मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद सरकारी अस्पतालों की फायर सेफ्टी पर सवाल, मातृ-शिशु सदन की व्यवस्था जांच के घेरे में

मुजफ्फरपुर: प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड में सात लोगों की मौत और कई मरीजों के घायल होने के बाद जिले के सरकारी अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। खासकर सदर अस्पताल परिसर स्थित मातृ-शिशु सदन (एमसीएच) की फायर सेफ्टी व्यवस्था चर्चा का विषय बन गई है।

2020 में लगा था आधुनिक फायर सिस्टम

मातृ-शिशु सदन में वर्ष 2020 में आधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित किया गया था। अस्पताल परिसर में हाइड्रेंट, पाइपलाइन और अन्य अग्निशमन उपकरण लगाए गए थे ताकि किसी भी आपात स्थिति में आग पर तुरंत काबू पाया जा सके।

हालांकि चार वर्ष बाद भी इस व्यवस्था के पूरी तरह प्रभावी और नियमित रूप से संचालित होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

SNCU में पहले भी लग चुकी है आग

अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि वर्ष 2024 में स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की घटना हो चुकी है।

उस समय अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों की तत्परता से सभी नवजात शिशुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया था। लेकिन इस घटना ने अस्पतालों में विद्युत सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को उजागर कर दिया था।

अस्पताल प्रशासन ने दिया स्पष्टीकरण

सदर अस्पताल प्रशासन का दावा है कि एमसीएच में स्थापित फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह कार्यरत है और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि हाल की घटनाओं को देखते हुए अग्निशमन विभाग से दोबारा जांच कराई जाएगी और कर्मचारियों की तैयारी परखने के लिए मॉक ड्रिल भी आयोजित की जाएगी।

“एमसीएच अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम सही स्थिति में है। फिर भी सुरक्षा मानकों की समीक्षा के लिए अग्निशमन विभाग द्वारा दोबारा जांच कराई जाएगी। मॉक ड्रिल के दौरान यदि कोई तकनीकी कमी सामने आती है तो उसे तुरंत दूर किया जाएगा।”
— प्रवीण कुमार, प्रबंधक, सदर अस्पताल

मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्रसूताओं, नवजात शिशुओं और अन्य मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में केवल उपकरण लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित जांच, रखरखाव और कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद बढ़ी चिंता

गौरतलब है कि 4 जून 2026 को मुजफ्फरपुर के चर्चित Prasad Hospital के आईसीयू में कथित रूप से शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई थी।

इस हादसे में पहले पांच मरीजों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। बाद में इलाज के दौरान दो और मरीजों की मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई।

घटना के बाद अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया और मामले में अस्पताल से जुड़े लोगों पर कार्रवाई भी की गई। वहीं मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है।

पूरे राज्य में फायर सेफ्टी की होगी समीक्षा

मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद बिहार में अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक समीक्षा शुरू हो गई है। अग्निशमन विभाग ने निजी अस्पतालों को इलेक्ट्रिकल लोड एनालिसिस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश भी दिया है।

अब देखना होगा कि सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच के बाद क्या कमियां सामने आती हैं और उन्हें दूर करने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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