बिहार में मानसून की बेरुखी से सूखे का खतरा, 52% कम बारिश; धान की रोपनी प्रभावित, सरकार अलर्ट

पटना: बिहार में इस बार मानसून की सुस्ती किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गई है। राज्य में अब तक सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके कारण धान की रोपनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। हालात ऐसे हैं कि अब तक केवल करीब 4 प्रतिशत धान की रोपनी हो सकी है।

मौसम विभाग के अनुसार, इस अवधि तक बिहार में औसतन 207.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 98.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।

सूखे के खतरे पर सरकार की नजर

बारिश की कमी को देखते हुए बिहार सरकार सतर्क हो गई है।

आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने कहा,

“हमारी नजर सूखे की स्थिति पर है। सभी जिलों से लगातार रिपोर्ट मंगाई जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी।”

अल नीनो का असर बता रही सरकार

जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कम बारिश के लिए अल नीनो को जिम्मेदार बताया।

उन्होंने कहा,

“जितनी बारिश अब तक होनी चाहिए थी, उतनी नहीं हुई है। सरकार हर स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है। सिंचाई के लिए नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी आवश्यक निर्देश दिए हैं।”

20 जिलों में धान की रोपनी शुरू तक नहीं

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर खेती पर पड़ा है।

  • करीब 20 जिलों में धान की रोपनी शुरू भी नहीं हो सकी है।
  • कई जिलों में बिचड़ा तक नहीं डाला गया है।
  • राज्य में कुल मिलाकर केवल 4% धान की रोपनी हो पाई है।

इन जिलों में सबसे कम बारिश

मौसम विभाग के अनुसार कई जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है—

  • गया – 81% कम
  • पटना – 80% कम
  • भोजपुर – 72% कम
  • भागलपुर – 71% कम

राज्य के 27 जिलों में 50 से 81 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि शेष 11 जिलों में लगभग 20 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।

किसान चिंतित

समस्तीपुर के किसान गौरीशंकर ने कहा,

“इस बार धान की रोपनी शुरू नहीं हो पाई है क्योंकि खेत पूरी तरह सूखे हैं। बारिश नहीं होने से खेतों में दरार पड़ गई है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा।”

वैकल्पिक फसलों की तैयारी

कृषि विभाग ने संभावित संकट को देखते हुए वैकल्पिक खेती की तैयारी शुरू कर दी है।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि किसानों को मक्का, अरहर, राई सहित अन्य वैकल्पिक फसलों के मुफ्त बीज उपलब्ध कराने की योजना पर काम हो रहा है। साथ ही धान की सीधी बुवाई को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने कहा,

“हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होगा और किसानों को राहत मिलेगी।”

सरकार का कहना है कि कृषि, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन विभाग मिलकर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर किसानों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

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