रजनी कुमारी सहित स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
सभी ने अपने-अपने स्तर से महिलाओं और परिवारों को योजनाओं की जानकारी दी तथा बालिकाओं के बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की।
कार्यक्रम के अंत में नवजात कन्या शिशुओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। उपस्थित लोगों ने बेटियों के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य को लेकर सामूहिक संकल्प लिया। साथ ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कुल मिलाकर, गोराडीह पीएचसी में आयोजित बेटी जन्मोत्सव–कन्या रत्न सम्मान समारोह ने बालिका जन्म को सम्मान देने के साथ-साथ परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में नवजात बच्चियों की माताओं का सम्मान किया गया, पात्र महिलाओं के आवेदन मौके पर भरवाए गए और जन्म प्रमाण-पत्र से जुड़े आवेदन भी आगे की प्रक्रिया के लिए सौंपे गए। इसके साथ ही बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता, बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और बेटियों के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने जैसे विषयों पर भी लोगों को जागरूक किया गया। प्रशासन का उद्देश्य है कि प्रत्येक पात्र परिवार तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे और हर बेटी को जन्म से लेकर शिक्षा और आत्मनिर्भरता तक आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।


