फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाने वाले साइबर गिरोह का भंडाफोड़, भागलपुर पुलिस ने कैफे संचालक को दबोचा

भागलपुर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। अवैध वेबसाइटों और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करने वाले एक गिरोह का खुलासा हुआ है। इस कार्रवाई में पुलिस ने भारी मात्रा में नकली दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान बरामद किए हैं। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दूसरे आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर अपराध में संलिप्त अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार तकनीकी विश्लेषण और छापेमारी अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि भागलपुर जिले में एक कैफे सेंटर के माध्यम से अवैध वेबसाइटों का उपयोग कर फर्जी तरीके से आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, राशन कार्ड समेत कई सरकारी दस्तावेज बनाए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और मामले के सत्यापन के लिए विशेष टीम का गठन किया गया।

साइबर थाना भागलपुर के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी जांच और सूचना के आधार पर कजरैली थाना क्षेत्र के सिमरिया स्थित एक कैफे सेंटर पर छापेमारी की। पुलिस ने जब कैफे की जांच की तो वहां फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद हुए। मौके से कैफे संचालक प्रदीप साह को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपी सिमरिया का रहने वाला बताया गया है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने कैफे सेंटर से दो लैपटॉप, दो प्रिंटर, तीन फिंगर प्रिंट कैप्चर मशीन, एक थंब स्कैनर मशीन, एक मल्टीपर्पस स्कैनर मशीन, एक वेब कैमरा और एक मोबाइल फोन जब्त किया। इसके अलावा भारी संख्या में फर्जी दस्तावेज और उनकी फोटो कॉपी भी बरामद की गई। बरामद दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आवास प्रमाण पत्र और राशन कार्ड शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन दस्तावेजों का इस्तेमाल लोगों को ठगी का शिकार बनाने और सरकारी प्रक्रियाओं में अवैध लाभ उठाने के लिए किया जा रहा था।

बरामदगी की सूची बेहद चौंकाने वाली है। पुलिस ने मौके से तीन आधार कार्ड, आधार कार्ड की 68 फोटो कॉपी, पैन कार्ड की आठ कॉपी, जन्म प्रमाण पत्र की 12 कॉपी, जाति प्रमाण पत्र की चार कॉपी और आवास प्रमाण पत्र की चार कॉपी जब्त की हैं। इसके साथ ही कई अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी लंबे समय से इस अवैध धंधे में संलिप्त था। कैफे की आड़ में लोगों के लिए नकली दस्तावेज तैयार किए जाते थे और इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा अब तक कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा चुके हैं।

मामले में एक अन्य आरोपी मो. अरबाज की भी संलिप्तता सामने आई है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि गिरोह का नेटवर्क केवल भागलपुर तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि अन्य जिलों तक भी फैला हो सकता है। इसी वजह से पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

इस पूरे मामले को लेकर साइबर थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि किसी भी सरकारी दस्तावेज के लिए केवल अधिकृत केंद्रों और सरकारी पोर्टल का ही उपयोग करें। अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से दस्तावेज बनाने का दावा करता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।

भागलपुर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। हाल के वर्षों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक फ्रॉड, सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी और पहचान चोरी जैसे अपराध तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि आम लोगों के लिए भी जागरूक रहने का संदेश है।

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