बिहार विधानसभा चुनाव के बाद महागठबंधन में घमासान, कांग्रेस ने राजद पर फोड़ा हार का ठीकरा

पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद बड़े मतों के अंतर से एनडीए को जीत मिली है। चुनाव नतीजों के बाद सभी राजनीतिक दलों ने हार-जीत की समीक्षा शुरू कर दी है। इसी क्रम में महागठबंधन के भीतर अब असंतोष के स्वर तेज होने लगे हैं। कांग्रेस पार्टी ने चुनावी हार की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर डालते हुए गठबंधन के भविष्य पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजद की भूमिका पर उठे सवाल

2025 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा। जहां राजद महज 25 सीटों पर सिमट गई, वहीं कांग्रेस पार्टी को सिर्फ 6 सीटों से संतोष करना पड़ा। नतीजों के बाद कांग्रेस नेताओं ने खुलकर राजद की रणनीति और भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

‘राजद के MY समीकरण ने नुकसान किया’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. शकील अहमद खान ने ईटीवी भारत से खास बातचीत में कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन की रणनीति कमजोर रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सबसे बड़े दल राजद की भूमिका संतोषजनक नहीं थी।

डॉ. शकील अहमद खान ने कहा,
“कांग्रेस पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलती है, लेकिन राजद के माय (मुस्लिम-यादव) समीकरण की वजह से हालात बिगड़ गए। राजद के साथ रहने से कांग्रेस को मुस्लिम और यादव वोट तो मिले, लेकिन अन्य वर्गों के मतदाता हमसे दूर हो गए।”

‘मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम प्रोजेक्ट करना गलत फैसला’

कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव के दौरान कई अपरिपक्व फैसले लिए गए। उन्होंने मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किए जाने पर भी आपत्ति जताई।

डॉ. शकील अहमद खान के अनुसार,
“हमारी सहमति के बिना मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम प्रोजेक्ट किया गया। यह राजनीतिक रूप से सही फैसला नहीं था। इससे महागठबंधन को नुकसान हुआ और अल्पसंख्यक समुदाय में भी नाराजगी देखी गई, क्योंकि उन्हें उचित भागीदारी नहीं मिली।”

कांग्रेस के ‘अलग राह’ पर चलने के संकेत

कांग्रेस नेता ने साफ कहा कि अब पार्टी को नई रणनीति अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राजद के साथ गठबंधन से कांग्रेस का जनाधार और सीटें लगातार घट रही हैं।

उन्होंने कहा,
“कांग्रेस अपने पुराने स्वरूप में लौटना चाहती है। इसके लिए जरूरी है कि जिन वर्गों और समुदायों का साथ पहले कांग्रेस को मिलता था, उनसे फिर से जुड़ा जाए। मौजूदा हालात में कांग्रेस को ‘एकला चलो’ की नीति अपनाकर संघर्ष के रास्ते पर चलना चाहिए। यह केवल मेरी व्यक्तिगत राय नहीं है, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व की सहमति भी इस सोच के साथ है।”

थर्ड फ्रंट पर मंथन

डॉ. शकील अहमद खान ने संकेत दिए कि वाम दलों के साथ गठबंधन कांग्रेस के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और वाम दलों की विचारधारा काफी हद तक समान है और थर्ड फ्रंट के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी माना कि चुनाव के दौरान सीट शेयरिंग में देरी का नुकसान महागठबंधन को उठाना पड़ा और राजद के साथ लंबे समय तक गठबंधन चल पाना मुश्किल है।


 

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