‘दिल्ली तो झांकी है, बिहार अभी बाकी है’ चुनावी नतीजों से गदगद हुए मांझी, जानिए.. इतनी खुशी की क्या है असली वजह?

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सभी को चौंका दिया है। 27 साल बाद बीजेपी की वापसी दिल्ली की सत्ता में होने जा रही है। बीजेपी की इस जीत से सहयोगी दलों में खुशी का माहौल है। दिल्ली चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलने से अपनी नाराजगी जता चुके जीतन राम मांझी बीजेपी को मिली बढ़त से गदगद हो गए हैं हालांकि जेडीयू और लोजपा (रामविलास) अपनी सीट गंवा चुके हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सभी को चौंका दिया है। 27 साल बाद बीजेपी की वापसी दिल्ली की सत्ता में होने जा रही है। बीजेपी की इस जीत से सहयोगी दलों में खुशी का माहौल है। दिल्ली चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलने से अपनी नाराजगी जता चुके जीतन राम मांझी बीजेपी को मिली बढ़त से गदगद हो गए हैं हालांकि जेडीयू और लोजपा (रामविलास) अपनी सीट गंवा चुके हैं।

दरअसल, दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटों के लिए बीते 5 फरवरी को वोटिंग हुई थी। 8 फरवरी को सुबह से ही मतगणना जारी है। इस बार दिल्ली की सरकार में बीजेपी की वापसी होती दिख रही है। नई दिल्ली सीट से पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल चुनाव हार चुके हैं। बीजेपी के प्रवेश वर्मा चुनाव जीत गए हैं। वहीं जंगपुरा सीट से दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी चुनाव हार चुके हैं हालांकि आखिरी वक्त में सीएम आतिशी ने आम आदमी पार्टी की लाज बचा ली।

दिल्ली में एनडीए के तीन दल बीजेपी, जेडीयू और चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) चुनाव लड़ रहे थे। जेडीयू और लोजपा (रामविलास) को एक-एक सीटें मिली थीं जबकि गठबंधन में शामिल जीतन राम मांझी को एक भी सीट नहीं मिल सकी थी। जिसको लेकर जीतन राम मांझी ने पिछले दिनों नाराजगी भी जताई थी और कहा था कि जिस तरह से झारखंड और दिल्ली के चुनाव में उनकी पार्टी को एक भी सीट नहीं दी गई, ऐसा बिहार में नहीं चलेगा, इस बार हम अपना हिस्सा लेकर रहेगी।

हालांकि आज चुनाव के रूझान आने के बाद जीतन राम मांझी गदगद हो गए हैं। उन्होंने कहा है कि दिल्ली तो झांकी है, बिहार अभी बाकी है। बिहार की सियासत में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि मांझी बीजेपी की जीत से गदगद तो हैं ही लेकिन कहीं न कहीं उनकी खुशी के पीछे जेडीयू और खासकर लोजपा (रामविलास) की हार एक बड़ी वजह हैं क्योंकि चिराग पासवान को बीजेपी ने झारखंड और दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक-एक सीट दी थी जबकि मांझी चुनाव से अलग रखा गया था। हाल ही में मांझी ने बिहार चुनाव में 20 से अधिक सीटों की मांग उठाई थी और कहा था कि झारखंड और दिल्ली चुनाव में तो कुछ नहीं बोले लेकिन इस बार बिहार चुनाव में वह अपना हिस्सा लेकर रहेंगे।

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