पिता चलाते हैं आटा चक्की, बेटी बनी साइंस टॉपर, जानें आदिवासी बहुल की छात्रा प्रिया की कहानी

बिहार के पश्चिम चंपारण जिला के आदिवासी बहुल इलाके की प्रिया जायसवाल बिहार में साइंस टॉपर बन प्रदेश का नाम रोशन की है.

कभी रेड कॉरिडोर के नाम से जाना जाता था इलाका : प्रिया के घर परिवार समेत इलाके में जश्न का माहौल है. उसके घर पर बधाइयों और शुभकामनाएं देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है. जिस इलाके को कभी रेड कॉरिडोर के नाम से जाना जाता था. जहां नक्सली अपने बंदूक से खूनी खेल खेला करते थे. उस इलाके की छात्रा ने कलम से अपने पूरे जिले का नाम रोशन किया है.

बिहार के पश्चिम चंपारण जिला के आदिवासी बहुल इलाके की प्रिया जायसवाल बिहार में साइंस टॉपर बन प्रदेश का नाम रोशन की है.

कभी रेड कॉरिडोर के नाम से जाना जाता था इलाका : प्रिया के घर परिवार समेत इलाके में जश्न का माहौल है. उसके घर पर बधाइयों और शुभकामनाएं देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है. जिस इलाके को कभी रेड कॉरिडोर के नाम से जाना जाता था. जहां नक्सली अपने बंदूक से खूनी खेल खेला करते थे. उस इलाके की छात्रा ने कलम से अपने पूरे जिले का नाम रोशन किया है.

बिहार के पश्चिम चंपारण जिला के आदिवासी बहुल इलाके की प्रिया जायसवाल बिहार में साइंस टॉपर बन प्रदेश का नाम रोशन की है.

कभी रेड कॉरिडोर के नाम से जाना जाता था इलाका : प्रिया के घर परिवार समेत इलाके में जश्न का माहौल है. उसके घर पर बधाइयों और शुभकामनाएं देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है. जिस इलाके को कभी रेड कॉरिडोर के नाम से जाना जाता था. जहां नक्सली अपने बंदूक से खूनी खेल खेला करते थे. उस इलाके की छात्रा ने कलम से अपने पूरे जिले का नाम रोशन किया है.

”मुझे काफी खुशी हो रही है. यह तो मुझे पता था कि अच्छे अंक मिलेंगे पर यह नहीं मालूम था कि पूरे राज्य में मेरे अव्वल नंबर रहेगा. मेरा सपना डॉक्टर बनने का है. मैं इसके लिए और ज्यादा मेहनत करूंगी.”– साइंस टॉपर प्रिया जायसवाल

7 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी : प्रिया के पिता संतोष जायसवाल ने बताया कि, ”मेरी बेटी पढ़ने में काफी तेज है. प्रतिदिन 7 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करती है. वह पूरे बिहार में साइंस टॉपर हुई है, इससे बड़ी खुशी हमारे लिए कुछ हो ही नहीं सकती.”

”मेरी बड़ी बेटी कोटा में पढ़ती है लेकिन प्रिया गांव में ही रहकर पढ़ाई करती है. हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि इसको भी कोटा भेज सकें. यह डॉक्टर बनना चाहती है. इस रिजल्ट को देखकर अब लगने लगा है कि यह अपने और हमारे सपने को पूरा करेगी.”– संतोष जायसवाल, साइंस टॉपर प्रिया जायसवाल के पिता

‘कभी बेटे और बेटी में फर्क नहीं किया’ : प्रिया की मां रीमा जायसवाल ने बताया कि, ”बेटी का सपना डॉक्टर बनने का है और वह जरूर पूरा करेगी. हमारी तीन बेटियां हैं, हमने कभी बेटे और बेटी में फर्क नहीं किया. वहीं प्रिया के दादी अरुणा देवी ने बताया कि, मेरी पोती ने हमारा ही नहीं पूरे बिहार का नाम रोशन किया है.

‘यह गर्व का क्षण’ : वहीं प्रिया के स्कूल के प्रधानाध्यापक प्रकाश नारायण ने बताया कि यह पढ़ने में काफी होनहार है. जब भी उसके घर की तरफ से गुजरता था तो इसे पढ़ता हुआ ही देखता था. अब ऐसे में जब यह टॉपर बनी है तो यह गर्व का क्षण है.

”बिहार में अब माहौल बदल गया है. इस हरनाटांड़ इलाके में सुबह से रात तक काफी ज्यादा संख्या में छात्राएं साइकिल से स्कूल या कोचिंग आते जाते दिख जाती है.”प्रकाश नारायण, प्रधानाध्यापक, राजकीयकृत राज्य संपोषित उच्च विद्यालय

मिलेंगे 2 लाख रुपये और लैपटॉप : प्रिया जायसवाल को अब सरकार पुरस्कृत भी करेगी. सरकार की ओर से उसे 2 लाख रुपये दिए जाएंगे. साथ ही एक लैपटॉप भी दिया जाएगा. पहले टॉपर को 1 लाख रुपये दिए जाते थे.

सांइस में 89.66% छात्र सफल : बता दें कि आज यानी मंगलवार को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने इटर का परीक्षा परिणाम घोषित किया. ऑर्ट्स, कॉमर्स और साइंस में कुल 86.05 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए. इसमें विज्ञान में 89.66% छात्र सफल हुए हैं. जिसमें प्रिया जायसवाल सबसे अधिक नंबर लाकर प्रदेश में टॉप की है.

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