
कोलकाता। भारतीय रेलवे की पटरियों पर दौड़ती ट्रेनों की गूंज तो पूरी दुनिया सुनती है, लेकिन इन पटरियों के पीछे छिपी खेल प्रतिभाओं ने पिछले दो वर्षों में जो खामोश क्रांति की है, उसकी धमक अब खेल के गलियारों में साफ सुनाई दे रही है। पूर्व रेलवे के खिलाड़ियों ने अपनी पसीने और मेहनत की स्याही से संघर्ष और गौरव का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिखा है, जिसने खेल जगत के दिग्गजों को भी चकित कर दिया है। 11 मई 2026 को कोलकाता स्थित मुख्यालय से जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच का खेल सत्र पूर्व रेलवे के लिए ‘मेडल एक्सप्रेस’ की तरह साबित हुआ है। महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में पूर्व रेलवे खेल संघ ने अपनी रणनीति में जो आमूल-चूल परिवर्तन किए हैं, उसका परिणाम आज दर्जनों पदकों और चमचमाती ट्रॉफियों के रूप में सबके सामने है। यह सफर केवल जीत का नहीं, बल्कि रेलवे की कार्य-संस्कृति के साथ खेल के अनुशासन को जोड़ने का एक सफल प्रयोग रहा है।
2024-2025 सत्र: सफलताओं की ठोस नींव
पूर्व रेलवे के लिए पिछला साल यानी 2024-25 का सत्र एक नई शुरुआत का गवाह बना। इस दौरान खिलाड़ियों ने दिखाया कि वे न केवल रेलवे के संचालन में दक्ष हैं, बल्कि खेल के मैदान पर भी उनका कोई सानी नहीं है। इस सत्र में ‘क्रॉस-कंट्री’ जैसी कठिन दौड़ में महिला टीम ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति का परिचय दिया और अखिल भारतीय रेलवे चैंपियनशिप में चौथा स्थान हासिल किया। धूल भरे ट्रैक और लंबी दूरी की चुनौतियों के बावजूद महिला धावकों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने टीम को भविष्य के लिए एक नई दिशा दी।
क्रिकेट और फुटबॉल, जो भारत के सबसे लोकप्रिय खेलों में शुमार हैं, वहां भी पूर्व रेलवे के योद्धाओं ने अपनी पहचान छोड़ी। पुरुष क्रिकेट टीम ने 2024-25 के सत्र में शानदार खेल दिखाते हुए शीर्ष-4 में अपनी जगह पक्की की। मैदान पर बल्ले और गेंद का तालमेल इतना सटीक रहा कि विपक्षी टीमें उनकी रणनीतिक पकड़ के आगे बेबस नजर आईं। वहीं, फुटबॉल के मैदान पर निरंतरता का परिचय देते हुए पूर्व रेलवे की टीम ने लगातार दूसरे वर्ष क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। फुटबॉल में यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें तकनीक और गति के साथ-साथ टीम भावना की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
निशानेबाजी और वॉलीबॉल में चांदी की चमक
2024-2025 का साल पदकों के उत्सव के रूप में मनाया गया। शूटिंग रेंज के भीतर, जहां एक-एक मिलीमीटर का फासला जीत और हार तय करता है, वहां पूर्व रेलवे की शूटिंग टीम ने अपनी एकाग्रता का लोहा मनवाया और दूसरा स्थान हासिल किया। एकाग्रता के इसी अनुशासन को वॉलीबॉल कोर्ट पर भी देखा गया। पुरुष और महिला वॉलीबॉल टीमों ने शानदार समन्वय दिखाते हुए रजत पदक अपने नाम किए। वॉलीबॉल की इन टीमों ने अपनी ‘स्र्विस’ और ‘स्मैश’ के जरिए यह संदेश दिया कि वे रेलवे की पटरियों की तरह ही मजबूत और स्थिर हैं।
महिलाओं ने अन्य खेलों में भी अपनी धाक जमाई। मुक्केबाजी की रिंग हो या ब्रिज की टेबल, पूर्व रेलवे की महिला खिलाड़ियों ने हर जगह चांदी बटोरी। महिला मुक्केबाजी टीम ने अपनी साहसिक शैली से रजत पदक जीता, जबकि ब्रिज टीम ने अपनी रणनीतिक चालों से सबको प्रभावित करते हुए उपविजेता का खिताब अपने नाम किया। इसके अलावा, प्रतिभा की गहराई तब और स्पष्ट हुई जब महिला कबड्डी, पुरुष बास्केटबॉल और पुरुष टेबल टेनिस टीमों ने अखिल भारतीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त कर संगठन की झोली में पदक डाले।
2025-2026 सत्र: रजत से स्वर्ण तक का शानदार परिवर्तन
नया सत्र यानी 2025-2026 शुरू होते ही पूर्व रेलवे की खेल यात्रा ने गियर बदल दिया और रफ्तार और भी तेज हो गई। पिछले सत्र की कमियों को दूर करते हुए इस बार खिलाड़ियों ने पदकों का रंग बदलने का संकल्प लिया था। इसका सबसे शानदार उदाहरण ‘ब्रिज’ की टीम ने पेश किया। पिछले साल की रजत पदक विजेता टीम ने अपनी रणनीति और कौशल को इस हद तक निखारा कि उन्होंने इस बार स्वर्ण पदक जीतकर एआईआर (AIR) सर्किट की निर्विवाद चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। ब्रिज जैसे बौद्धिक खेल में पूर्व रेलवे का यह स्वर्ण पदक उनकी मानसिक मजबूती को दर्शाता है।
बास्केटबॉल के कोर्ट पर भी महिला खिलाड़ियों ने अपनी फुर्ती और निशाने का कमाल दिखाया। महिला बास्केटबॉल टीम ने पिछले रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करते हुए इस सत्र में दूसरा स्थान हासिल कर रजत पदक अपनी झोली में डाला। बॉक्सिंग की रिंग में महिला मुक्केबाजों ने एक बार फिर अपना दम दिखाया और कांस्य पदक के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही ‘क्यू स्पोर्ट्स’ (बिलियर्ड्स और स्नूकर) में भी पूर्व रेलवे के खिलाड़ियों ने अपनी ट्रॉफियों की संख्या बढ़ाई और कांस्य पदक जीता। जिम्नास्टिक्स, भारोत्तोलन और पावरलिफ्टिंग जैसे खेलों में भी पूर्व रेलवे के सितारे चौथे स्थान पर रहकर अपनी शक्ति और लचीलेपन का प्रदर्शन कर रहे हैं।
नेतृत्व और समर्पण: सफलता का मूल मंत्र
पूर्व रेलवे की इस खेल क्रांति के पीछे महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर की दूरदर्शी सोच का बड़ा हाथ रहा है। उन्होंने खेल को केवल एक अतिरिक्त गतिविधि न मानकर इसे रेलवे के गौरव से जोड़ा। मिलिंद देऊस्कर का मानना है कि रेलवे का संचालन और खेल का मैदान, दोनों ही अत्यधिक अनुशासन और टीम वर्क की मांग करते हैं।
”पूर्व रेलवे में हमारा मानना है कि खेल का अनुशासन एक विशाल रेलवे नेटवर्क के संचालन के लिए आवश्यक समर्पण को दर्शाता है। हमारे खिलाड़ी केवल कर्मचारी नहीं हैं; वे उत्कृष्टता के राजदूत हैं। हम उन्हें सर्वोत्तम सुविधाएँ और सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूर्व रेलवे का ध्वज सदैव ऊँचा लहराता रहे।”
मिलिंद देऊस्कर द्वारा अपनाए गए “कभी हार न मानने वाली” भावना ने खेल संघ के ढांचे को मजबूत किया है। अब रेलवे में कच्ची प्रतिभाओं को केवल भर्ती नहीं किया जाता, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं, प्रशिक्षण और पेशेवर अवसर प्रदान किए जाते हैं। यही कारण है कि आज पूर्व रेलवे का हर खिलाड़ी मैदान पर उतरते समय स्वयं को एक रेलकर्मी के साथ-साथ एक राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाला एथलीट मानता है।
खेल प्रदर्शन की तुलनात्मक सारणी (2024-2026)
खेल विधा | 2024-2025 सत्र का प्रदर्शन | 2025-2026 सत्र का प्रदर्शन |
|---|---|---|
ब्रिज | रजत पदक (दूसरा स्थान) | स्वर्ण पदक (प्रथम स्थान) |
महिला बास्केटबॉल | सहभागी | रजत पदक (दूसरा स्थान) |
शूटिंग | दूसरा स्थान (रजत) | निरंतरता जारी |
महिला मुक्केबाजी | रजत पदक | कांस्य पदक |
वॉलीबॉल (पुरुष/महिला) | रजत पदक | शीर्ष स्थान की ओर अग्रसर |
क्यू स्पोर्ट्स | शीर्ष 8 | कांस्य पदक |
महिला कबड्डी | तीसरा स्थान (कांस्य) | अभ्यास जारी |
क्रॉस कंट्री (महिला) | चौथा स्थान | प्रदर्शन में सुधार |
प्रेरणा का स्रोत: शिबराम माझि का दृष्टिकोण
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने इन खिलाड़ियों की उपलब्धियों को आम आदमी के लिए एक बड़ी मिसाल बताया है। उनका कहना है कि ये कहानियां यह साबित करती हैं कि जब जुनून और सही नेतृत्व का मिलन होता है, तो कोई भी लक्ष्य दुर्गम नहीं रहता। पटरियों पर ट्रेन दौड़ाने वाला एक लोको पायलट या स्टेशन पर कार्य करने वाला एक कर्मचारी जब मेडल जीतकर लौटता है, तो वह पूरे विभाग के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुँचा देता है। शिबराम माझि ने जोर देकर कहा कि पूर्व रेलवे अब परिवहन के साथ-साथ खेलों में भी देश का नेतृत्व करने की राह पर है।
ये खिलाड़ी दर्शाते हैं कि रेलवे की नौकरी और खेल के बीच का संतुलन बनाना असंभव नहीं है। ब्रिज टेबल की रणनीतिक चालें हों या वॉलीबॉल कोर्ट की ऊंची छलांगें, पूर्व रेलवे का हर कदम उत्कृष्टता की नई परिभाषा लिख रहा है। जिम्नास्टिक्स में चौथे स्थान के लिए आवश्यक तीव्र एकाग्रता हो या पावरलिफ्टिंग में प्रदर्शित अदम्य शारीरिक शक्ति, संगठन का हर एथलीट अपनी सीमाओं को आगे बढ़ा रहा है। पूर्व रेलवे का खेल संघ अब आने वाले वर्षों के लिए नए प्रशिक्षण शिविरों और अंतरराष्ट्रीय कोचों के साथ समन्वय की योजना बना रहा है, ताकि मेडल की यह चमक कभी फीकी न पड़े।


