भागलपुर, बिहार विधानसभा चुनाव का रंग इस बार कुछ हटकर नजर आ रहा है। नामांकन जुलूस अब राजनीतिक रैली से ज्यादा शादी की बारात जैसे दिखाई दे रहे हैं। ढोल-नगाड़े, बैंड-बाजा, समर्थकों की भीड़ और नारों की गूंज के बीच प्रत्याशी घोड़े पर सवार होकर नामांकन दाखिल करने पहुंच रहे हैं।
आम तौर पर घोड़े की बुकिंग शादी-विवाह के मौसम में होती है, लेकिन अब चुनावी सीजन ने पशुपालकों की किस्मत भी बदल दी है। प्रत्याशी अपने प्रचार में घोड़े का इस्तेमाल शक्ति प्रदर्शन और लोकप्रियता दिखाने के प्रतीक के रूप में कर रहे हैं।
एक स्थानीय पशुपालक ने बताया — “पहले हमारा धंधा साल में छह महीने चलता था, अब चुनावी माहौल ने पूरा साल व्यस्त कर दिया है। हर दिन बुकिंग आ रही है, घोड़े अब राजनीति के मैदान में दौड़ रहे हैं।”
भागलपुर की सड़कों पर इन दिनों सिर्फ चुनावी नारों की आवाज़ नहीं, बल्कि घोड़ों की टापों की गूंज भी सुनाई दे रही है। लोकतंत्र के इस उत्सव में जहां प्रत्याशी जनता को रिझाने में लगे हैं, वहीं पशुपालक कह रहे हैं — “इस बार तो चुनाव ने हमारी रोज़ी-रोटी में भी नई जान डाल दी है।”


