
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने रविवार को का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा अधोसंरचना और भविष्य की विकास योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि राज्य सरकार एम्स पटना के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है।
मुख्यमंत्री के दौरे का सबसे बड़ा ऐलान एम्स पटना के विस्तार के लिए 24 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने को लेकर रहा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगी ताकि संस्थान की क्षमता को और बढ़ाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार अतिरिक्त भूमि मिलने के बाद अस्पताल में लगभग 200 नए बेड जोड़े जा सकेंगे। इससे मरीजों के इलाज की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और बढ़ते रोगी भार को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा।
बिहार सहित पूर्वी भारत के कई राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए एम्स पटना पहुंचते हैं। ऐसे में बेड की सीमित उपलब्धता और मरीजों की बढ़ती संख्या लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त बेड और विस्तारित चिकित्सा सुविधाएं गंभीर रोगियों के लिए बड़ी राहत साबित होंगी। इससे मरीजों को इलाज के लिए लंबी प्रतीक्षा का सामना कम करना पड़ेगा।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने एम्स पटना से नाथूपुर तक प्रस्तावित 4 लेन सड़क परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और इसे जल्द पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क केवल संस्थान की पहुंच आसान नहीं करेगा बल्कि मरीजों, उनके परिजनों और आपातकालीन सेवाओं के लिए आवागमन को भी अधिक सुगम बनाएगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच में बेहतर सड़क नेटवर्क की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। खासकर आपातकालीन स्थितियों में हर मिनट अहम होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना में समन्वय और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग सुनिश्चित करेगी ताकि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा हो सके।
मुख्यमंत्री के दौरे का एक और महत्वपूर्ण पहलू बर्न मरीजों के उपचार से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज के लिए एम्स पटना में स्किन स्टोरेज यानी त्वचा भंडारण की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस दिशा में राज्य सरकार पूर्ण सहयोग करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार बर्न मरीजों के उपचार में स्किन बैंक या स्किन स्टोरेज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इससे गंभीर मरीजों का समय पर उपचार संभव हो पाता है।
मुख्यमंत्री ने बर्न वार्ड का भी दौरा किया और वहां भर्ती मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने इलाज की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की सेवाओं को लेकर भी जानकारी जुटाई। मुख्यमंत्री ने मरीजों का मनोबल बढ़ाते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
एम्स पटना के आधुनिक चिकित्सा विभागों का निरीक्षण भी मुख्यमंत्री के दौरे का अहम हिस्सा रहा। उन्होंने न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग का दौरा किया जहां पेट-सीटी रूम, स्पेक्ट-सीटी रूम और रेडियो फार्मेसी लैब की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इन विभागों का उपयोग कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार में किया जाता है। आधुनिक उपकरणों से लैस ये सुविधाएं मरीजों को उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने ऑन्कोलॉजी डिवीजन, एनाटॉमी विभाग और ओपीडी ब्लॉक का भी निरीक्षण किया। उन्होंने डॉक्टरों और अधिकारियों से संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं, रोगी प्रबंधन और भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा की। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा सेवाओं को और प्रभावी बनाने को लेकर कई सुझाव भी दिए गए।
एम्स परिसर में स्थित तालाब भी मुख्यमंत्री के निरीक्षण का हिस्सा रहा। उन्होंने तालाब की वर्तमान स्थिति का अवलोकन किया और इसके जीर्णोद्धार के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तालाब को केवल संरक्षित ही नहीं किया जाना चाहिए बल्कि इसे एक आकर्षक सार्वजनिक स्थल और पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। उनके अनुसार इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और परिसर का सौंदर्य भी बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर वातावरण भी उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। हरियाली, जल संरक्षण और शांत वातावरण मरीजों और उनके परिजनों के मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होते हैं। इस दृष्टि से तालाब का पुनर्विकास एक सकारात्मक पहल साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में दोहराया कि बिहार सरकार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता तक पहुंचाने के लिए लगातार निवेश और संस्थागत विकास किया जा रहा है। एम्स पटना जैसे संस्थानों का विकास इस रणनीति का अहम हिस्सा है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के साथ मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता और सेवा गुणवत्ता पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के लोगों को गंभीर उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर कम निर्भर रहना पड़े।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रधान सचिव दीपक कुमार, सचिव लोकेश कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, विशेष सचिव अरविंद कुमार चौधरी, बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन और एम्स पटना के निदेशक डॉ. राजू अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।
मुख्यमंत्री के इस दौरे को बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 24 एकड़ अतिरिक्त भूमि, 200 नए बेड, स्किन स्टोरेज सुविधा और बेहतर सड़क संपर्क जैसी घोषणाएं आने वाले समय में एम्स पटना की सेवाओं को नई ऊंचाई दे सकती हैं। इससे न केवल पटना बल्कि पूरे बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।


