पटना, 08 अगस्त 2025: बिहार सरकार ने औद्योगिक विकास को नई रफ़्तार देने और युवाओं के लिए रोज़गार के दरवाज़े खोलने के उद्देश्य से ‘बिहार टेक्सटाइल एवं लेदर पॉलिसी’ को लागू किया है। इस महत्वाकांक्षी नीति के जरिए राज्य में निवेश को बढ़ावा, उत्पादन क्षमता में इजाफा और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है।
निवेशकों के लिए बड़े प्रोत्साहन
- पूंजीगत अनुदान: प्लांट एवं मशीनरी पर अधिकतम ₹30 करोड़ तक, 30% सहायता
- ब्याज में छूट: 10-12% या वास्तविक ब्याज दर पर रियायत
- एफसीआई सब्सिडी: 50% छूट या ₹20 करोड़ तक का अनुदान
- पेटेंट अनुदान: ₹10 लाख तक
- बिजली रियायत: प्रति यूनिट ₹2 की छूट
- टैक्स बेनिफिट: 100% एसजीएसटी प्रतिपूर्ति
- स्टाम्प ड्यूटी/पंजीकरण/भूमि परिवर्तन शुल्क: पूरी तरह माफ
- माल भाड़ा सब्सिडी: ₹10 लाख तक प्रतिवर्ष
रोजगार सृजन पर खास फोकस
- ईपीएफ और ईएसआई भुगतान पर 300% प्रतिपूर्ति
- प्रति कर्मचारी ₹5000/माह की सहायता
राज्य में बनेगा मज़बूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम
उद्योग विभाग का मानना है कि यह पॉलिसी न केवल टेक्सटाइल और लेदर सेक्टर में नए उद्योग खड़े करेगी, बल्कि सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और स्किल डेवलपमेंट में भी व्यापक प्रभाव डालेगी।
इससे बिहार में MSME से लेकर बड़े उद्योगों तक के लिए अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को अपने ही राज्य में बेहतर करियर के विकल्प मिलेंगे।
“हमारा लक्ष्य है कि बिहार को पूर्वी भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाए,” — उद्योग विभाग।


