गंगा कटाव रोकने के लिए बिहार सरकार सख्त, शाहपुर में 52 करोड़ की परियोजना एक माह में पूरी करने का निर्देश

भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड में गंगा नदी के बढ़ते कटाव से प्रभावित इलाकों को सुरक्षित बनाने के लिए बिहार सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। मानसून के आगमन से पहले नदी किनारे बसे गांवों को कटाव के खतरे से बचाने के उद्देश्य से चल रही कटाव निरोधी परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने गुरुवार को शाहपुर प्रखंड के जवनिया गांव पहुंचकर गंगा तट पर चल रहे कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया और अधिकारियों को अगले एक माह के भीतर सभी कार्य हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया।

गंगा नदी के किनारे बसे भोजपुर के कई गांव वर्षों से कटाव की समस्या का सामना करते रहे हैं। हर वर्ष बरसात और बाढ़ के दौरान नदी का रुख बदलने से खेती योग्य भूमि, घर, सड़कें और अन्य सार्वजनिक संपत्तियां प्रभावित होती हैं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई यह परियोजना स्थानीय लोगों के लिए राहत और सुरक्षा की उम्मीद लेकर आई है।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने परियोजना स्थल का जायजा लेते हुए निर्माण कार्यों की प्रगति, तकनीकी गुणवत्ता और बाढ़ पूर्व तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से अब तक हुए कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की और यह सुनिश्चित करने को कहा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय पूरी तरह लागू कर दिए जाएं।

इस दौरान डॉ. सिंह ने स्थानीय ग्रामीणों से भी सीधे संवाद किया। उन्होंने गांव के लोगों की समस्याओं, सुझावों और चिंताओं को सुना तथा यह जानने का प्रयास किया कि चल रहे कार्यों का वास्तविक प्रभाव क्षेत्र में किस प्रकार दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गंगा नदी के लगातार कटाव के कारण पिछले कई वर्षों से उन्हें गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कई बार उपजाऊ जमीन नदी में समा गई और लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया।

हालांकि ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वर्तमान में चल रहे कटाव निरोधी कार्यों से उन्हें काफी उम्मीदें हैं। लोगों ने बताया कि यदि परियोजना निर्धारित समय पर पूरी हो जाती है तो आने वाले वर्षों में कटाव से होने वाले नुकसान में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। स्थानीय निवासियों ने सरकार और विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर संतोष भी व्यक्त किया।

अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान सचिव को जानकारी दी कि गंगा नदी के दाहिने तट पर स्थित गंगापुर, भुसौला, नन्दपुर और दामोदरपुर (जवनिया) गांवों को कटाव से सुरक्षित रखने के लिए लगभग 1200 मीटर लंबाई में व्यापक कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है। यह परियोजना तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसका उद्देश्य केवल तट को मजबूत करना नहीं, बल्कि नदी के बहाव से उत्पन्न दीर्घकालिक जोखिमों को भी कम करना है।

परियोजना के लिए लगभग 52.56 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कार्य विभिन्न चरणों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की भी व्यवस्था की जा रही है।

समीक्षा बैठक के दौरान सचिव ने स्पष्ट कहा कि मानसून के दौरान गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है, इसलिए किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने अभियंताओं और निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिया कि कार्यों की गति बढ़ाई जाए और सभी निर्माण गतिविधियां तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर तकनीकी मानकों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे कार्य सीधे तौर पर हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़े होते हैं। यदि निर्माण की गुणवत्ता में कमी रह जाती है तो भविष्य में कटाव और बाढ़ की स्थिति में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

डॉ. सिंह ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि परियोजना स्थल पर आवश्यक निर्माण सामग्री, मशीनरी और मानव संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहें। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले सभी महत्वपूर्ण हिस्सों का काम पूरा होना चाहिए ताकि गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का प्रभाव आसपास के गांवों पर न पड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा नदी के किनारे स्थित क्षेत्रों में कटाव एक बड़ी चुनौती है। नदी की धारा में होने वाले प्राकृतिक बदलावों के कारण तटवर्ती क्षेत्रों पर लगातार दबाव बना रहता है। ऐसे में वैज्ञानिक पद्धति से किए गए कटाव निरोधी कार्य न केवल गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि कृषि भूमि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद शाहपुर प्रखंड के गंगापुर, भुसौला, नन्दपुर और जवनिया सहित आसपास के कई गांवों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल ग्रामीण आबादी सुरक्षित होगी बल्कि सड़क, बिजली, सरकारी भवन और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों का भी संरक्षण संभव हो सकेगा।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी परियोजना को क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि लंबे समय से गंगा कटाव यहां के लोगों के लिए चिंता का विषय रहा है। यदि वर्तमान परियोजना सफलतापूर्वक पूरी होती है तो हजारों परिवारों को राहत मिलेगी और भविष्य में होने वाले आर्थिक नुकसान को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा।

निरीक्षण के दौरान विभाग के वरीय अभियंता, कार्यपालक अभियंता, अन्य विभागीय अधिकारी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने परियोजना की प्रगति और आगामी रणनीति पर चर्चा की तथा समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने की प्रतिबद्धता जताई।

बिहार सरकार की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान को गंगा तटों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आगामी मानसून को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि कटाव प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं। यदि परियोजना निर्धारित अवधि के भीतर पूरी हो जाती है तो भोजपुर जिले के हजारों लोगों को गंगा कटाव के खतरे से बड़ी राहत मिल सकती है और क्षेत्र के विकास को भी नई मजबूती मिलेगी।

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