पटना में ‘हाइड्रो केमिकल’ के नाम पर ‘चंडीगढ़ी जाम’ की डिलीवरी; जक्कनपुर पुलिस ने करबिगहिया में पकड़ी 16 लाख की शराब, कुरियर नेटवर्क के जरिए तस्करी का सनसनीखेज खुलासा

न्यूज डायरी: रसायनों के लेबल और शराब की बोतलें; पटना पुलिस की ‘केमिकल’ सर्जिकल स्ट्राइक

  • बड़ी बरामदगी: पटना के जक्कनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत करबिगहिया ट्रैफिक पोस्ट के पास पुलिस ने एक पिकअप वैन से लगभग 16 लाख रुपये मूल्य की 881 लीटर विदेशी शराब जब्त की है।
  • तस्करी का नया तरीका: शराब माफियाओं ने इस बार पुलिस को चकमा देने के लिए कुरियर सेवा का सहारा लिया और कार्टन पर ‘हाइड्रो केमिकल’ का भ्रामक लेबल लगाया था।
  • महिला सिपाही की सतर्कता: ट्रैफिक पोस्ट पर तैनात महिला सिपाही संगीता की पैनी नजरों ने संदिग्ध पिकअप को भांप लिया, जिससे इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ संभव हो सका।
  • गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके से मेहंदीगंज निवासी तस्कर धर्मेंद्र कुमार (23 वर्ष) को गिरफ्तार किया है, जबकि चालक वाहन छोड़कर फरार होने में सफल रहा।
  • चंडीगढ़ कनेक्शन: जब्त की गई शराब की खेप चंडीगढ़ निर्मित है, जिसे कुरियर के माध्यम से पटना सिटी में खपाने की योजना थी।
  • VOB इनसाइट: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद तस्करों की रचनात्मकता (Creativity) कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। ‘हाइड्रो केमिकल’ के नाम पर शराब मंगाना यह दर्शाता है कि अब तस्कर पारंपरिक रास्तों के बजाय संगठित कुरियर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का दुरुपयोग कर रहे हैं। 16 लाख की यह खेप केवल एक पिकअप वैन नहीं है, बल्कि यह अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के उस ‘सॉफ्ट टारगेट’ की ओर इशारा करती है जहाँ ‘चेकपोस्ट’ पर केवल लेबल देखकर वाहनों को जाने दिया जाता है। जक्कनपुर पुलिस की यह कार्रवाई उन कुरियर कंपनियों के लिए भी एक चेतावनी है जो बिना उचित जांच-पड़ताल के पार्सल बुक कर रही हैं।

पटना | 30 मार्च, 2026

​बिहार की राजधानी पटना में शराब माफियाओं के हौसले और उनकी चालाकी का एक ऐसा नमूना सामने आया है जिसने पुलिस महकमे को भी हैरान कर दिया है। शनिवार की देर रात जक्कनपुर थाना क्षेत्र के करबिगहिया ट्रैफिक पोस्ट पर जो कुछ हुआ, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, रसायनों की आड़ में मौत का सामान (शराब) परोसने की एक बड़ी साजिश को पटना पुलिस ने नाकाम कर दिया है। 881 लीटर शराब, जिसकी बाजार में कीमत लाखों में है, उसे ‘केमिकल’ बताकर पटना की गलियों में उतारने की तैयारी थी।

शनिवार की वो ‘केमिकल’ रात: 10:49 बजे का घटनाक्रम

​पटना के व्यस्ततम इलाकों में से एक करबिगहिया में शनिवार की रात करीब 10:49 बजे का समय था। ट्रैफिक पोस्ट पर पुलिस की टीम नियमित गश्त और वाहनों की निगरानी में जुटी थी। इसी बीच, एक सफेद रंग की पिकअप वैन तेजी से गुजरी। वाहन की गति और उस पर लदे कार्टन ने वहां तैनात महिला सिपाही संगीता के मन में संदेह पैदा किया। संगीता ने तत्परता दिखाते हुए वाहन को रुकने का इशारा किया।

​पुलिस को अपनी ओर बढ़ता देख पिकअप वैन के चालक के हाथ-पांव फूल गए। इससे पहले कि पुलिस वाहन के पास पहुँचती, चालक ने चलती गाड़ी को किनारे किया और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। संगीता ने तुरंत इसकी सूचना जक्कनपुर थाने को दी। गश्ती टीम मौके पर पहुँची और जब पिकअप की तलाशी ली गई, तो ऊपर से सब कुछ सामान्य दिख रहा था। कार्टन पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘हाइड्रो केमिकल’ लिखा हुआ था, जिससे पहली नजर में ऐसा लगा कि यह औद्योगिक रसायनों की खेप है।

जब ‘हाइड्रो केमिकल’ के भीतर से निकली ‘चंडीगढ़ी व्हिस्की’

​जक्कनपुर पुलिस जब पिकअप को थाने लेकर आई और गहनता से जांच शुरू की गई, तो परत-दर-परत सच्चाई सामने आने लगी। जब ‘हाइड्रो केमिकल’ लिखे हुए कार्टन खोले गए, तो पुलिस कर्मियों की आँखें फटी की फटी रह गईं। उन डिब्बों के भीतर रसायनों की बोतलों के बजाय चंडीगढ़ निर्मित विदेशी शराब की बोतलें करीने से सजाई गई थीं।

पुलिस ने बताया कि शराब की पैकेजिंग इतनी सटीक थी कि बिना कार्टन खोले यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि इसके भीतर क्या है। तस्करों ने गंध को छिपाने के लिए भी विशेष सावधानी बरती थी, ताकि पुलिस के खोजी कुत्ते भी भ्रमित हो सकें।

तस्करी का ‘लॉजिस्टिक्स’ मॉडल: कुरियर कंपनी के तार भी जुड़े?

​प्रारंभिक जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह है तस्करी के लिए कुरियर सेवा का उपयोग। गिरफ्तार तस्कर धर्मेंद्र कुमार ने पूछताछ में बताया कि यह खेप किसी गुप्त रास्ते से नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित कुरियर कंपनी के माध्यम से पटना मँगाई गई थी। तस्करों ने फर्जी जीएसटी नंबर या फर्जी आईडी का उपयोग कर ‘केमिकल’ के नाम पर माल बुक कराया था।

​जक्कनपुर पुलिस ने इस मामले में संबंधित कुरियर कंपनी के एक कर्मचारी को भी हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कुरियर कंपनी के कर्मियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा था या फिर कंपनी के सुरक्षा सिस्टम में सेंध लगाकर इस कार्य को अंजाम दिया गया। यह पहली बार नहीं है जब कुरियर का उपयोग हुआ है, लेकिन 16 लाख की इतनी बड़ी खेप का इस तरह आना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है।

धर्मेंद्र की स्वीकारोक्ति: पटना सिटी था ‘फाइनल’ गंतव्य

​गिरफ्तार युवक धर्मेंद्र कुमार (23 वर्ष), जो पटना के ही मेहंदीगंज इलाके का रहने वाला है, उसने पुलिस के सामने सिंडिकेट के कई राज उगले हैं। उसने बताया कि शराब की इस बड़ी खेप को पटना सिटी के इलाकों में छोटे-छोटे वितरकों (डिलीवरी बॉयज) को सौंपा जाना था। धर्मेंद्र केवल एक कड़ी था, जिसका काम खेप को रिसीव कर सुरक्षित ठिकाने तक पहुँचाना था।

​धर्मेंद्र ने मुख्य तस्कर का नाम भी उजागर किया है, जो कथित तौर पर पटना सिटी क्षेत्र से अपना नेटवर्क चलाता है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस सिंडिकेट के तार केवल चंडीगढ़ तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि राजस्थान और हरियाणा के शराब माफियाओं से भी इनके सीधे संपर्क हैं। बिहार में बढ़ती मांग और ऊंची कीमतों के कारण बाहरी राज्यों के माफिया अब संगठित लॉजिस्टिक्स कंपनियों को अपना ढाल बना रहे हैं।

जक्कनपुर पुलिस का एक्शन प्लान: फरार चालक की तलाश

​जक्कनपुर थानेदार के अनुसार, इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। फरार चालक की पहचान के लिए क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने पिकअप वैन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर मालिक की भी तलाश शुरू कर दी है। थानेदार ने स्पष्ट किया है कि केवल शराब पकड़ना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उस ‘रूट’ और ‘सिस्टम’ को भी ध्वस्त करना है जिसके जरिए ये पार्सल बिना किसी रोक-टोक के राजधानी के हृदय स्थल तक पहुँच रहे हैं।

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