
फाइलों के अंबार और परिसर की गंदगी देख भड़के प्रदीप सिंह; उद्यान विभाग के कर्मचारियों को कारण-पृच्छा के निर्देश, मिट्टी और बीज प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली पर जताया संतोष
भागलपुर। सरकारी दफ्तरों में समय की पाबंदी और फाइलों के सुव्यवस्थित रख-रखाव को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, लेकिन जब जिले का कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी खुद ‘फाइलों की धूल’ झाड़ने जमीन पर उतर जाए, तो व्यवस्था की असली तस्वीर साफ हो जाती है। मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को भागलपुर के संयुक्त कृषि भवन परिसर में कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला। भागलपुर के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) प्रदीप सिंह ने जब बिना किसी पूर्व सूचना के कृषि विभाग के विभिन्न कार्यालयों में औचक दस्तक दी, तो वहां तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया। यह महज एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि जिले के अन्नदाताओं से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण विभाग की कार्यसंस्कृति को परखने की एक गंभीर कवायद थी।
प्रदीप सिंह, जो अपनी कार्यशैली में अनुशासन और पारदर्शिता के लिए जाने जाते हैं, ने इस निरीक्षण के दौरान न केवल उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस रजिस्टर) खंगाली, बल्कि कार्यालयों के कोनों में जमा गंदगी और फाइलों के बेतरतीब रख-रखाव पर भी कड़ी नाराजगी जाहिर की। संयुक्त कृषि भवन, जो जिले भर के किसानों की उम्मीदों का केंद्र है, वहां प्रशासनिक शिथिलता को उन्होंने गंभीरता से लिया।
उद्यान विभाग में खाली कुर्सियां और अटकी फाइलें: डीडीसी का कड़ा रुख
निरीक्षण की शुरुआत जब संयुक्त कृषि भवन परिसर से हुई, तो सबसे ज्यादा गाज उद्यान विभाग (Horticulture) पर गिरी। उप विकास आयुक्त जब उद्यान कार्यालय पहुंचे, तो वहां का नजारा देख वे दंग रह गए। कार्यालय के कई महत्वपूर्ण कर्मी अपनी ड्यूटी से नदारद पाए गए। बिना किसी पूर्व सूचना या अवकाश के कार्यालय से गायब रहना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, जिसे देखते हुए प्रदीप सिंह ने मौके पर ही कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने जिला उद्यान पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया कि निरीक्षण के दौरान जो भी कर्मी अपनी सीट पर उपस्थित नहीं थे, उनसे तुरंत ‘कारण-पृच्छा’ (Show-cause) की जाए। प्रशासन यह जानना चाहता है कि आखिर किन परिस्थितियों में और किसकी अनुमति से ये कर्मी कार्यालय से गायब थे। इतना ही नहीं, उद्यान कार्यालय में अभिलेखों (Records) के रख-रखाव में भी भारी अव्यवस्था देखने को मिली। महत्वपूर्ण फाइलें अलमारियों के बजाय इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं, जिसे लेकर उन्होंने कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर कागजी रिकॉर्ड सुरक्षित और सुव्यवस्थित नहीं होंगे, तो सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचने में देरी होना लाजमी है।
गंदगी देख बिफरे अधिकारी: परिसर की सफाई के लिए अल्टीमेटम
निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त की नजर संयुक्त कृषि भवन परिसर की साफ-सफाई पर भी गई। कार्यालय के गलियारों और बाहरी हिस्सों में जमा गंदगी को देखकर उन्होंने नाराजगी जाहिर की। उनका मानना है कि एक स्वच्छ वातावरण ही बेहतर कार्य संस्कृति की पहली शर्त है। किसानों के लिए बने इस प्रमुख भवन में स्वच्छता का अभाव प्रशासनिक लापरवाही का संकेत देता है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि परिसर की सफाई व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए। डस्टबिन की उपलब्धता और नियमित सफाई सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने समय-सीमा निर्धारित कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगली बार निरीक्षण के दौरान अगर स्वच्छता मानकों में कमी पाई गई, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाएगी।
जिला कृषि कार्यालय और आत्मा: उपस्थिति की स्थिति सामान्य
निरीक्षण के अगले चरण में प्रदीप सिंह जिला कृषि कार्यालय पहुंचे। यहां की स्थिति उद्यान विभाग की तुलना में कुछ बेहतर पाई गई। निरीक्षण के समय जिला कृषि पदाधिकारी, सहायक निदेशक (शस्य), प्रक्षेत्र, परियोजना निदेशक (आत्मा) और अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सहित अधिकांश महत्वपूर्ण अधिकारी और कर्मी अपनी ड्यूटी पर तैनात थे।
डीडीसी ने ‘आत्मा’ (ATMA) और अन्य तकनीकी शाखाओं की गतिविधियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि वर्तमान में किसानों के लिए कौन-कौन सी प्रशिक्षण योजनाएं चल रही हैं और उनका डेटाबेस किस प्रकार अपडेट किया जा रहा है। हालांकि यहां उपस्थिति संतोषजनक थी, लेकिन उन्होंने कार्य निष्पादन की गति को और तेज करने के निर्देश दिए ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े किसान तक समयबद्ध तरीके से पहुंच सके।
प्रयोगशालाओं में ‘वैज्ञानिक सक्रियता’: मिट्टी और बीज परीक्षण पर जताया संतोष
निरीक्षण का एक सकारात्मक पहलू वह रहा जब उप विकास आयुक्त परिसर में संचालित प्रयोगशालाओं के भवन में पहुंचे। यहाँ गुण नियंत्रण कार्यालय, बीज विश्लेषण प्रयोगशाला और मिट्टी जाँच प्रयोगशाला एक ही छत के नीचे संचालित हो रहे हैं। प्रदीप सिंह ने प्रयोगशालाओं के भीतर जाकर बीज और मिट्टी के नमूनों के परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया को बारीकी से समझा।
उन्होंने लैब में मौजूद वैज्ञानिकों और तकनीशियनों से बातचीत की और यह जानने की कोशिश की कि किसानों द्वारा लाए गए नमूनों की रिपोर्ट तैयार करने में कितना समय लगता है। प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली, उपकरणों की स्थिति और परीक्षण की गुणवत्ता को देखकर उन्होंने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच और बीजों की गुणवत्ता का सटीक विश्लेषण ही उन्नत कृषि का आधार है। उन्होंने वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अधिक से अधिक किसानों को मिट्टी जांच के लिए प्रेरित करें ताकि खाद के अनावश्यक उपयोग को कम किया जा सके और उत्पादन लागत घटाई जा सके।
जवाबदेही तय करने का संदेश: प्रशासन का ‘अलर्ट मोड’
भागलपुर के संयुक्त कृषि भवन में हुए इस औचक निरीक्षण ने एक बड़ा संदेश दिया है कि प्रशासन अब ‘सुस्ती’ को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। उप विकास आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी कार्यालय केवल कागजी घोड़े दौड़ाने के लिए नहीं हैं, बल्कि वे जनता की सेवा के लिए जवाबदेह हैं।
निरीक्षण के अंत में उन्होंने सभी विभागीय प्रमुखों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने कार्यालयों में नियमित रूप से फाइलों का ‘इंडेक्सिंग’ कराएं और सुनिश्चित करें कि कोई भी कर्मी बिना वैध कारण के कार्यालय से अनुपस्थित न रहे। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के इस दौर में डेटा मैनेजमेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाने की जरूरत है ताकि फाइलों के अंबार से मुक्ति मिल सके।
प्रदीप सिंह के इस दौरे के बाद अब कृषि भवन के गलियारों में सन्नाटे के बजाय काम की सक्रियता दिखने लगी है। अनुपस्थित कर्मियों से मांगी गई सफाई और रिकॉर्ड्स को सुधारने के निर्देशों का असर आने वाले दिनों में कृषि विभाग की कार्यक्षमता पर पड़ना तय माना जा रहा है। भागलपुर के किसानों के लिए यह एक शुभ संकेत है कि प्रशासन उनकी योजनाओं और सुविधाओं को लेकर अब सीधे ‘निगरानी’ मोड में आ गया है।


