
पटना। देशभर के श्रमिकों के स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अब 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से किया। देश के 12 विभिन्न स्थानों पर एक साथ शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत बिहार में ESIC Medical College and Hospital Bihta में भी विशेष आयोजन किया गया।
बिहटा स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में बिहार सरकार के श्रम संसाधन विभाग के सचिव Deepak Anand मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं बिहार के श्रमायुक्त Rajesh Bharti विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमिक, चिकित्सक, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि श्रमिक किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं और उनका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। इसी सोच के तहत भारत सरकार ने श्रमिकों के लिए निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देने की दिशा में यह पहल शुरू की है।
अधिकारियों ने बताया कि नवंबर 2025 में अधिसूचित नई श्रम संहिताओं के तहत व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता यानी OSH Code 2020 की धारा 6(1)(C) के अनुसार अब प्रत्येक नियोक्ता के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वह 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों की वार्षिक स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करे।
सरकार का मानना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच से गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा और श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। खासकर उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान शुरुआती चरण में होने से समय पर इलाज संभव हो पाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद ने कहा कि बिहार सरकार श्रमिकों के कल्याण और नई श्रम संहिताओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि हर श्रमिक को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिले।
श्रमायुक्त राजेश भारती ने अपने संबोधन में OSH कोड के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत श्रमिकों को वार्षिक स्वास्थ्य जांच के लिए सवेतन अवकाश भी दिया जाएगा ताकि वे बिना किसी आर्थिक नुकसान के अपनी जांच करवा सकें।
कार्यक्रम में Vinay Vishwas ने अस्पताल की सुविधाओं और स्वास्थ्य जांच के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि समय पर स्वास्थ्य जांच किसी भी गंभीर बीमारी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि बीमारी का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो उसका इलाज आसान और कम खर्चीला हो जाता है।
ईएसआईसी बिहार के क्षेत्रीय निदेशक Niranjan Kumar ने नए लेबर कोड के प्रावधानों और श्रमिकों के अधिकारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वार्षिक स्वास्थ्य जांच केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि श्रमिकों के स्वास्थ्य अधिकार का हिस्सा है।
उन्होंने कार्यक्रम में ईएसआई योजना के अंतर्गत मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं की भी जानकारी दी। इनमें बीमारी के दौरान वेतन, कार्यस्थल पर दुर्घटना होने पर आजीवन पेंशन, मृत्यु की स्थिति में आश्रितों को 90 प्रतिशत तक पेंशन, 26 सप्ताह तक मातृत्व लाभ और बीमित व्यक्तियों के बच्चों के लिए मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
आंचलिक चिकित्सा आयुक्त Rachita Vishwas ने कहा कि पूर्व स्वास्थ्य जांच यानी प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप से श्रमिकों और उद्योगों दोनों को लंबे समय तक फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्वस्थ श्रमिक अधिक उत्पादक होते हैं और कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं की संभावना भी कम हो जाती है।
कार्यक्रम में DIMS शिशिर भारती ने भी ईएसआई योजना की उपयोगिता और श्रमिकों के लिए इसकी जरूरत पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कई श्रमिक स्वास्थ्य जांच को गंभीरता से नहीं लेते, जिसके कारण बाद में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह योजना श्रमिकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
सरकार का मानना है कि इस पहल से श्रमिक परिवारों पर अचानक आने वाले भारी चिकित्सा खर्च का बोझ भी कम होगा। समय पर बीमारी का पता चलने और ईएसआईसी के माध्यम से निःशुल्क इलाज उपलब्ध होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बड़ी संख्या में श्रमिक लंबे समय तक बिना स्वास्थ्य जांच के काम करते रहते हैं। ऐसे में उन्हें कई बीमारियों की जानकारी तब मिलती है जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। वार्षिक स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को धूल, रसायन, शारीरिक दबाव और अनियमित दिनचर्या जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रमिकों ने भी इस पहल का स्वागत किया। कई श्रमिकों ने कहा कि मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा उनके लिए काफी लाभदायक साबित होगी क्योंकि निजी अस्पतालों में जांच करवाना कई बार महंगा पड़ता है।
कार्यक्रम का समापन सभी अतिथियों, चिकित्सकों और उपस्थित श्रमिकों के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक श्रमिक इसका लाभ उठा सकें।


