
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले की जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। रविवार देर रात पिलर संख्या 133 के पास सड़क का एक बड़ा स्लैब अचानक टूटकर गंगा नदी में गिर गया, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हालांकि समय रहते ट्रैफिक रोक दिए जाने से एक बड़ी दुर्घटना टल गई, लेकिन अब इस घटना ने हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है।
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद यादव और उप विकास आयुक्त समेत कई अधिकारी रात में ही घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। सुरक्षा को देखते हुए तत्काल प्रभाव से पुल पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई।
प्रशासन का त्वरित फैसला: शुरू हुई फ्री नाव सेवा
पुल बंद होने के बाद लोगों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई थी। ऐसे में प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत गंगा नदी में नाव सेवा शुरू करने का निर्णय लिया। जिलाधिकारी ने समीक्षा भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकारी नावों की व्यवस्था की गई है, जिन पर यात्री पूरी तरह निशुल्क यात्रा कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि यह सेवा फिलहाल सुबह से शाम तक यानी सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही संचालित होगी। रात के समय नदी में नाव चलाना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए सुरक्षा कारणों से परिचालन को सीमित रखा गया है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नावों पर क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठने की अनुमति नहीं होगी। एक नाव में अधिकतम 50 यात्रियों को ही सवार किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहें।
घाटों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
नाव सेवा शुरू होने के साथ ही गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त कर दी गई है। एसएसपी प्रमोद यादव ने बताया कि सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस बल के साथ-साथ दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) की भी तैनाती की गई है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का पहला उद्देश्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए हर घाट पर निगरानी बढ़ा दी गई है और नाव संचालन को पूरी तरह नियंत्रित किया जा रहा है। पुलिस लगातार लोगों को जागरूक कर रही है कि वे भीड़ न लगाएं और लाइन में रहकर नाव का उपयोग करें।
एसएसपी ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की अफवाह से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
लोगों के लिए राहत और चुनौती दोनों
फ्री नाव सेवा शुरू होने से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह आसान नहीं है। हजारों लोग रोजाना भागलपुर और नवगछिया के बीच इस पुल से यात्रा करते थे। अब उन्हें नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है, जिससे समय भी ज्यादा लग रहा है और असुविधा भी हो रही है।
खासतौर पर ऑफिस जाने वाले, छात्र, व्यापारी और मरीजों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। हालांकि प्रशासन लगातार व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भीड़ के कारण लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रशासन की प्राथमिकता: सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि इस समय प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और सुचारू आवागमन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नाव सेवा अस्थायी व्यवस्था है, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार नावों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा अन्य वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि लोगों को अधिक परेशानी न हो।
घटना के बाद बढ़ी सतर्कता
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने की घटना ने प्रशासन को और अधिक सतर्क कर दिया है। पुल के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और किसी भी व्यक्ति को वहां जाने की अनुमति नहीं है। तकनीकी टीमों द्वारा लगातार स्थिति की जांच की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि बुनियादी ढांचे की समय-समय पर जांच और रखरखाव कितना जरूरी है। हालांकि इस बार प्रशासन की तत्परता ने बड़ी त्रासदी को टाल दिया, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी होगा।
जनता से अपील
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और सहयोग करें। नाव सेवा का उपयोग करते समय सुरक्षा नियमों का पालन करें, भीड़भाड़ से बचें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें।
फिलहाल भागलपुर में स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है कि लोगों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का विकल्प मिल सके। विक्रमशिला सेतु की मरम्मत में समय लग सकता है, लेकिन तब तक नाव सेवा ही लोगों के लिए जीवनरेखा बनी रहेगी।


