पूर्व रेलवे का बड़ा सुरक्षा अभियान, 807 रेलवे फाटक हुए इंटरलॉक्ड, 579 अंडरपास बनाकर यात्रियों की सुरक्षा को मिली नई मजबूती

पूर्व रेलवे अपने रेल नेटवर्क पर यात्रियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना का आधुनिकीकरण कर रहा है। रेलवे समपार फाटकों को आधुनिक तकनीक से लैस करने और सड़क तथा रेल यातायात को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत अब तक पूर्व रेलवे के अधिकांश मानवयुक्त रेलवे फाटकों को इंटरलॉक्ड प्रणाली से जोड़ा जा चुका है, जबकि बड़ी संख्या में रोड अंडर ब्रिज और सीमित ऊंचाई वाले सबवे का भी निर्माण पूरा किया गया है। रेलवे का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम करना और आवागमन को अधिक सुगम बनाना है।

पूर्व रेलवे के अनुसार रेल यात्रियों, सड़क उपयोगकर्ताओं और रेलवे ट्रैक पार करने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूरे जोन में आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था, इंटरलॉक्ड समपार फाटक और अंडरपास निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य तेज गति से किए जा रहे हैं। इस अभियान के पीछे रेलवे का उद्देश्य मानवीय त्रुटियों की संभावना को कम करना और तकनीक आधारित सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करना है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि प्रतिदिन लाखों लोग पूर्व रेलवे के विभिन्न मार्गों से यात्रा करते हैं। इसके अलावा हजारों वाहन और पैदल यात्री भी रेलवे समपार फाटकों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में रेलवे के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि प्रत्येक फाटक पर सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि रेल और सड़क दोनों का संचालन सुरक्षित तरीके से हो सके।

इसी दिशा में पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में सियालदह, हावड़ा, आसनसोल और मालदा मंडलों में रेलवे फाटकों के आधुनिकीकरण का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत पुराने गैर-इंटरलॉक्ड फाटकों को आधुनिक इंटरलॉक्ड प्रणाली में बदला जा रहा है, जिससे ट्रेन संचालन और सड़क यातायात दोनों की सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।

रेलवे ने बताया कि पारंपरिक गैर-इंटरलॉक्ड समपार फाटकों पर सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से स्टेशन कर्मियों और फाटक कर्मचारियों के बीच टेलीफोन के माध्यम से होने वाले मैनुअल समन्वय पर आधारित होती है। इस व्यवस्था में कर्मचारी पूरी सावधानी से अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया मानवीय संचार पर निर्भर होने के कारण कभी-कभी विलंब या त्रुटि की आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि रेलवे अब आधुनिक तकनीक का उपयोग कर इन फाटकों को इंटरलॉक्ड प्रणाली से जोड़ रहा है।

इंटरलॉक्ड समपार फाटक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सीधे रेलवे की इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग प्रणाली से जुड़ा रहता है। जब तक फाटक पूरी तरह बंद होकर सुरक्षित रूप से लॉक नहीं हो जाता, तब तक संबंधित रेल मार्ग पर ट्रेन को आगे बढ़ने के लिए हरा सिग्नल नहीं मिलता। यदि फाटक पूरी तरह बंद नहीं है या उसमें किसी प्रकार की तकनीकी समस्या है, तो सिग्नल स्वतः लाल बना रहता है। इससे ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलती और संभावित दुर्घटना की आशंका काफी हद तक समाप्त हो जाती है। रेलवे का मानना है कि यह तकनीक रेल सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई है।

रेलवे केवल फाटकों के आधुनिकीकरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सड़क और रेल यातायात को अलग-अलग सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने पर भी काम कर रहा है। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर रोड अंडर ब्रिज और सीमित ऊंचाई वाले सबवे का निर्माण किया जा रहा है। इन संरचनाओं के माध्यम से वाहन, एंबुलेंस, दोपहिया चालक और पैदल यात्री रेलवे ट्रैक के नीचे से सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं। इससे फाटक बंद होने पर लंबा इंतजार करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और ट्रैक पार करने से जुड़े जोखिम भी कम हो जाते हैं।

पूर्व रेलवे की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सियालदह मंडल में कुल 379 मानवयुक्त रेलवे समपार फाटक हैं। इनमें से 368 फाटकों को इंटरलॉक्ड प्रणाली से जोड़ा जा चुका है, जबकि केवल 11 फाटक अभी गैर-इंटरलॉक्ड श्रेणी में हैं।

हावड़ा मंडल में कुल 301 मानवयुक्त रेलवे फाटक हैं। इनमें 267 फाटक इंटरलॉक्ड हो चुके हैं और 34 फाटकों का आधुनिकीकरण अभी बाकी है।

आसनसोल मंडल में कुल 127 मानवयुक्त रेलवे समपार फाटकों में से 93 फाटक इंटरलॉक्ड किए जा चुके हैं, जबकि 34 फाटक अभी भी पुराने सिस्टम पर संचालित हो रहे हैं।

मालदा मंडल में कुल 99 मानवयुक्त रेलवे समपार फाटक हैं। इनमें से 79 फाटकों पर इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 20 फाटक अभी इस प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।

चारों मंडलों के संयुक्त आंकड़ों के अनुसार पूर्व रेलवे में कुल 906 मानवयुक्त रेलवे समपार फाटक मौजूद हैं। इनमें से 807 फाटकों को पूरी तरह इंटरलॉक्ड प्रणाली से जोड़ दिया गया है। अब पूरे जोन में केवल 99 गैर-इंटरलॉक्ड फाटक शेष हैं, जिन पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

अंडरपास निर्माण के क्षेत्र में भी पूर्व रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। सियालदह मंडल में अब तक 119 रोड अंडर ब्रिज और सीमित ऊंचाई वाले सबवे बनाए जा चुके हैं। हावड़ा मंडल में 244, आसनसोल मंडल में 104 और मालदा मंडल में 112 अंडरपास तैयार किए गए हैं। इस प्रकार पूरे पूर्व रेलवे क्षेत्र में अब तक कुल 579 रोड अंडर ब्रिज और सीमित ऊंचाई वाले सबवे का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से सड़क और रेल यातायात दोनों अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हुए हैं। जहां पहले फाटक बंद होने के कारण लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब कई स्थानों पर अंडरपास के माध्यम से निर्बाध आवागमन संभव हो गया है। इससे समय की बचत के साथ-साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी कम हुई है।

पूर्व रेलवे ने स्पष्ट किया है कि जिन 99 गैर-इंटरलॉक्ड फाटकों का आधुनिकीकरण अभी बाकी है, उन पर भी तेजी से कार्य जारी है। लक्ष्य यह है कि पूरे नेटवर्क को आधुनिक सुरक्षा प्रणाली से जोड़कर रेल संचालन को और अधिक सुरक्षित बनाया जाए। रेलवे का मानना है कि तकनीक आधारित यह बदलाव भविष्य में दुर्घटनाओं की रोकथाम और बेहतर यात्री सुविधा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

यात्री सुरक्षा को लेकर पूर्व रेलवे लगातार जागरूकता अभियान भी चला रहा है। रेलवे लोगों से अपील कर रहा है कि वे रेलवे ट्रैक पार करने के लिए केवल अधिकृत स्थानों का ही उपयोग करें और बंद फाटक या चेतावनी संकेतों की अनदेखी न करें। रेलवे का कहना है कि आधुनिक तकनीक और नागरिकों के सहयोग से ही पूरी तरह सुरक्षित रेल यात्रा का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि यात्री सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पूरे नेटवर्क में सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है और आने वाले समय में भी आधुनिक तकनीक के माध्यम से रेल यात्रियों तथा आम नागरिकों को अधिक सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कार्य जारी रहेगा।

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