
एससी-एसटी कल्याण विभाग की बड़ी पहल: 46 आवासीय विद्यालयों में 8 अप्रैल से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया, निशुल्क शिक्षा के साथ मिलेगी ‘नीट-जेईई’ की प्रीमियम कोचिंग
पटना। बिहार की बदलती शैक्षणिक तस्वीर में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के मेधावी छात्रों के लिए एक बार फिर उम्मीदों का द्वार खुल गया है। राज्य के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने अपने सबसे प्रतिष्ठित ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों’ में शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए कक्षा 11 में नामांकन की अधिसूचना जारी कर दी है। यह केवल एक सामान्य नामांकन प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बिहार के उन दूरदराज इलाकों में रहने वाले वंचित वर्ग के प्रतिभावान युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से वंचित रह जाते हैं।
मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को पटना स्थित विभागीय मुख्यालय से जारी निर्देशों के अनुसार, राज्य भर में संचालित कुल 46 डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में विज्ञान, कला और वाणिज्य संकायों में रिक्त सीटों को भरने की तैयारी पूरी कर ली गई है। आवेदन की प्रक्रिया बुधवार, 8 अप्रैल से शुरू होकर 27 अप्रैल 2026 तक चलेगी। इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि यहां छात्रों को न केवल विश्वस्तरीय आवासीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि उन्हें देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रवेश परीक्षाओं—जेईई (JEE) और नीट (NEET)—की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग भी प्रदान की जाएगी।
नामांकन का रोडमैप: महत्वपूर्ण तिथियां और चयन का आधार
विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन की पूरी प्रक्रिया को तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में 8 अप्रैल से 27 अप्रैल तक आवेदन पत्र स्वीकार किए जाएंगे। दूसरे चरण में प्राप्त आवेदनों की छंटनी और कक्षा 10 में प्राप्त अंकों के आधार पर मेधा सूची (Merit List) तैयार की जाएगी। अंतिम चरण में 15 मई से 25 मई 2026 के बीच चयनित छात्र-छात्राओं का संबंधित विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा।
चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 11 में नामांकन के लिए किसी भी प्रकार की अलग से लिखित परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाएगा। अभ्यर्थियों का चयन उनकी कक्षा 10 (मैट्रिक) की परीक्षा में प्राप्त अंकों के प्रतिशत के आधार पर किया जाएगा। यह उन छात्रों के लिए बड़ा प्रोत्साहन है जिन्होंने मैट्रिक की परीक्षा में कड़ी मेहनत की है। यदि कोई चयनित छात्र निर्धारित समय सीमा (15 से 25 मई) के भीतर उपस्थित नहीं होता है, तो उनकी जगह प्रतीक्षा सूची (Waiting List) में शामिल अगले मेधावी छात्र को मौका दिया जाएगा।
संकाय चयन की स्वतंत्रता: विज्ञान, वाणिज्य और कला का संगम
डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों की एक बड़ी विशेषता यह है कि यहां छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार करियर चुनने की पूरी आजादी दी जाती है। नामांकन के लिए तीन प्रमुख संकाय उपलब्ध कराए गए हैं:
- विज्ञान (Science): उन छात्रों के लिए जो इंजीनियरिंग, मेडिकल या शुद्ध विज्ञान के क्षेत्र में भविष्य बनाना चाहते हैं।
- वाणिज्य (Commerce): सीए, बैंकिंग, और व्यापार प्रबंधन में रुचि रखने वाले मेधावी युवाओं के लिए।
- कला (Arts): सिविल सेवा, कानून, और सामाजिक विज्ञान में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए।
विद्यालयों का आवंटन करते समय अभ्यर्थियों द्वारा दी गई प्राथमिकताओं और उनकी योग्यता को ध्यान में रखा जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि छात्रों को उनके गृह जिले या उनके द्वारा चुनी गई प्राथमिकताओं के आधार पर विद्यालय आवंटित किया जाए ताकि उन्हें पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
’सुपर 30′ की तर्ज पर तैयारी: जेईई और नीट के लिए विशेष कोचिंग
इस योजना का सबसे क्रांतिकारी पहलू इन विद्यालयों में मिलने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग है। विभाग ने महसूस किया है कि ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि के एससी-एसटी छात्र अक्सर प्रतिभा होने के बावजूद महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस नहीं भर पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए, इन 46 आवासीय विद्यालयों में ग्यारहवीं और बारहवीं की नियमित पढ़ाई के साथ-साथ विशेषज्ञों द्वारा नीट (NEET) और जेईई (JEE) की तैयारी कराई जाएगी।
छात्रों को न केवल डिजिटल क्लासरूम और आधुनिक लैब की सुविधा मिलेगी, बल्कि उन्हें अध्ययन सामग्री (Study Material) और टेस्ट सीरीज भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का विजन है कि इन विद्यालयों से निकले छात्र भविष्य में देश के प्रतिष्ठित आईआईटी और मेडिकल कॉलेजों में अपनी जगह बनाएं। यह सुविधा इन छात्रों को समाज की मुख्यधारा में लाने और उन्हें उच्च स्तरीय पेशेवर करियर प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
पूर्ण आवासीय सुविधा: भोजन से लेकर यूनिफॉर्म तक सब कुछ मुफ्त
डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय अपनी उच्च स्तरीय सुविधाओं के लिए जाने जाते हैं। चयनित होने वाले प्रत्येक छात्र को निम्नलिखित सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क प्रदान की जाती हैं:
- सुरक्षित आवास: आधुनिक सुविधाओं से लैस छात्रावास, जहां सुरक्षा और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
- पौष्टिक भोजन: छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए निर्धारित मीनू के अनुसार सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना दिया जाता है।
- शैक्षणिक सामग्री: किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी का पूरा खर्च विभाग उठाता है।
- यूनिफॉर्म और सहायक वस्तुएं: स्कूल यूनिफॉर्म, जूते और बेडशीट जैसी दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं भी सरकार द्वारा प्रदान की जाती हैं।
यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि छात्र के माता-पिता पर पढ़ाई का कोई आर्थिक बोझ न पड़े और छात्र पूरी तरह अपनी एकाग्रता केवल शिक्षा पर केंद्रित कर सके।
आवेदन कैसे करें? ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध
विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों की भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए आवेदन की प्रक्रिया को बहुत ही सरल बनाया है। इच्छुक अभ्यर्थी दो तरीकों से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं:
- ऑफलाइन माध्यम: छात्र अपने संबंधित जिले के ‘जिला कल्याण कार्यालय’ (District Welfare Office) में जाकर निर्धारित प्रपत्र (Form) प्राप्त कर सकते हैं और वहीं भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा कर सकते हैं।
- ऑनलाइन माध्यम: आधुनिकता के साथ कदम मिलाते हुए विभाग ने अपनी वेबसाइट (state.bihar.gov.in/scstwelfare) पर ऑनलाइन आवेदन का विकल्प भी दिया है। छात्र घर बैठे या नजदीकी साइबर कैफे से अपना फॉर्म भर सकते हैं।
आवेदन के लिए अनिवार्य दस्तावेज:
- कक्षा 10 (मैट्रिक) का मूल अंक पत्र या इंटरनेट कॉपी।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्गत जाति प्रमाण-पत्र (Caste Certificate)।
- आधार कार्ड की फोटोकॉपी।
- हाल ही में खिंचवाई गई पासपोर्ट साइज फोटो।
- बैंक खाते की जानकारी (यदि आवश्यक हो)।
सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा निवेश
बिहार में दलित और जनजातीय समाज के उत्थान के लिए शिक्षा को ही सबसे बड़ा हथियार माना गया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों की संकल्पना इसी विचारधारा पर आधारित है। 46 विद्यालयों का यह नेटवर्क पूरे बिहार में सामाजिक न्याय की एक सशक्त कड़ी बन चुका है। विभाग की इस अधिसूचना के बाद अब राज्य के ब्लॉक और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी मेधावी बच्चा सूचना के अभाव में आवेदन करने से न चूक जाए।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह शैक्षणिक सत्र 2026-28 इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार पाठ्यक्रम में कई आधुनिक बदलाव किए गए हैं और शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। विस्तृत जानकारी के लिए छात्र विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध प्रॉस्पेक्टस पढ़ सकते हैं या अपने जिले के कल्याण पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। कुल मिलाकर, बिहार सरकार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि शिक्षा के क्षेत्र में अवसर की समानता केवल एक वादा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है। अब गेंद बिहार के उन लाखों छात्रों के पाले में है जो अपनी मेहनत से अपना और अपने समाज का भविष्य बदलना चाहते हैं।


