
भागलपुर | 28 जुलाई 2025: बिहार के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध के स्पर संख्या 9 पर रविवार रात गंगा नदी के जलस्तर में कमी के बाद भीषण कटाव हुआ, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस घटनाक्रम ने जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
27 दिन में छह करोड़ का तटबंध का हिस्सा गंगा में समाया
हाल ही में एवरग्रीन कंपनी द्वारा इस स्पर पर 145 मीटर बोल्डर क्रेटिंग का काम कराया गया था, जिसकी लागत करीब छह करोड़ रुपये थी। यह कार्य 30 जून को पूरा हुआ, लेकिन मात्र 27 दिनों के भीतर गंगा की एक तीव्र धारा ने इस पूरे निर्माण को निगल लिया।
स्थानीय जनता ने पहले ही जताई थी आशंका
स्थानीय ग्रामीण अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि काम के दौरान ही उन्होंने अधिकारियों को चेताया था कि जहां पानी का बहाव तेज है, वहां डाउनस्ट्रीम में विशेष पिचिंग की आवश्यकता है, लेकिन उनकी बात अनसुनी रह गई। रविवार की रात वही हुआ, जिसका डर था — तटबंध का बड़ा हिस्सा कट गया।
फ्लड फाइटिंग शुरू, अधिकारियों की टीम मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही मुख्य अभियंता समेत कनीय अभियंता रविंद्र कुमार, सहायक अभियंता अमितेश कुमार और कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। एनसी बॉडी गिराकर कटाव को रोकने की कोशिश शुरू कर दी गई, हालांकि रात में काम कठिन था।
जिला परिषद सदस्य का आरोप: भ्रष्टाचार से बर्बादी
जिला परिषद सदस्य बिपिन मंडल ने कहा कि इस बांध पर पहले भी करोड़ों खर्च हो चुके हैं, फिर भी हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि
“वर्क ऑर्डर ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार से प्रभावित हैं। विभाग पर समय से काम पूरा करने का दबाव होता है, जिससे गुणवत्ता पर असर पड़ता है।”
उन्होंने बताया कि रात में जब वे मौके पर पहुंचे, तब तक 200 से 300 फीट तटबंध पूरी तरह कट चुका था।
विभाग की सफाई: अंडरमाइनिंग से हादसा
कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार ने स्पर संख्या 9 के ध्वस्त होने की पुष्टि की और कहा कि यह
“रविवार शाम 7:30 बजे के आसपास अंडरमाइनिंग के कारण गिरा। शाम छह बजे तक इसकी मॉनिटरिंग की गई थी।”
उन्होंने दावा किया कि
“50 मीटर के आसपास कटाव हुआ है, लेकिन यह तटबंध का अंतिम हिस्सा था, जिससे फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं दिख रहा। पानी कहलगांव की दिशा में बहता है।”


