
भागलपुर। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के सवर्ण बच्चों के लिए राज्य सरकार जल्द ही बड़ी पहल कर सकती है। राज्य सवर्ण आयोग के सदस्य ने संकेत दिए हैं कि इन बच्चों के लिए रहने, खाने, पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सुविधाओं को लेकर नया निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सरकार को अनुशंसा भेजी जा चुकी है और उस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
शुक्रवार को भागलपुर के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में राजकुमार सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग के विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संसाधनों की कमी कई प्रतिभाशाली छात्रों के लिए बड़ी बाधा बनती है। ऐसे में सरकार की यह पहल उनके लिए नई उम्मीद लेकर आ सकती है।
शिक्षा और सुविधाओं पर फोकस
राजकुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित योजना के तहत छात्रों को न केवल शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि उन्हें रहने और खाने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था भी की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण कोई भी प्रतिभा पीछे न रह जाए। यदि यह योजना लागू होती है, तो इससे हजारों छात्रों को सीधे लाभ मिल सकता है।
भागलपुर एयरपोर्ट पर भी बड़ी अपडेट
प्रेस वार्ता के दौरान राजकुमार सिंह ने भागलपुर के विकास से जुड़ा एक और अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि भागलपुर हवाई अड्डे से जल्द ही छोटे विमानों की उड़ान शुरू करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए हाल ही में एक टीम द्वारा स्थल निरीक्षण भी किया गया है।
हालांकि, एयरपोर्ट के आसपास हो रहे अवैध निर्माण के सवाल पर उन्होंने सीधे तौर पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्हें फिलहाल जानकारी नहीं है, लेकिन यदि पहले से कोई निर्देश जारी हुआ है तो जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की समीक्षा
राजकुमार सिंह ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की समीक्षा भी की। उन्होंने बताया कि भागलपुर जिले में अब तक कुल 6,393 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 5,445 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है।
इनमें 3,404 आवेदनों को स्वीकृति दी गई है, जबकि 2,041 आवेदन अस्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 947 आवेदन अभी लंबित हैं, जिन्हें जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने पर जोर दिया।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
राजकुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत काम कर रही है और इस दिशा में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचे और किसी भी स्तर पर अनियमितता न हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों के लिए नई उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ईडब्ल्यूएस के सवर्ण बच्चों के लिए प्रस्तावित सुविधाओं को लागू करती है, तो यह शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे न केवल छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को भी कम करने में मदद मिलेगी।
यह पहल खासतौर पर उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगी, जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई और करियर के सपनों को पूरा नहीं कर पाते। सरकारी सहायता मिलने से वे भी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
राज्य सवर्ण आयोग की इस अनुशंसा ने एक नई बहस को जन्म दिया है और अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि यह योजना जल्द लागू होती है, तो यह हजारों छात्रों के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।
वहीं, भागलपुर एयरपोर्ट और अन्य विकास योजनाओं को लेकर भी सरकार की सक्रियता यह दर्शाती है कि राज्य में बुनियादी ढांचे और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में सुधार की दिशा में प्रयास जारी हैं। आने वाले समय में इन पहलों का असर जमीनी स्तर पर देखने को मिल सकता है।


