
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने उठाए गंभीर सवाल, कहा- हथियार डाल चुके व्यक्ति को गोली मारना कानूनन हत्या की श्रेणी में आ सकता है।
भोजपुर जिले के शाहपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अभयानंद ने बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उपलब्ध फुटेज को देखने के बाद प्रथम दृष्टया यह मामला पुलिस एनकाउंटर से ज्यादा हत्या जैसा प्रतीत होता है।
पूर्व डीजीपी ने कहा कि यदि जांच और अदालत की सुनवाई के दौरान यह साबित हो जाता है कि भरत भूषण तिवारी ने हथियार डाल दिया था और उसके बाद भी उन्हें गोली मारी गई, तो इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
“हथियार डालने के बाद गोली मारना एनकाउंटर नहीं”
अभयानंद ने कहा कि वीडियो फुटेज में भरत भूषण तिवारी निहत्थे दिखाई दे रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण कर दिया हो या हथियार छोड़ दिया हो, तो उसे गोली मारना किसी भी परिस्थिति में वैध पुलिस एनकाउंटर नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि अदालत में यदि यह तथ्य साबित हो गया तो गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला बन सकता है और पूरी पुलिस टीम कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकती है।
“पुलिस को कोर्ट में साबित करना होगा अपना दावा”
पुलिस के इस दावे पर कि भरत तिवारी ने दोबारा हथियार उठाकर पुलिस पर निशाना साधने की कोशिश की थी, पूर्व डीजीपी ने कहा कि यह पुलिस का बचाव पक्ष है और इसे अदालत में सबूतों के साथ साबित करना पुलिस की जिम्मेदारी होगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया वर्षों तक चल सकती है तथा अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।
एनकाउंटर संस्कृति पर भी उठाए सवाल
पूर्व डीजीपी अभयानंद ने हाल के वर्षों में बढ़ती एनकाउंटर संस्कृति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार जूनियर पुलिस अधिकारी बहादुरी के तमगे और प्रशंसा की उम्मीद में जल्दबाजी में ऐसे कदम उठा लेते हैं, लेकिन बाद में कानूनी कार्रवाई का पूरा बोझ उन्हीं को उठाना पड़ता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और पुलिसकर्मियों को हर कार्रवाई कानून की सीमाओं के भीतर रहकर करनी चाहिए।
“पुलिसिंग दिमाग से होती है, ताकत से नहीं”
अपने लंबे पुलिस अनुभव का जिक्र करते हुए अभयानंद ने कहा कि उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कई बड़े ऑपरेशन और एनकाउंटर लीड किए, लेकिन कभी अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोली नहीं चलाई।
उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का काम खुद गोली चलाना नहीं बल्कि पूरी टीम को सुरक्षित रखते हुए रणनीति बनाना होता है। पुलिसिंग का आधार कानून, संयम और बुद्धिमत्ता होनी चाहिए, न कि केवल बल प्रयोग।
भरत तिवारी एनकाउंटर पर बढ़ रहा दबाव
गौरतलब है कि 17 जून को भोजपुर के शाहपुर क्षेत्र में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर लगातार विवाद जारी है। मामले में पांच पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं और जांच की जिम्मेदारी शाहाबाद रेंज के डीआईजी को सौंपी गई है। वहीं न्यायिक जांच की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
पूर्व डीजीपी के इस बयान के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है तथा एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज होने की संभावना है।


