HIGHLIGHTS
- सनसनीखेज वारदात: सिमरी बख्तियारपुर के बलहमपुर गांव में नाबालिग ने अपने ही दोस्त पर दागी गोली।
- गंभीर जख्मी: 8वीं कक्षा का छात्र प्रिंस कुमार (14 वर्ष) लहूलुहान; सिर में लगी है गोली।
- इकलौता चिराग: माता-पिता का इकलौता बेटा है प्रिंस; गांव में मचा कोहराम।
- वजह अज्ञात: पुलिस जांच में जुटी, अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि दोस्त ने दोस्त को गोली क्यों मारी।
सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) | 15 मार्च, 2026
सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर में शनिवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने मानवीय रिश्तों और मासूमियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रायपुरा पंचायत के बलहमपुर गांव (वार्ड नंबर-3) में खेल-कूद की उम्र में एक किशोर ने अपने ही जिगरी दोस्त को मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया। महज 14 साल के प्रिंस कुमार को उसके दोस्त ने घर से बाहर बुलाया और फिर उसके सिर में गोली मार दी। इस वारदात के बाद से पूरे इलाके में दहशत और सन्नाटा पसरा हुआ है।
शनिवार की सुबह और फिर ‘धायं-धायं’
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 9:00 बजे प्रिंस अपने घर में ही था। तभी उसका एक नाबालिग दोस्त वहां पहुँचा और उसे किसी बहाने से बाहर बुलाया। प्रिंस को अंदाजा भी नहीं था कि जिस दोस्त के साथ वह स्कूल जाता और खेलता है, वही उसकी जान का दुश्मन बन जाएगा। बाहर निकलते ही आरोपी किशोर ने कट्टा निकाला और सीधे प्रिंस के सिर को निशाना बनाकर गोली चला दी। प्रिंस वहीं खून से लथपथ होकर गिर पड़ा और आरोपी फरार हो गया।
इकलौते बेटे की जिंदगी के लिए मची पुकार
घायल प्रिंस कुमार गांव के ही सिकंदर यादव का पुत्र है और 8वीं कक्षा में पढ़ता है। परिजनों के लिए यह वज्रपात जैसा है क्योंकि प्रिंस अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ वह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।
पुलिस का बयान: “हर एंगल से हो रही है जांच”
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची। SDPO मुकेश कुमार ठाकुर ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर एक नाबालिग के पास हथियार कहाँ से आया और इस गोलीबारी के पीछे की असली वजह क्या है। क्या यह किसी पुराने विवाद का नतीजा है या कोई और बात? पुलिस पीड़ित पक्ष के आवेदन का इंतजार कर रही है ताकि आगे की कानूनी कार्यवाही की जा सके।
VOB का नजरिया: किशोरों के हाथ में ‘कलम’ की जगह ‘कट्टा’ क्यों?
सहरसा की यह घटना समाज और अभिभावकों के लिए एक ‘अलार्म’ की तरह है। 14 साल के बच्चे के पास अवैध हथियार का होना और इतनी बेरहमी से अपने दोस्त को गोली मार देना यह दर्शाता है कि हमारे आसपास अपराध का जहर कितना गहरा उतर चुका है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में अवैध हथियारों की आसान पहुंच ने किशोरों के गुस्से को जानलेवा बना दिया है। सवाल यह है कि बच्चों के व्यवहार में आ रहे इस बदलाव को रोकने के लिए हम क्या कर रहे हैं? अगर ‘दोस्ती’ ही ‘दुश्मनी’ में बदलकर सिर में गोली मारने तक पहुँच जाए, तो समझ लीजिए कि नैतिक पतन की चरम सीमा पार हो चुकी है।


