नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद रवि किशन ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान केंद्र सरकार से झूठे मुकदमों पर सख्त कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि फर्जी मामलों के कारण निर्दोष लोग मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित होते हैं।
निर्दोषों की परेशानियों को उजागर किया
रवि किशन ने कहा, “झूठा केस करने वाला आराम से रहता है, वहीं जिसने कोई अपराध नहीं किया, उसे बेवजह जेल और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों से परिवार टूटते हैं, समाज में इज्जत चली जाती है और बहन-बेटियों की शादी तक प्रभावित होती है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि फर्जी मुकदमों को सही ठहराने वाले जांच अधिकारियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।
बीएनएस धारा 248 का जिक्र
सांसद ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 248 का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस धारा के तहत बरी हुए आरोपी को झूठा आरोप लगाने वाले के खिलाफ नया केस दर्ज करने का अधिकार है, और दोषियों को 5 से 10 साल की सजा हो सकती है। लेकिन नया मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया लंबी होने के कारण अक्सर लोग इसका उपयोग नहीं करते, जिससे झूठा केस करने वाले लाभान्वित होते हैं।
केंद्र सरकार से की मांग
रवि किशन ने कहा कि सरकार को ऐसे मुकदमों पर कठोर सजा का कानून बनाना चाहिए और जांच एजेंसियों को भी जवाबदेह ठहराने का प्रावधान जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई अपराध करता है तो उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन निर्दोषों के खिलाफ झूठा मुकदमा न हो।


