
- लोकसभा में अतारांकित प्रश्न संख्या 5358 के माध्यम से भागलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और संचार सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण का मुद्दा गूंजा।
- जनवरी 2026 तक भागलपुर जिले के सभी 1,520 गांवों को 4जी मोबाइल ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के दायरे में लाया जा चुका है।
- भारतनेट परियोजना के तहत फरवरी 2026 तक जिले की 234 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया गया है।
- डाक विभाग ने जिले के सभी डाकघरों को एडवांस्ड पोस्टल टेक्नोलॉजी (एपीटी) और आईटी 2.0 प्रोजेक्ट से जोड़कर डिजिटल बैंकिंग का हब बना दिया है।
- 5जी सेवाओं का विस्तार तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर किया जाएगा, जबकि डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) से ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क को और मजबूत किया जा रहा है।
भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।
संसद के पटल पर उभरी भागलपुर की डिजिटल प्रगति की मुकम्मल तस्वीर
देश की संसद में भागलपुर के ग्रामीण अंचलों की संचार व्यवस्था और डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर एक महत्वपूर्ण विमर्श हुआ है। भागलपुर सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने जिले के तकनीकी विकास का जो ब्यौरा पेश किया है, वह ग्रामीण डिजिटल समावेशन की दिशा में एक बड़ी छलांग की तस्दीक करता है। लोकसभा में 25 मार्च 2026 को दिए गए इस उत्तर में संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि भागलपुर के सुदूरवर्ती इलाकों में अब इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक सशक्त अधिकार बन चुका है। यह सवाल केवल तकनीकी बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें ग्रामीण युवाओं की शिक्षा, किसानों की सूचना तक पहुंच और आम आदमी की डिजिटल बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी आकांक्षाएं भी शामिल थीं। जिले के विकास की यह नई पटकथा अब धरातल पर मोबाइल टावरों और ऑप्टिकल फाइबर के जाल के रूप में दिखाई दे रही है।
भागलपुर के सभी 1,520 गांवों में 4जी नेटवर्क का ऐतिहासिक आच्छादन
डिजिटल इंडिया के विजन को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में भागलपुर ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक जिले के सभी 1,520 गांवों को 4जी मोबाइल ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से कवर कर लिया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भागलपुर की भौगोलिक स्थिति में कई ऐसे इलाके शामिल हैं, जहां पहले नेटवर्क का सिग्नल पहुंचना एक बड़ी चुनौती माना जाता था। महापंजीयक के आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक गांव की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना यह दर्शाता है कि अब शिक्षा, स्वास्थ्य और ई-गवर्नेंस की सेवाएं जिले के अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी तकनीकी बाधा के पहुंच सकती हैं। 4जी के इस व्यापक विस्तार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दी है, जहां छोटे उद्यमी और छात्र अब सीधे वैश्विक बाजार और सूचना तंत्र से जुड़ गए हैं।
भारतनेट के माध्यम से ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड क्रांति का नया अध्याय
सिर्फ मोबाइल नेटवर्क ही नहीं, बल्कि फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड के मोर्चे पर भी भागलपुर तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतनेट परियोजना, जो देश भर के गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने का सबसे बड़ा अभियान है, उसके तहत भागलपुर में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। फरवरी 2026 तक की रिपोर्ट बताती है कि जिले की कुल 234 ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड सेवा प्रदान करने के लिए तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वित की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के साथ-साथ मांग के आधार पर गांवों के सार्वजनिक संस्थानों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ना है। ग्राम पंचायतों के डिजिटल होने से अब जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज गांव के स्तर पर ही ऑनलाइन प्राप्त किए जा सकेंगे, जिससे ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।
डाकघरों का अत्याधुनिक स्वरूप और आईटी 2.0 प्रोजेक्ट का सफल क्रियान्वयन
भागलपुर जिले में संचार व्यवस्था का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ यानी डाक विभाग भी अब पूरी तरह से डिजिटल अवतार में नजर आ रहा है। डाक विभाग ने क्षेत्र के सभी डाकघरों को एडवांस्ड पोस्टल टेक्नोलॉजी (एपीटी) प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया है। यह बदलाव आईटी 2.0 प्रोजेक्ट के तहत किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य एंड-टू-एंड कंप्यूटराइजेशन और निर्बाध नेटवर्क कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है। अब डाकघर केवल चिट्ठी-पत्री का केंद्र नहीं रहे, बल्कि वे आधुनिक बैंकिंग और डिजिटल सेवा केंद्रों में तब्दील हो चुके हैं। इस तकनीकी सुदृढ़ीकरण से डाक सेवाओं की पारदर्शिता और गति में व्यापक सुधार हुआ है, जिससे आम उपभोक्ताओं का भरोसा एक बार फिर से इस पारंपरिक संस्था पर मजबूत हुआ है।
कोर बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं से सशक्त हुए ग्रामीण उपभोक्ता
आधुनिकीकरण की इस लहर में डाकघरों में बैंकिंग सेवाओं को भी पूरी तरह अपडेट किया गया है। भागलपुर के सभी पोस्ट ऑफिस में कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) लागू कर दिया गया है, जिससे ग्राहकों को ‘कहीं भी बैंकिंग’ की सुविधा उपलब्ध हो रही है। इसके अलावा, नेट बैंकिंग, ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम), इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी), ई-मनी ऑर्डर और ट्रैक एंड ट्रेस जैसी उन्नत डिजिटल सेवाएं अब आम लोगों की पहुंच में हैं। मोबाइल-बेस्ड सर्विस के माध्यम से बैंकिंग कार्यों को और भी सरल बना दिया गया है। यह कदम न केवल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ (डीबीटी) को सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंचाने में भी एक सुरक्षित और भरोसेमंद माध्यम बन गया है।
शाखा डाकघरों का डिजिटलीकरण और ग्रामीण उद्यम अनुप्रयोगों का प्रभाव
ग्रामीण इलाकों में डाक सेवाओं की गुणवत्ता को शहरी स्तर पर लाने के लिए सरकार ने भागलपुर जिले के सभी ब्रांच पोस्ट ऑफिस (बीओ) को आधुनिक डिजिटल रूरल एंटरप्राइज एप्लीकेशन वाले मोबाइल डिवाइस से लैस किया है। इन हैंडहेल्ड डिवाइसेज की मदद से ग्रामीण डाक सेवक अब गांव में लोगों के दरवाजे पर जाकर बैंकिंग और अन्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इस डिजिटल पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच का दायरा बढ़ा है और बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए घर बैठे वित्तीय सेवाएं प्राप्त करना सुगम हुआ है। यह तकनीक ग्रामीण डाकघरों की कार्यक्षमता को बढ़ाकर उन्हें एक मिनी बैंक के रूप में स्थापित कर रही है, जो ग्रामीण जीवन को सरल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
5जी सेवाओं का भविष्य और डिजिटल भारत निधि के माध्यम से नेटवर्क विस्तार
आगामी भविष्य की चुनौतियों और 5जी सेवाओं की संभावनाओं पर भी संसद में विस्तृत जानकारी दी गई। संचार राज्य मंत्री के अनुसार, दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी) तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर ग्रामीण इलाकों में 5जी सेवाओं के विस्तार की योजना बना रहे हैं। यद्यपि 5जी का विस्तार बाजार की मांग पर निर्भर करता है, लेकिन सरकार सेवा-वंचित ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार अब डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) से प्राप्त होने वाले वित्तपोषण का उपयोग करके दूर-दराज के गांवों में 4जी कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण स्कीमें चला रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भागलपुर का कोई भी कोना संचार क्रांति से अछूता न रहे और भविष्य की हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया जा सके।
अजय कुमार मंडल की पहल और भागलपुर के डिजिटल समावेशन का बढ़ता दायरा
सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा लोकसभा में उठाए गए इस प्रश्न ने भागलपुर की जमीनी समस्याओं और विकास की जरूरतों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रखा है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह पहल भागलपुर संसदीय क्षेत्र के डिजिटल बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। जिस तरह से जिले के सभी 1,520 गांवों को 4जी के दायरे में लाया गया है और डाकघरों को डिजिटल हब बनाया गया है, उससे यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में संचार सुविधाओं का विस्तार तीव्र गति से हो रहा है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से भागलपुर अब डिजिटल समावेशन के मानचित्र पर एक अग्रणी जिले के रूप में उभर रहा है। यह न केवल वर्तमान कनेक्टिविटी की स्थिति को सुधार रहा है, बल्कि आने वाले समय में 5जी और उससे आगे की तकनीक के लिए भी उपजाऊ जमीन तैयार कर रहा है।


