95 की उम्र में भी मतदान का जज़्बा… ई-रिक्शा से वोट डालने निकले बुजुर्ग की 100 मीटर पहले ही मौत, अधूरी रह गई अंतिम इच्छा

रोहतास (सासाराम): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के मतदान के दौरान सासाराम विधानसभा क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। करसेरुआ पंचायत के खैरा गांव के 95 वर्षीय हरिहर सिंह उर्फ हरिद्वार सिंह लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होना चाहते थे, लेकिन मतदान केंद्र पहुँचने से कुछ क्षण पहले ही उनकी मृत्यु हो गई।

ई-रिक्शा से मतदान के लिए निकले थे बुजुर्ग, लेकिन रास्ते में ही चली गई जान

परिजनों के अनुसार, हरिहर सिंह लंबे समय से अस्वस्थ थे और बिस्तर पर रहते थे।
इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट कहा था—

“11 नवंबर को मैं वोट ज़रूर डालूंगा।”

परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें ई-रिक्शा पर सहारा देकर मतदान केंद्र की ओर रवाना किया।
लेकिन मतदान केंद्र से करीब 100 मीटर पहले ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, और उन्होंने वहीं अंतिम सांस ले ली।

“वोट डालने के बाद ही दुनिया से जाऊँगा…” — ग्रामीणों को याद आई अंतिम बात

ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही के दिनों में वे अक्सर कहते थे —

“मैं वोट डालने के बाद ही इस दुनिया को अलविदा कहूंगा।”

उनकी इस बात ने पूरे गांव को भावुक कर दिया है।
हरिहर सिंह के निधन की खबर फैलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

सेवानिवृत्त पंचायत सेवक थे हरिहर सिंह, लोकतंत्र के प्रति जीवनभर निष्ठा

हरिहर सिंह सेवानिवृत्त पंचायत सेवक थे और अपने जीवन के अंतिम दिनों में भी
लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था अटूट थी।
गांव के लोग उन्हें एक कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित व्यक्ति के रूप में जानते थे।

घटना के समय मतदान केंद्र पर उपस्थित अधिकारी, ग्रामीण और प्रशासनिक कर्मी सभी भावुक दिखे।

मतदान कर्मियों और अधिकारियों ने जताई संवेदना

चुनाव आयोग के स्थानीय अधिकारियों ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की है।
मतदान कर्मियों का कहना है—

“हरिहर सिंह जैसे मतदाता लोकतंत्र की असली ताकत हैं। उन्होंने जीवन के अंतिम क्षण तक मतदान का संकल्प नहीं छोड़ा।”

“लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी” के रूप में याद किए जा रहे हैं हरिहर सिंह

यह घटना सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे गांव और जिले को हिला गई है।
लोग अब उन्हें लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी कहकर याद कर रहे हैं—
एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसने दिखा दिया कि वोट देना सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है।

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