सुलतानगंज में गंगा की लहरों ने छीनी दो घरों की खुशियां: अजगैबीनाथ धाम में डूबे दो युवक, सोमवार सुबह बरामद हुए शव

भागलपुर। आस्था और श्रद्धा के केंद्र सुलतानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। रविवार की शाम जिस नमामि गंगे घाट पर श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ गंगा स्नान कर रहे थे, वहीं दो परिवारों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए। नहाने के दौरान गहरे पानी में चले जाने से दो युवकों की डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद से ही पूरे इलाके में कोहराम मचा हुआ है। रविवार शाम से शुरू हुआ खोजबीन का सिलसिला सोमवार सुबह तब समाप्त हुआ, जब दोनों युवकों के निर्जीव शरीर पानी की सतह पर तैरते पाए गए। इस हादसे ने एक बार फिर नदियों के घाटों पर सुरक्षा और सावधानी के सवालों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भागलपुर के ताखीचक और कलबगंज क्षेत्र के रहने वाले ये दो दोस्त अपनी जिंदगी की नई पारी शुरू करने से पहले ही काल के गाल में समा गए।

रविवार शाम 4 बजे का वो मंजर: जब चीखों में बदलीं खुशियां

​हादसे की शुरुआत रविवार, 10 मई 2026 की शाम करीब 4:00 बजे हुई। भागलपुर शहर और आसपास के इलाकों से आए श्रद्धालु अजगैबीनाथ धाम के नमामि गंगे घाट पर स्नान कर रहे थे। इसी भीड़ में विकास कुमार साह और पीयूष कुमार वर्मा भी शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों युवक काफी उत्साह में थे और किनारे पर ही स्नान कर रहे थे। लेकिन गंगा की तेज धारा और पानी के नीचे की अनिश्चित गहराई का उन्हें अंदाजा नहीं लग पाया।

​बताया जा रहा है कि स्नान के दौरान एक युवक का पैर फिसला और वह गहरे पानी में चला गया। उसे बचाने के प्रयास में उसका दूसरा दोस्त भी संतुलन खो बैठा और देखते ही देखते दोनों ही मुख्य धारा की ओर खिंचते चले गए। घाट पर मौजूद अन्य लोगों ने जब तक शोर मचाया और बचाव के लिए हाथ बढ़ाया, तब तक दोनों युवक पानी के भीतर ओझल हो चुके थे। कुछ ही पलों में नमामि गंगे घाट का नजारा बदल गया। जो लोग भक्ति में डूबे थे, वे अब भय और आशंका से भर गए थे।

एसडीआरएफ और पुलिस का सर्च ऑपरेशन: रात के अंधेरे में थमी उम्मीदें

​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय सुलतानगंज थाना पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम तुरंत मौके पर पहुँची। स्थानीय गोताखोरों की मदद से तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। रविवार की शाम सूरज ढलने तक एसडीआरएफ के जवानों ने नावों और जाल के जरिए नदी के एक बड़े हिस्से को खंगाला। तट पर मौजूद सैकड़ों लोग सांसें थामकर किसी चमत्कार का इंतजार कर रहे थे।

​जैसे-जैसे शाम गहराती गई, बचाव कार्य में बाधाएं आने लगीं। गंगा की तेज धारा और पानी के मटमैलेपन के कारण गहराई में देख पाना मुश्किल हो रहा था। रात के करीब 8:00 बजे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद, सुरक्षा कारणों और दृश्यता (Visibility) शून्य होने के कारण अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। पुलिस प्रशासन ने घाट पर सुरक्षा बल तैनात कर दिया, लेकिन अंधेरे ने परिजनों की उम्मीदों को भी धुंधला कर दिया था। रविवार की पूरी रात विकास और पीयूष के परिजन घाट पर ही बैठे रहे, उनकी आँखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

सोमवार की सुबह: नाविक शंकर महलदार को मिली पहली सफलता

​सोमवार, 11 मई की अलसुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही एक बार फिर तलाशी अभियान शुरू करने की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच नगर परिषद सुलतानगंज के अनुभवी नाविक शंकर महलदार अपनी नाव लेकर घाट के आसपास खोजबीन कर रहे थे। सुबह करीब 5:30 बजे उन्हें पानी की सतह पर कुछ संदिग्ध नजर आया। जब वे पास पहुँचे, तो देखा कि दोनों युवकों के शव पानी में तैर रहे थे।

​शंकर महलदार ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और घाट पर मौजूद परिजनों को दी। नाविकों की मदद से दोनों शवों को किनारे लाया गया। जैसे ही शवों को बाहर निकाला गया, परिजनों की चीख-पुकार से सुलतानगंज का नमामि गंगे घाट दहल उठा। माँ-बाप अपने बेटों के बेजान शरीर से लिपटकर विलाप करने लगे। वहां मौजूद हर शख्स की आँख नम थी। स्थानीय लोगों ने नाविक शंकर महलदार के साहस की सराहना की, जिन्होंने एसडीआरएफ के दोबारा सक्रिय होने से पहले ही शवों को खोज निकाला।

मृतकों की पहचान: दो होनहार युवाओं का दुखद अंत

​पुलिस द्वारा की गई आधिकारिक पहचान के अनुसार, मृतकों में पहला युवक विकास कुमार साह (22 वर्ष) था। विकास ताखीचक, भागलपुर का रहने वाला था और रवि कुमार शाह का पुत्र था। वह अपने परिवार का एक होनहार सदस्य था और भविष्य को लेकर काफी सपने संजोए हुए था।

​दूसरा मृतक पीयूष कुमार वर्मा (21 वर्ष) था, जो कलबगंज क्षेत्र का निवासी था और विकास कुमार वर्मा का पुत्र था। पीयूष की उम्र मात्र 21 वर्ष थी। दोस्तों के अनुसार, दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और वे अक्सर साथ ही घूमा करते थे। रविवार का दिन उनके लिए मनोरंजन और आस्था का दिन होना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। दोनों के घरों में जैसे ही यह खबर पहुँची, पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया।

प्रशासनिक कार्रवाई और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया

​शवों के बरामद होने के बाद सुलतानगंज पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का पंचनामा तैयार किया और दोनों शवों को अपने कब्जे में ले लिया। प्रशासनिक प्रोटोकॉल के तहत, शवों को पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज) भेज दिया गया।

​पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के तकनीकी कारणों और समय का सटीक पता चल सकेगा। हालांकि, प्रथम दृष्टया यह मामला पूरी तरह से दुर्घटनावश डूबने का ही है। पुलिस ने परिजनों को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि प्राकृतिक आपदा के तहत मिलने वाली सरकारी सहायता राशि के लिए आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। मायागंज अस्पताल के बाहर भी सोमवार दोपहर तक मृतकों के रिश्तेदारों और मित्रों की भारी भीड़ जुटी रही।

घाटों पर सुरक्षा के सवाल और चेतावनी

​अजगैबीनाथ धाम का नमामि गंगे घाट सुलतानगंज का सबसे व्यस्त घाट माना जाता है। यहाँ सालों भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। हालांकि, गंगा का जलस्तर और नीचे की मिट्टी की बनावट अक्सर खतरनाक साबित होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट पर बैरिकेडिंग और स्पष्ट चेतावनी संकेतों की कमी के कारण अक्सर नए लोग अनजाने में गहरे पानी की ओर चले जाते हैं।

​प्रशासन समय-समय पर गोताखोरों की तैनाती करता है, लेकिन भारी भीड़ और विशाल तटरेखा के कारण हर व्यक्ति पर नजर रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इस हादसे के बाद, स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि नमामि गंगे घाट पर स्थायी रूप से ‘डेंजर जोन’ चिन्हित किए जाएं और लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार चेतावनी प्रसारित की जाए। विशेष रूप से युवाओं को नदी के बीच में जाकर स्टंट करने या गहराई नापने से रोकने के लिए कड़े नियम बनाने की आवश्यकता है।

शोक में डूबा भागलपुर: रविवार की छुट्टी बनी मातम की वजह

​भागलपुर जिले के ताखीचक और कलबगंज जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में विकास और पीयूष की मौत की खबर किसी सदमे से कम नहीं थी। उनके सहपाठियों और मोहल्ले के लोगों ने बताया कि दोनों युवक काफी मिलनसार थे। रविवार की छुट्टी के दिन दोनों ने सुलतानगंज जाने की योजना बनाई थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी।

​11 मई की दोपहर जब पोस्टमार्टम के बाद शवों को उनके पैतृक निवास लाया गया, तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए सैकड़ों लोग उमड़ पड़े। विकास और पीयूष की यह अकाल मृत्यु न केवल उनके परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर सबक है कि कुदरत की ताकतों के सामने मानवीय लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है। फिलहाल, पुलिस अपनी जांच पूरी कर रही है और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के घाटों पर अत्यधिक सावधानी बरतें।

​अजगैबीनाथ धाम में हुई यह हृदयविदारक घटना सुलतानगंज के इतिहास में एक और काला पन्ना जोड़ गई है। गंगा की लहरें अब भी उतनी ही शांत दिख रही हैं, लेकिन उन्होंने अपने भीतर जो दो जिंदगियां समेट लीं, उनका गम भागलपुर की गलियों में लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।

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