
पटना, 10 अप्रैल 2026 — बिहार में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के कृषि मंत्री ने पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में डिजिटल कृषि निदेशालय का उद्घाटन किया। इसके साथ ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में आधुनिक कृषि सुविधाओं का भी शुभारंभ किया गया, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
उद्घाटन समारोह के दौरान मंत्री ने कहा कि डिजिटल कृषि निदेशालय की स्थापना से बिहार में डेटा आधारित खेती को बढ़ावा मिलेगा, जो भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि अब किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ रियल टाइम में उपलब्ध कराया जा सकेगा और फसलों के उत्पादन, उत्पादकता तथा मौसम के आधार पर सटीक पूर्वानुमान लगाना आसान होगा।
इस पहल के तहत राज्य के 12 प्रमुख बीज गुणन प्रक्षेत्रों—भभुआ, धनरुआ, नवादा खिरियावी, सिपाया, पिपराकोठी, पूसा, हलसी, सिकंदरा, ओडेहारा, कुमारखंड और बुआलदह—में मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर किसानों को 25 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। इसका लाभ न केवल इन प्रक्षेत्रों तक सीमित रहेगा, बल्कि आसपास के गांवों के किसानों को भी मिलेगा।
इसके अलावा राज्य के 25 जिलों के 32 अनुमंडलों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं शुरू की गई हैं। इन लैब्स के माध्यम से किसानों को उनकी मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी, जिससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा और भूमि की उर्वरता बनी रहेगी। यह पहल रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मंत्री ने बताया कि डिजिटल कृषि निदेशालय के जरिए किसानों को डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड, ड्रोन आधारित पौधा संरक्षण तकनीक और डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही हर फसल मौसम में फसल कटनी प्रयोगों के जरिए आंकड़े एकत्र किए जाएंगे, जिससे कृषि नीति और योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री जैसे कार्यों के माध्यम से एक मजबूत और एकीकृत कृषि डेटा सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इससे सरकार को किसानों की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करने और योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार की यह पहल कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी समावेश और दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है, तो बिहार न केवल कृषि उत्पादन में बल्कि तकनीक आधारित खेती में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
कुल मिलाकर, डिजिटल कृषि निदेशालय की शुरुआत और इससे जुड़ी नई सुविधाएं किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन क्षमता सुधारने और कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी।


