भागलपुर, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की इस वर्ष की तीसरी बैठक सोमवार को समीक्षा भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी, भागलपुर ने की।
बैठक में अधिनियम के प्रावधानों के त्वरित, संवेदनशील एवं अक्षरशः अनुपालन को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। जिला पदाधिकारी ने संबंधित विभागों और पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि अधिनियम का उद्देश्य पीड़ितों को त्वरित न्याय और राहत प्रदान करना है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
224 पीड़ितों को मुआवजा, 187 मामले दर्ज
बैठक में जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत 224 पीड़ितों एवं उनके आश्रितों को मुआवजा राशि से लाभान्वित किया जा चुका है। वहीं, इस वर्ष अब तक जिले में कुल 187 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें सभी मामलों में जिला पदाधिकारी की स्वीकृति के उपरांत अधिनियम की धाराओं के अनुरूप अनुमान्य मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया गया है।
46 आश्रितों को मिल रही नियमित पेंशन
अधिनियम के तहत 46 आश्रितों को अनुमान्य पेंशन राशि का प्रतिमाह ससमय भुगतान किया जा रहा है, जिससे पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल मिल रहा है।
न्यायिक प्रक्रिया में भी प्रगति
नवंबर माह में दोनों पुलिस जिलों के अंतर्गत SC/ST अधिनियम से जुड़े चार मामलों में माननीय न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय सुनाया गया, जिसमें तीन अभियुक्तों को सजा दिलाई गई।
दुरुपयोग पर सख्त चेतावनी
जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अधिनियम का दुरुपयोग किसी भी स्तर पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी जांच पदाधिकारी पूरी संवेदनशीलता के साथ मामलों की जांच सुनिश्चित करें। विशेष रूप से भूमि विवाद से संबंधित मामलों में पुलिस पदाधिकारी जांच के उपरांत ही नियमसंगत अग्रेतर कार्रवाई करें।
319 लंबित मामलों में शीघ्र आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि माननीय न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित करने हेतु लंबित कुल 319 मामलों में पुलिस पदाधिकारी त्वरित एवं संवेदनशील होकर अनुसंधान पूर्ण करें और समयबद्ध रूप से आरोप पत्र दाखिल करना सुनिश्चित करें।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को न्याय, सुरक्षा और सम्मान प्रदान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, और इस दिशा में सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।


