
नई दिल्ली, 2 अगस्त 2025: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ लोन फर्जीवाड़े के एक बड़े मामले में लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया है। यह कदम बैंकों से प्राप्त ₹17,000 करोड़ से अधिक के ऋण के कथित दुरुपयोग की जांच के सिलसिले में उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने अनिल अंबानी को 5 अगस्त को दिल्ली स्थित अपने कार्यालय में पूछताछ के लिए पेश होने का नोटिस भेजा है।
क्या है मामला
यह मामला अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों द्वारा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों से लिए गए भारी-भरकम ऋण की कथित ग़लत तरीके से उपयोग और हेराफेरी से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि यह धनराशि उन उद्देश्यों के लिए नहीं इस्तेमाल की गई, जिनके लिए ऋण स्वीकृत किया गया था, बल्कि उसे अन्य व्यवसायिक कार्यों और निजी इस्तेमाल में लगाया गया।
ईडी के सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, बोर्ड मीटिंग दस्तावेज़ और विदेशी लेन-देन से जुड़े विवरण खंगाले हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि बड़ी मात्रा में धनराशि फर्जी कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर की गई।
लुकआउट सर्कुलर क्यों जरूरी
ईडी द्वारा लुकआउट सर्कुलर जारी करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनिल अंबानी देश से बाहर न जा सकें और जांच में पूरा सहयोग करें। एलओसी के तहत देश के सभी एयरपोर्ट और सीमाई प्रवेश/निकास बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
अनिल अंबानी का पक्ष
फिलहाल अनिल अंबानी या उनकी कंपनियों की ओर से इस मामले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उद्योग जगत में यह मामला एक बार फिर कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकों की कर्ज मंजूरी प्रक्रिया को लेकर चर्चाओं में आ गया है।
आगे की कार्रवाई
ईडी 5 अगस्त को होने वाली पूछताछ में अनिल अंबानी से कंपनियों के फंड ट्रांसफर, डायवर्जन ऑफ फंड्स, विदेशी निवेश, और कर्ज के भुगतान की स्थिति जैसे पहलुओं पर विस्तार से सवाल करेगी। यदि अनिल अंबानी संतोषजनक उत्तर नहीं देते हैं, तो उनकी संपत्तियों की कुर्की या आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
यह मामला भारत की वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता और बैंकों की जवाबदेही पर एक बार फिर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई के आने वाले दिनों में व्यापक राजनीतिक और आर्थिक असर पड़ सकते हैं।


