दिल्ली में ‘खाकी’ का खूनी चेहरा: खगड़िया के पांडव की ‘बिहारी’ कहकर हत्या; हेड कांस्टेबल ने अंधाधुंध चलाई गोलियां, एक दोस्त की हालत नाजुक

नई दिल्ली/खगड़िया। देश की राजधानी दिल्ली, जिसे ‘दिलवालों का शहर’ कहा जाता है, वहां एक बार फिर बिहार के मेहनतकश युवाओं के खून से सड़कें लाल हुई हैं। दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में शनिवार, 25 अप्रैल 2026 की देर रात एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी जिसने न केवल दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, बल्कि महानगरों में बिहार के लोगों के प्रति छिपी नफरत और संकीर्ण मानसिकता को भी उजागर कर दिया है। खगड़िया जिले के रहने वाले दो युवक, जो अपने सुनहरे भविष्य की तलाश में दिल्ली की गलियों में पसीना बहा रहे थे, उन्हें दिल्ली पुलिस के ही एक हेड कांस्टेबल ने अपनी सरकारी हनक और पिस्तौल की ताकत के नशे में गोलियों से भून दिया। इस हमले में 21 वर्षीय पांडव कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका साथी कृष्ण अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली बात यह है कि इस खूनी वारदात के पीछे का कारण केवल ‘बिहारी’ होना बताया जा रहा है।

खुशियों की पार्टी और मौत का मातम: क्या था पूरा घटनाक्रम?

​यह पूरी घटना नजफगढ़ के रावता गांव की है। जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात खगड़िया के रहने वाले ये युवक अपने एक दोस्त के बेटे की जन्मदिन पार्टी में शामिल होने गए थे। पार्टी में खुशियों का माहौल था, हंसी-ठिठोली चल रही थी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि घर लौटते समय मौत उनका रास्ता रोककर खड़ी है। रात के सन्नाटे में जब पांडव और कृष्ण अपने दोस्तों और परिजनों के साथ पार्टी से लौट रहे थे, तभी यह विवाद शुरू हुआ।

​पुलिस उपायुक्त (DCP) कुशलपाल सिंह के अनुसार, पांडव कुमार दिल्ली के बिंदापुर इलाके में अपने परिवार के साथ रहता था और एक ई-कॉमर्स कंपनी में डिलीवरी ब्वॉय के रूप में काम कर अपनी आजीविका चला रहा था। उसका दोस्त कृष्ण भी उसी इलाके का निवासी है। शुरुआती जांच में पुलिस इस विवाद का कारण आरोपी के घर के बाहर होने वाले शोर-शराबे को बता रही है। लेकिन परिजनों का आरोप इससे कहीं अधिक संगीन और डरावना है, जो दिल्ली पुलिस की छवि को पूरी तरह तार-तार कर देता है।

“हम बिहार से हैं…” और चल गई गोलियां: चाची की आंखों देखी खौफनाक दास्तां

​मृतक पांडव की चाची गगन देवी, जो इस पूरी वारदात की मुख्य चश्मदीद हैं, उन्होंने इस खूनी मंजर का जो विवरण दिया है वह रूह कपा देने वाला है। गगन देवी के अनुसार, वारदात के समय वे सभी सड़क किनारे खड़े होकर घर जाने के लिए कैब (Cab) का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान वहां नीरज नाम का व्यक्ति आया, जो दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (दक्षिणी रेंज) में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात है।

​नीरज ने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की और जब उसे पता चला कि ये लोग बिहार के रहने वाले हैं, तो उसका व्यवहार अचानक हिंसक और अपमानजनक हो गया। गगन देवी का आरोप है कि नीरज ने केवल बिहार का नाम सुनते ही भद्दी-भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं। जब पांडव और उसके दोस्तों ने इस अपमानजनक व्यवहार और गालियों का विरोध किया, तो खाकी की हनक में चूर नीरज ने आव देखा न ताव और अपनी पिस्तौल निकाल ली। परिजनों का दावा है कि नीरज ने चिल्लाते हुए उन्हें ‘बिहारी’ कहा और सीधे पांडव पर गोलियां चला दीं। पांडव वहीं खून से लथपथ होकर गिर पड़ा और उसकी सांसे थम गईं। उसका दोस्त कृष्ण भी इस गोलीबारी की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से घायल हो गया।

रक्षक ही जब भक्षक बन जाए: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल पर दाग

​इस घटना ने दिल्ली पुलिस की सबसे प्रतिष्ठित यूनिट मानी जाने वाली ‘स्पेशल सेल’ पर भी गहरा दाग लगा दिया है। आरोपी नीरज इसी स्पेशल सेल में तैनात है, जिसे आतंकवाद और बड़े अपराधियों से लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। लेकिन नीरज ने अपनी ट्रेनिंग और सरकारी हथियार का इस्तेमाल एक निहत्थे डिलीवरी ब्वॉय और उसके साथियों पर कर दिया।

​क्या दिल्ली पुलिस का अनुशासन इतना कमजोर हो चुका है कि उसके कर्मचारी मामूली बात पर या केवल किसी की क्षेत्रीय पहचान के आधार पर उसकी जान ले सकते हैं? परिजनों का यह आरोप कि “बिहारी बोलकर गोली मारी”, यह साबित करता है कि आज भी समाज के एक हिस्से और यहाँ तक कि सुरक्षा बलों के भीतर भी बिहार के लोगों के प्रति एक गहरी कुंठा और घृणा व्याप्त है। पांडव केवल एक डिलीवरी ब्वॉय नहीं था, वह खगड़िया के एक गरीब परिवार का सहारा था, जो दिल्ली में मेहनत कर अपने घर का चूल्हा जला रहा था।

खगड़िया में मातम और इंसाफ की गुहार

​जैसे ही पांडव की मौत की खबर उसके पैतृक निवास खगड़िया पहुँची, वहां कोहराम मच गया। घर के इकलौते कमाऊ सदस्य की इस तरह बेरहमी से हत्या कर दिए जाने की खबर ने बूढ़े माता-पिता को तोड़कर रख दिया है। गांव के लोग आक्रोशित हैं और दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि क्या बिहार से होना कोई अपराध है? क्या दिल्ली की सड़कों पर कैब का इंतजार करना इतना बड़ा गुनाह है कि इसके लिए मौत की सजा दी जाए?

​घायल कृष्ण की स्थिति भी नाजुक बनी हुई है और उसके परिजन भी गहरे सदमे में हैं। खगड़िया की जनता और वहां के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बिहार सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि आरोपी दिल्ली पुलिस का हिस्सा है, ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कम है, इसलिए इस मामले का ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट में होना चाहिए और आरोपी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।

प्रशासनिक रुख और कानूनी कार्रवाई

​डीसीपी कुशलपाल सिंह ने आश्वासन दिया है कि कानून अपना काम करेगा और आरोपी चाहे पुलिस विभाग का ही क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी हेड कांस्टेबल नीरज की गिरफ्तारी की प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह केवल एक आपराधिक घटना है या दिल्ली में बिहार के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव का एक हिंसक रूप?

​दिल्ली पुलिस अक्सर ‘शांति, सेवा, न्याय’ का नारा देती है, लेकिन इस घटना ने इन तीनों शब्दों को लहूलुहान कर दिया है। जब एक रक्षक ही भक्षक बन जाए और अपनी पिस्तौल की नली एक बेगुनाह के सीने पर तान दे, तो जनता का विश्वास पूरी तरह टूट जाता है।

कब तक ‘बिहारी’ पहचान बनी रहेगी निशाना?

​अंततः, पांडव कुमार की यह हत्या केवल एक मौत नहीं है, बल्कि यह उन हजारों-लाखों बिहारी युवाओं के डर और असुरक्षा की कहानी है जो दूसरे राज्यों में मेहनत कर रहे हैं। 27 अप्रैल 2026 की यह सुबह खगड़िया के लिए एक ऐसी काली खबर लेकर आई है जो सदियों तक सालती रहेगी। वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क इस घटना की कड़ी निंदा करता है। हम मांग करते हैं कि पांडव के हत्यारे को ऐसी सजा मिले जो नजीर बन सके, ताकि भविष्य में कोई भी वर्दीधारी अपनी शक्ति का दुरुपयोग किसी निर्दोष ‘बिहारी’ पर न कर सके।

​दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को यह सोचना होगा कि उनके बलों के भीतर क्षेत्रीय नफरत का यह जहर कैसे पहुँच रहा है। क्या पांडव को न्याय मिलेगा? क्या कृष्ण फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो पाएगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या बिहार के लोग दिल्ली की सड़कों पर कभी सुरक्षित महसूस कर पाएंगे?

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