
पटना: बिहार सरकार द्वारा जारी डीएसपी स्तर के अधिकारियों की तबादला सूची के बाद एक फैसला चर्चा का विषय बन गया है। भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में नामजद तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को मद्यनिषेध विभाग में नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस निर्णय के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
53 डीएसपी का तबादला, एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में
बुधवार को जारी स्थानांतरण सूची में कुल 53 डीएसपी रैंक के अधिकारियों का तबादला किया गया। इनमें राजेश कुमार शर्मा का नाम सबसे अधिक सुर्खियों में रहा, क्योंकि उनके खिलाफ भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है और मामले की जांच अभी जारी है।
पुलिस मुख्यालय से मद्यनिषेध विभाग में मिली नई जिम्मेदारी
भरत तिवारी मामले में नाम सामने आने के बाद राजेश कुमार शर्मा को पहले पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। अब सरकार ने उन्हें मद्यनिषेध विभाग में नई पोस्टिंग दे दी है।
इस फैसले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि गंभीर आरोपों की जांच लंबित रहने के बावजूद किसी अधिकारी को नई जिम्मेदारी देना कितना उचित है।
क्या कहते हैं सेवा नियम?
सेवा नियमों के जानकारों के अनुसार, किसी अधिकारी के खिलाफ केवल एफआईआर दर्ज होने से उसकी सेवा स्वतः समाप्त नहीं होती। यदि अधिकारी निलंबित नहीं है, तो सरकार सेवा नियमों के तहत उसका तबादला या किसी अन्य विभाग में पदस्थापन कर सकती है।
कई मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भी अधिकारियों को दूसरे विभाग में भेजा जाता है।
नैतिक और प्रशासनिक सवाल भी उठे
हालांकि, इस तबादले को लेकर नैतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि हत्या जैसे गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने से पहले नई जिम्मेदारी देना शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
उनका मानना है कि ऐसे मामलों में जांच पूरी होने तक विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं राजेश कुमार शर्मा
राजेश कुमार शर्मा का नाम इससे पहले भी कई विवादित मामलों में सामने आ चुका है। मुजफ्फरपुर के चर्चित एनकाउंटर प्रकरण से लेकर भोजपुर के भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले तक कई घटनाओं में उनका नाम चर्चा में रहा है।
जांच जारी, सरकार की ओर से नहीं आया बयान
फिलहाल भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले की जांच जारी है। वहीं, सरकार की ओर से राजेश कुमार शर्मा की नई तैनाती को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
इस बीच उनका तबादला प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का भी प्रमुख विषय बना हुआ है।


